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अमेरिका-चीन नहीं, अब भारत तय करेगा अगली सदी का भविष्य? गौतम अडानी ने बताई देश की सबसे बड़ी ताकत
CII बिजनेस समिट में गौतम अडानी ने कहा कि आने वाला दौर ऊर्जा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर नियंत्रण का होगा। भारत के पास बढ़ती मांग और विशाल बाजार सबसे बड़ी ताकत है।
भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है और अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि आने वाली सदी में वैश्विक नेतृत्व कौन करेगा। इसी बीच अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि जिस देश के पास ऊर्जा और कंप्यूटिंग क्षमता का नियंत्रण होगा, वही भविष्य की दुनिया को दिशा देगा।
सोमवार को आयोजित CII बिजनेस समिट में बोलते हुए गौतम अडानी ने कहा कि आज के समय में केवल आर्थिक ताकत काफी नहीं है। किसी भी देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा सबसे अहम स्तंभ बन चुके हैं। उन्होंने कहा, “जो देश अपनी ऊर्जा को नियंत्रित करेगा, वही अपने औद्योगिक भविष्य को नियंत्रित करेगा। और जो देश कंप्यूटिंग शक्ति को नियंत्रित करेगा, वही इंटेलिजेंस यानी AI की दुनिया का नेतृत्व करेगा।”
अडानी ने अमेरिका और चीन का उदाहरण देते हुए बताया कि दोनों देशों ने समय रहते ऊर्जा और तकनीक में आत्मनिर्भर बनने की रणनीति अपनाई। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने फ्रैकिंग और आधुनिक ड्रिलिंग तकनीक के जरिए खुद को तेल आयात करने वाले देश से दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादकों में बदल दिया।
वहीं चीन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चीन अब विदेशी चिप्स पर निर्भर नहीं रहना चाहता और AI सेक्टर में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहा है। अडानी के मुताबिक, आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा नई ताकत बनेंगे।
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हालांकि उन्होंने साफ कहा कि भारत का रास्ता अमेरिका या चीन जैसा नहीं होगा। भारत की असली ताकत उसकी तेजी से बढ़ती आबादी, बढ़ता मध्यम वर्ग और विशाल घरेलू बाजार है। उन्होंने कहा कि भारत में जो भी इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा या टेक्नोलॉजी बनाई जाएगी, उसकी मांग पहले से मौजूद है।

अडानी ने कहा कि देश में तेजी से शहरों का विस्तार हो रहा है, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है और छोटे व्यवसाय डिजिटल हो रहे हैं। ऐसे में भारत के पास दुनिया की अगली बड़ी आर्थिक शक्ति बनने का मजबूत अवसर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अगर ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश करता रहा, तो आने वाले दशक में वह वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बन सकता है।
