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SEBI का बड़ा फैसला! अब AIF और Angel Funds को फंड जुटाने में नहीं होगी देरी
GARUDA सिस्टम के तहत SEBI ने AIF स्कीम लॉन्च का इंतजार घटाकर 10 दिन करने का प्रस्ताव दिया, Angel Funds को मिल सकती है तुरंत फंडरेजिंग की अनुमति।
देश में स्टार्टअप और वैकल्पिक निवेश (Alternative Investment Funds – AIF) सेक्टर को तेज रफ्तार देने के लिए मार्केट रेगुलेटर SEBI ने बड़ा कदम उठाया है। SEBI ने नई “GARUDA” व्यवस्था के तहत AIF स्कीम लॉन्च करने की प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज बनाने का प्रस्ताव रखा है।
अब तक किसी नई AIF स्कीम को लॉन्च करने के लिए करीब 30 दिनों का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन नए प्रस्ताव के मुताबिक यह समय घटाकर सिर्फ 10 कार्यदिवस किया जा सकता है। यानी निवेश फंड अब पहले से कहीं तेजी से बाजार में उतर सकेंगे।
SEBI का मानना है कि भारत में AIF इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है और पूंजी को जल्दी निवेश में लगाने की जरूरत है। आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 तक देश में AIF की संख्या बढ़कर 1,849 हो चुकी है, जबकि कुल कमिटमेंट 15.74 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
क्या है GARUDA सिस्टम?
SEBI ने इस नई व्यवस्था का नाम “GARUDA” रखा है, जिसका पूरा मतलब है — Green-Channel: AIF Rollout Upon Document Acknowledgement। इसका मकसद AIF लॉन्च प्रक्रिया को तेज, आसान और कम कागजी बनाना है।
नई व्यवस्था के तहत यदि SEBI को दस्तावेजों में कोई बड़ी आपत्ति नहीं मिलती है, तो फंड मैनेजर 10 दिनों के भीतर अपनी स्कीम लॉन्च कर सकेंगे। इससे स्टार्टअप्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राइवेट कंपनियों में निवेश की रफ्तार बढ़ सकती है।
Angel Funds को भी बड़ी राहत
SEBI ने Angel Funds के लिए भी राहत देने का प्रस्ताव रखा है। अब इन्हें फंड जुटाने के लिए मर्चेंट बैंकर के जरिए लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद ही निवेशकों से पैसा जुटाने की अनुमति मिल सकती है।
इस कदम से शुरुआती स्टार्टअप्स को फंडिंग मिलने में तेजी आने की उम्मीद है। खासकर उन नए उद्यमियों को फायदा होगा जो शुरुआती निवेश के लिए लंबे समय तक इंतजार करते हैं।
Accredited Investors के लिए अलग नियम
SEBI ने Accredited Investors यानी आर्थिक रूप से सक्षम और अनुभवी निवेशकों के लिए भी नियम आसान करने का प्रस्ताव रखा है। ऐसे निवेशकों के लिए बनाई गई स्कीम्स को दस्तावेज जमा करने के तुरंत बाद लॉन्च करने की अनुमति मिल सकती है।
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रेगुलेटर का मानना है कि अनुभवी निवेशक खुद जोखिम समझने में सक्षम होते हैं, इसलिए उन पर ज्यादा प्रतिबंध लगाने की जरूरत नहीं है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को बड़ा फायदा मिलेगा। नई कंपनियों को तेजी से निवेश मिलेगा, जिससे रोजगार और इनोवेशन दोनों को बढ़ावा मिल सकता है।
हालांकि SEBI ने साफ किया है कि नियम आसान होने के बावजूद निगरानी जारी रहेगी। यदि किसी फंड में गड़बड़ी या गलत जानकारी पाई जाती है, तो बाद में कार्रवाई की जा सकती है।
