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BCCI का बड़ा एक्शन: Ranji Trophy स्पॉट-फिक्सिंग मामले में Video Analyst Raja Reddy पर लगा आजीवन प्रतिबंध

Andhra vs Madhya Pradesh क्वार्टरफाइनल के दौरान खिलाड़ी को 5 लाख रुपये की रिश्वत देने की कोशिश, BCCI की Anti-Corruption Unit ने की पूरी जांच

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BCCI ने Video Analyst Raja Reddy पर लगाया आजीवन प्रतिबंध — Ranji Trophy Spot-Fixing Case Source: NDTV Sports
BCCI ने Video Analyst Raja Reddy पर Ranji Trophy 2024 स्पॉट-फिक्सिंग मामले में आजीवन प्रतिबंध लगाया। Andhra के खिलाड़ी Girinath Reddy की सतर्कता से हुआ खुलासा। Source: NDTV Sports

भारतीय क्रिकेट की साख को एक बार फिर उस वक्त धक्का लगा, जब Board of Control for Cricket in India (BCCI) ने 2024 Ranji Trophy सीजन के दौरान हुए एक स्पॉट-फिक्सिंग मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए Video Analyst Raja Reddy पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया। यह मामला उस वक्त सामने आया जब Andhra Cricket Association के एक खिलाड़ी ने टीम मैनेजर को एक भ्रष्ट प्रस्ताव की जानकारी दी — और फिर शुरू हुई एक ऐसी जांच, जिसने क्रिकेट जगत को हिलाकर रख दिया।

क्या था पूरा मामला?

फरवरी 2024 में Indore के Holkar Cricket Stadium में Andhra और Madhya Pradesh के बीच Ranji Trophy का क्वार्टरफाइनल मुकाबला खेला जा रहा था। इस मैच के दौरान Raja Reddy BCCI द्वारा नियुक्त एक Video Analyst के रूप में काम कर रहे थे। उनकी पहुंच Third Umpire और Match Referee के लिए आरक्षित कमरे तक थी — यानी वे एक बेहद संवेदनशील और जिम्मेदार पद पर थे।

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लेकिन इसी जिम्मेदारी का फायदा उठाते हुए Reddy ने Andhra के खिलाड़ी Girinath Reddy से संपर्क किया और उन्हें एक भ्रष्ट प्रस्ताव दिया। प्रस्ताव था — टीम की Playing XI की जानकारी साझा करना और अपने दो ओवरों में जानबूझकर पांच रन देना। इसके बदले में पांच लाख रुपये की पेशकश की गई। Girinath Reddy ने इस प्रस्ताव को सिरे से नकार दिया और तुरंत टीम मैनेजर को सूचित किया।

WhatsApp चैट ने खोला राज

BCCI की Anti-Corruption and Security Unit (ACSU) ने जब मामले की जांच शुरू की, तो WhatsApp कॉल और चैट हिस्ट्री ने सारी सच्चाई उजागर कर दी। रिकॉर्ड में साफ दिखा कि Raja Reddy ने Girinath से बार-बार संपर्क किया, लेकिन Girinath ने हर बार उनसे बात करने से इनकार किया। BCCI Ombudsman Arun Kumar Mishra द्वारा जारी आधिकारिक बयान में यह स्पष्ट रूप से दर्ज है कि Girinath Reddy ने साफ कहा कि वे इस मामले की शिकायत अपने टीम मैनेजर से करेंगे।

यह वही साहस है जो Indian Premier League (IPL) 2013 स्पॉट-फिक्सिंग कांड के दौरान नहीं दिखा था, जब कई खिलाड़ी चुप रहे और मामला बाद में मीडिया के जरिए सामने आया। Girinath की सतर्कता और ईमानदारी ने इस बार सिस्टम को वक्त रहते काम करने का मौका दिया।

फोन पर मिले सट्टेबाजी के सबूत

जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि Raja Reddy के फोन पर betting applications इंस्टॉल थीं। इतना ही नहीं, उनके आधिकारिक ईमेल अकाउंट से यह भी पता चला कि उनका दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म में से एक ‘bet365’ पर अकाउंट था। इसके अलावा, Skrill — एक वैश्विक डिजिटल पेमेंट वॉलेट — पर भी उनका अकाउंट मिला, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए होता है।

जांच के दौरान Reddy ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने पहले सट्टा लगाया था, लेकिन उनका दावा था कि यह काफी पुरानी बात है। हालांकि, रिकॉर्ड ने उनकी इस दलील को खारिज कर दिया। सबूत बताते हैं कि bet365 अकाउंट फरवरी 2023 में दोबारा सक्रिय किया गया था — यानी उस दौरान जब वे BCCI Anti-Corruption Code के तहत एक “participant” की श्रेणी में आते थे।

BCCI का कठोर फैसला

BCCI के Anti-Corruption Code के Articles 2.1.3 और 2.1.4 के तहत दोषी पाए जाने पर Reddy ने खुद भी अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार किया। इसके बाद BCCI ने उन पर आजीवन प्रतिबंध लगाने का फैसला किया। यह प्रतिबंध उन्हें BCCI से जुड़ी किसी भी गतिविधि में भाग लेने से रोकता है।

गौरतलब है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब BCCI ने किसी को आजीवन प्रतिबंधित किया हो। इससे पहले 2013 के IPL स्पॉट-फिक्सिंग कांड में S. Sreesanth और Ankeet Chavan जैसे खिलाड़ियों पर भी आजीवन प्रतिबंध लगाया गया था, हालांकि बाद में Sreesanth का प्रतिबंध Supreme Court के हस्तक्षेप के बाद हटाया गया। Raja Reddy का मामला इसलिए अलग और गंभीर है क्योंकि वे एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक सपोर्ट स्टाफ मेंबर थे जिन्हें बोर्ड ने खुद नियुक्त किया था।

क्रिकेट की नींव पर हमला

यह घटना एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि खेल के मैदान पर जो लोग परदे के पीछे काम करते हैं — चाहे वे analysts हों, physios हों या support staff — उनकी background verification और निगरानी कितनी जरूरी है। जिस व्यक्ति को बोर्ड ने भरोसे के साथ संवेदनशील जानकारी तक पहुंच दी, उसी ने उस भरोसे को तोड़ने की कोशिश की।

BCCI का यह कदम एक मजबूत संदेश है — क्रिकेट की शुचिता से कोई समझौता नहीं होगा, चाहे वह मैदान के भीतर से आए या बाहर से।