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“सबसे शालीन शब्दों में राय रखी और माफ़ी देने को मजबूर कर दिया गया…” AR Rahman विवाद पर Varun Grover का तीखा समर्थन
‘Communal remark’ विवाद के बीच Varun Grover ने AR Rahman के समर्थन में उठाई आवाज़, बोले— यह बढ़ती विभाजनकारी सोच का सबूत है
भारतीय संगीत जगत के सबसे बड़े नामों में शामिल एआर रहमान हाल ही में एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए। यह विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उनके काम की रफ्तार धीमी हुई है, और इसके पीछे “बदलते पावर डायनैमिक्स” और संभवतः एक “communal चीज़” भी कारण हो सकती है।
रहमान का यह बयान BBC नेटवर्क को दिए गए एक इंटरव्यू में सामने आया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। कई लोगों ने उनके बयान को गलत तरीके से लिया और उन्हें सफाई देने पर मजबूर होना पड़ा।
Varun Grover ने Rahman के समर्थन में क्या कहा?
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गीतकार वरुण ग्रोवर ने इस पूरे विवाद पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने फिल्म लगान के लोकप्रिय गीत ‘O Paalanhaare’ का वीडियो अपने X (Twitter) अकाउंट पर साझा करते हुए लिखा कि—
“पिछले तीन दशकों के सबसे महान जीवित संगीतकार को, बेहद विनम्र और अपने अनुभव के आधार पर कही गई राय के लिए, गालियाँ दी गईं—यहाँ तक कि इंडस्ट्री के लोगों द्वारा भी।”

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ग्रेवर ने आगे कहा कि अगले ही दिन रहमान को माफ़ी या सफ़ाई देने पर मजबूर कर दिया गया, जो इस बात का प्रमाण है कि समाज में असहिष्णुता और विभाजन कितना बढ़ चुका है।
Rahman का ‘Communal’ बयान क्या था?
AR Rahman ने इंटरव्यू में कहा था कि कई बार उन्हें काम न मिलने की वजहें सीधे नहीं बताई जातीं, बल्कि “Chinese whispers” के ज़रिए बातें उन तक पहुँचती हैं।
उन्होंने कहा कि—
“अब रचनात्मक लोग नहीं, बल्कि गैर-रचनात्मक लोग फैसले ले रहे हैं। यह कभी-कभी communal भी हो सकता है, लेकिन सामने से नहीं कहा जाता।”
उनका कहना था कि कई बार म्यूज़िक कंपनियाँ एक कंपोज़र को बुक करके भी अंत में कई दूसरे कंपोज़र्स को हायर कर लेती हैं।
Shobhaa De और Shaan ने क्यों जताई असहमति?
लेखिका और कॉलमनिस्ट शोभा डे ने इस बयान को “खतरनाक” करार दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 50 वर्षों में उन्होंने बॉलीवुड को काफी हद तक साम्प्रदायिक तनाव से मुक्त पाया है और यहाँ प्रतिभा ही सबसे बड़ा पैमाना रही है।

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वहीं मशहूर गायक शान ने भी किसी communal या minority bias से इनकार किया। उन्होंने कहा कि काम मिलना-न-मिलना व्यक्तिगत पसंद और समय पर निर्भर करता है, न कि धर्म पर।
Javed Akhtar का क्या कहना है?
प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर ने भी इस मुद्दे पर कहा कि उन्होंने कभी इंडस्ट्री में इस तरह का साम्प्रदायिक पक्षपात महसूस नहीं किया।
उनका मानना है कि Rahman जैसे बड़े कलाकार को आज भी हर कोई सम्मान देता है।
“Never wished to cause pain” — Rahman की सफ़ाई
लगातार आलोचना के बाद AR Rahman ने Instagram पर एक वीडियो साझा कर अपनी बात स्पष्ट की।
उन्होंने कहा कि—
“भारत मेरी प्रेरणा है, मेरा घर है। मेरा उद्देश्य कभी किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं रहा।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक ऐसा देश है जो रचनात्मक स्वतंत्रता और विविध आवाज़ों का सम्मान करता है।
Rahman ने अपने कई प्रोजेक्ट्स का ज़िक्र किया—
- Jala
- Sunshine Orchestra
- Secret Mountain (भारत का पहला मल्टीकल्चरल वर्चुअल बैंड)
- Ramayana पर Hans Zimmer के साथ काम
इन सबको उन्होंने अपनी रचनात्मक यात्रा का अहम हिस्सा बताया।
निष्कर्ष
यह विवाद सिर्फ AR Rahman के बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि क्या आज भी रचनात्मक राय रखने की पूरी आज़ादी है?
Varun Grover का समर्थन इस बात की याद दिलाता है कि असहमति को भी समझदारी और सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए—खासकर तब, जब वह देश के सबसे सम्मानित कलाकारों में से एक की हो।
