Connect with us

(International News

West Asia War का असर: पेंट शॉप से लेकर प्रोडक्शन लाइन तक, ऑटो इंडस्ट्री पर गैस संकट की बड़ी मार

गाड़ियों की डिलीवरी पर मंडरा रहा खतरा, प्राकृतिक गैस की कमी से ऑटो कंपनियों को घटानी पड़ रही उत्पादन क्षमता

Published

on

ऑटोमोबाइल प्लांट की पेंट शॉप में काम करते कर्मचारी, जहां गैस संकट के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है

नई दिल्ली:
West Asia में जारी युद्ध का असर अब सिर्फ तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री तक गहराई से पहुंच चुका है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि बड़ी-बड़ी ऑटो कंपनियों को अपनी उत्पादन क्षमता कम करनी पड़ रही है — और इसकी सबसे बड़ी वजह है पेंट शॉप में आने वाली रुकावट

पेंट शॉप बना सबसे बड़ा ‘बॉटलनेक’

आम तौर पर लोग सोचते हैं कि कार बनाने में सबसे अहम काम इंजन या असेंबली लाइन का होता है, लेकिन इस समय असली समस्या पेंट शॉप में आ रही है। किसी भी वाहन को बाजार में उतारने से पहले उसका पेंट होना जरूरी है — बिना पेंट के गाड़ी की डिलीवरी संभव ही नहीं।

यहीं पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है प्राकृतिक गैस (Natural Gas) का।

  • पेंट को सुखाने के लिए हाई-टेम्परेचर ओवन
  • बॉडी ड्राइंग प्रोसेस
  • एयर हीटिंग और वेंटिलेशन सिस्टम
    इन सभी में गैस का इस्तेमाल होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, एक ऑटो प्लांट में कुल ऊर्जा खपत का 50% से ज्यादा हिस्सा पेंटिंग प्रक्रिया में ही खर्च होता है


गैस संकट से क्यों बढ़ी परेशानी?

West Asia में चल रहे युद्ध के कारण गैस सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत में इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए गैस की उपलब्धता कम कर दी गई है, जिससे ऑटो कंपनियों को मजबूरी में विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं।

लेकिन समस्या यह है कि:

  • वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत तुरंत उपलब्ध नहीं हैं
  • लागत बढ़ रही है
  • उत्पादन में देरी हो रही है

इसका सीधा असर उत्पादन शेड्यूल पर पड़ रहा है।


एक्सपोर्ट पर सबसे पहले पड़ेगा असर

इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, अगर यह स्थिति कुछ हफ्तों तक और बनी रहती है, तो सबसे पहले असर एक्सपोर्ट (निर्यात) पर दिखेगा।

भारत से बाहर भेजी जाने वाली गाड़ियों की सप्लाई में देरी हो सकती है, जिससे:

  • इंटरनेशनल मार्केट में भारत की साख प्रभावित हो सकती है
  • कंपनियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है
jpg

ऑटो कंपनियों के सामने क्या विकल्प हैं?

इस संकट से निपटने के लिए कंपनियां कुछ कदम उठा रही हैं:

  • एलपीजी या अन्य ईंधन का उपयोग
  • उत्पादन शिफ्ट में बदलाव
  • सीमित मॉडल्स का निर्माण

हालांकि, ये सभी उपाय अस्थायी हैं और लंबे समय तक समाधान नहीं दे सकते।


आम ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?

अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में ग्राहकों को:

  • गाड़ी की डिलीवरी में देरी
  • कीमतों में बढ़ोतरी
  • कुछ मॉडल्स की कमी

जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।


निष्कर्ष

West Asia युद्ध का असर अब ग्लोबल सप्लाई चेन के हर हिस्से में दिखने लगा है। ऑटो इंडस्ट्री में पेंट शॉप जैसी छोटी लगने वाली कड़ी भी पूरे सिस्टम को प्रभावित कर सकती है — यह इस संकट ने साफ कर दिया है।

अगर जल्द ही गैस सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो यह संकट और गहरा सकता है।

और पढ़ें – DAINIK DIARY

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *