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क्रेडिट कार्ड का पूरा बिल नहीं भरा तो होगा बड़ा नुकसान! ₹100 की गलती भी पड़ सकती है भारी
छोटी सी बकाया राशि भी खत्म कर देती है इंटरेस्ट-फ्री पीरियड, जानिए बैंक कैसे लगाते हैं ब्याज
आज के समय में Credit Card लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। “अभी खरीदो, बाद में भुगतान करो” की सुविधा इसे बेहद लोकप्रिय बनाती है। लेकिन अगर इसका सही तरीके से इस्तेमाल न किया जाए, तो यह सुविधा भारी नुकसान में बदल सकती है।
अधिकतर क्रेडिट कार्ड में करीब 50 दिनों का इंटरेस्ट-फ्री पीरियड मिलता है, लेकिन इसके लिए एक जरूरी शर्त होती है—आपको हर बार पूरा बिल समय पर चुकाना होगा। यह अवधि दो हिस्सों में बंटी होती है: पहला बिलिंग साइकिल (लगभग 30 दिन) और दूसरा ग्रेस पीरियड (करीब 20 दिन), जिसमें आप बिना ब्याज के भुगतान कर सकते हैं।
मान लीजिए आपकी बिलिंग साइकिल 1 जनवरी से 31 जनवरी तक है और भुगतान की आखिरी तारीख 19 फरवरी है। अगर आपने 1 जनवरी को खरीदारी की है, तो आपके पास लगभग 50 दिन का समय होगा। वहीं 31 जनवरी को की गई खरीदारी पर भी करीब 20 दिन का समय मिल जाता है।
लेकिन असली समस्या तब शुरू होती है जब आप पूरा भुगतान नहीं करते। बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर थोड़ा सा पैसा—जैसे ₹100—बाकी रह जाए, तो इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। यही सबसे बड़ी गलती है।
जैसे ही आप पूरा भुगतान नहीं करते, बैंक तुरंत आपका इंटरेस्ट-फ्री पीरियड खत्म कर देता है। बची हुई राशि अगले महीने में कैरी फॉरवर्ड हो जाती है और उस पर तुरंत ब्याज लगना शुरू हो जाता है। इतना ही नहीं, अगली बार आप जो भी नई खरीदारी करते हैं, उस पर भी पहले दिन से ही ब्याज लगने लगता है।
उदाहरण के तौर पर, अगर आपका कुल बिल ₹50,100 है और आपने ₹50,000 ही चुकाया, तो ₹100 बाकी रह जाएगा। अब मान लीजिए अगले महीने आपने ₹30,000 की नई खरीदारी की। ऐसे में ब्याज सिर्फ ₹100 पर नहीं, बल्कि पूरे ₹30,100 पर लगेगा।

अगर बैंक की मासिक ब्याज दर 3.75% है, तो आपको लगभग ₹1,129 का ब्याज देना पड़ सकता है। GST जोड़ने के बाद यह रकम करीब ₹1,332 तक पहुंच सकती है। यानी ₹100 बचाने के चक्कर में आपको हजारों का नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्रेडिट कार्ड का सही फायदा उठाने के लिए एक आसान नियम अपनाएं—हर बार पूरा बिल समय पर चुकाएं। उदाहरण के लिए, कई स्मार्ट यूजर्स ऑटो-पेमेंट सेट कर देते हैं, ताकि कभी भी कोई बकाया न रह जाए और अनावश्यक ब्याज से बचा जा सके।
