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High Protein Diet पर भी वजन क्यों बढ़ जाता है? जानिए असली वजह जो हर कोई मिस कर रहा है

सिर्फ प्रोटीन बढ़ाने से वजन कम नहीं होता—जानें कौन-सी आदतें और गलतियां आपके फिटनेस गोल को बिगाड़ देती हैं।

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High Protein Diet पर भी वजन बढ़ता है? जानिए असली कारण और सही तरीका
हाई प्रोटीन डाइट के बावजूद वजन बढ़ने की असली वजह—कम एक्टिविटी और गलत खाने की आदतें।

आजकल हाई प्रोटीन डाइट एक ट्रेंड बन चुकी है। जिम जाने वाले हों, वेट-लॉस चाहने वाले हों या फिटनेस इन्फ्लुएंसर—लगभग हर कोई कहता है, “प्रोटीन ज्यादा लो… वजन अपने-आप कम हो जाएगा।”
लेकिन असलियत इससे काफी अलग है। कई लोग शिकायत करते हैं कि उन्होंने प्रोटीन बढ़ाया, फिर भी वजन बढ़ गया, थकान रहने लगी और शरीर हल्का महसूस करने की जगह और भारी लगने लगा।

तो आखिर ऐसा होता क्यों है? वजह सिर्फ डाइट नहीं, लाइफस्टाइल और मसल एक्टिविटी है, जिसके बिना प्रोटीन आधा-अधूरा काम करता है।


प्रोटीन एक “पार्टिसिपेटरी न्यूट्रिएंट” है — अकेला कुछ नहीं कर सकता

डाइट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, प्रोटीन सिर्फ खाने से असर नहीं दिखाता। इसे शरीर में सक्रिय करने के लिए दो चीजें बेहद जरूरी हैं—
(1) मसल्स की मूवमेंट
(2) सही मैकेनिकल स्टिमुलेशन

अगर आपकी मसल्स दिनभर सुस्त पड़ी रहती हैं, आप बैठकर काम करते हैं, वॉक या एक्सरसाइज के लिए समय नहीं निकालते—तो चाहे आप कितना भी प्रोटीन ले लें, वह बॉडी में फैट के रूप में स्टोर हो सकता है।


सिर्फ प्रोटीन बढ़ाने से वजन क्यों बढ़ता है?

1. शरीर अतिरिक्त प्रोटीन को फैट में बदल देता है

जब मसल्स एक्टिव नहीं होतीं, तो बॉडी उपयोग न होने वाले प्रोटीन को ग्लूकोज़ और आगे जाकर फैट में बदल देती है।
यही कारण है कि हाई-प्रोटीन लेने के बावजूद वजन बढ़ जाता है।

2. बिना एक्सरसाइज के मेटाबॉलिज्म डाउन हो जाता है

प्रोटीन पचाने के लिए हाई मेटाबॉलिज्म चाहिए।
बैठे-बैठे रहने से मेटाबॉलिक रेट गिर जाता है, जिससे प्रोटीन का सही उपयोग नहीं हो पाता।

3. हॉर्मोनल असंतुलन भी बढ़ सकता है

बहुत ज्यादा प्रोटीन, खासकर एनिमल सोर्स में, कोर्टिसोल लेवल बढ़ाता है।
इससे शरीर में पानी रिटेंशन और वजन बढ़ने की संभावना बढ़ती है।


हाई प्रोटीन डाइट तभी काम करेगी जब आप ये 4 काम साथ में करें

1. रोज़ाना 35–45 मिनट मसल-ऐक्टिव वर्कआउट

जैसे:

  • स्क्वाट
  • लंज
  • पुश-अप
  • रेज़िस्टेंस बैंड एक्सरसाइज
  • तेज़ वॉक + स्टेयर क्लाइंबिंग

यही वर्कआउट प्रोटीन को फैट नहीं, मसल में बदलते हैं।

2. हर दो घंटे में शरीर को मूव कराएं

लंबे समय तक बैठना प्रोटीन के सिंथेसिस को रोक देता है।
कम से कम हर 120 मिनट में 3–5 मिनट की वॉक ज़रूरी है।

3. दिनभर में पानी की कमी न होने दें

प्रोटीन के ब्रेकडाउन के लिए हाई हाइड्रेशन सबसे जरूरी है।
कम पानी = थकान + सूजन + वजन बढ़ना।

4. प्रोटीन को कार्ब्स और फाइबर के साथ बैलेंस करें

उदाहरण:

  • दाल + ब्राउन राइस
  • अंडा + ओट्स
  • पनीर + सब्जियां
  • चिकन + साबुत अनाज

सिर्फ प्रोटीन खाने से शरीर उसे उपयोग नहीं कर पाएगा।

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नए रिसर्च क्या कहते हैं?

न्यूट्रिशन साइंस की कई नई स्टडीज़ बताती हैं कि दुनिया के 60% लोग हाई प्रोटीन डाइट को गलत तरीके से फॉलो करते हैं।
ग़लत समय, ग़लत मात्रा और शून्य एक्टिविटी के कारण—प्रोटीन का फायदा नहीं, नुकसान होता है।


आसान भाषा में समझें

प्रोटीन गाड़ी का ईंधन है, लेकिन अगर गाड़ी चल ही नहीं रही, तो ईंधन सिर्फ टैंक भरता रहेगा—वजन बढ़ेगा, एनर्जी नहीं।


निष्कर्ष

हाई-प्रोटीन डाइट शानदार है—लेकिन तभी जब आप इसे सही वर्कआउट, एक्टिव लाइफस्टाइल और बैलेंस्ड न्यूट्रिशन के साथ जोड़कर अपनाएं।

जो प्रोटीन शरीर में काम नहीं करता, वही अंत में वजन बढ़ाने का कारण बन जाता है। इसलिए सोच-समझकर, शरीर की ज़रूरत के अनुसार और सही तकनीक के साथ प्रोटीन को डाइट का हिस्सा बनाएं।

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