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176 विमान, 45 घंटे और ईरान की खतरनाक पहाड़ियाँ अमेरिका ने जो कर दिखाया, वो इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ

F-15E लड़ाकू विमान मार गिराने के बाद ईरान ने सोचा था उसे अमेरिकी पायलट मिल जाएगा — लेकिन ट्रम्प ने जो ‘एयर आर्मडा’ भेजा, उसे देख दुनिया हैरान रह गई

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176 विमान और 45 घंटे: ईरान में अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा बचाव अभियान | Dainik Diary
अमेरिकी वायुसेना का F-15E Strike Eagle — वही विमान जिसे ईरान ने 3 अप्रैल को मार गिराया और जिसके दोनों क्रू मेंबर्स को बचाने के लिए अमेरिका ने 176 विमानों का 'एयर आर्मडा' तैनात किया। (फाइल फोटो)

वॉशिंगटन/तेहरान। 3 अप्रैल 2026 की वो रात अमेरिकी सेना के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। ईरान के दक्षिणी हिस्से में एक मिशन पर निकला अमेरिकी वायुसेना का F-15E Strike Eagle विमान अचानक दुश्मन की जमीन पर आ गिरा। विमान में सवार दोनों अधिकारियों ने इजेक्ट किया और उतर पड़े — ईरान की उन पहाड़ियों में जहाँ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) उनकी तलाश में पहले से लग गई थी।

पहला पायलट तो उसी दिन यानी 3 अप्रैल को बचा लिया गया — Black Hawk हेलीकॉप्टरों की मदद से। लेकिन दूसरे अधिकारी — Weapon Systems Officer यानी WSO, जो एक Colonel थे — जाग्रोस पर्वत की ऊबड़-खाबड़ वादियों में छुपे थे। घायल थे, अकेले थे, और दुश्मन उनके करीब आता जा रहा था।

वो 45 घंटे जो दुनिया भर में चर्चा में हैं

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने व्हाइट हाउस में बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान 45 घंटे 56 मिनट तक एक सिक्योर कॉल खुली रखी गई — बिना एक पल की चूक के। Axios हेगसेथ ने कहा — “हमारा मिशन एक पल के लिए भी आँख नहीं झपकाने वाला था।”

इस दौरान व्हाइट हाउस के Situation Room में खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, Joint Chiefs Chairman जनरल Dan Caine और उनकी पूरी टीम नजर गड़ाए बैठी थी। ट्रम्प को हर पल अपडेट मिल रहा था — रक्षा मंत्री हेगसेथ सीधे Oval Office से संपर्क में थे।

176 विमान — जो ‘एयर आर्मडा’ बना

जनरल Caine ने इसे “एयर आर्मडा” का नाम दिया — 176 विमानों का एक ऐसा बेड़ा जिसमें बमवर्षक, लड़ाकू जेट, रिफ्यूलिंग टैंकर, हेलीकॉप्टर और ड्रोन सभी शामिल थे। Axios इनमें A-10 Warthog, HH-60 Jolly Green II और HC-130 Combat King II जैसे विमान खासतौर पर नाम लिए गए।

176 विमान और 45 घंटे: ईरान में अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा बचाव अभियान | Dainik Diary


CIA ने पहले एक Deception Campaign चलाई — ईरान के भीतर यह खबर फैला दी कि अमेरिका ने WSO को पहले ही ढूंढ लिया है और जमीन पर उसे निकाल रहा है — ताकि IRGC भ्रमित हो जाए। Air & Space Forces Magazine इस चाल के बाद CIA ने असली ठिकाना खोजा और ट्रम्प ने rescue mission को हरी झंडी दी।

ईरान ने लगाया था इनाम

ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने खबर फैलाई थी कि अमेरिकी WSO को पकड़वाने पर इनाम मिलेगा — स्थानीय व्यापारियों की ओर से करीब 60,000 डॉलर की राशि का ऐलान हुआ था। NBC News यह रकम ईरानी जनता को उकसाने के लिए थी। लेकिन अमेरिकी Colonel अपनी जगह डटे रहे — घायल होने के बावजूद चल सकते थे और पहाड़ियों में छुपे रहे।

जब SEAL Team Six और IRGC एक साथ दौड़े

WSO जाग्रोस पहाड़ों में छुप गए, जबकि IRGC, SEAL Team Six और स्थानीय खानाबदोश कबीले — तीनों उन्हें ढूंढने में जुट गए। Wikipedia यह मानो एक जिंदगी और मौत की दौड़ थी — जहाँ हर मिनट मायने रखता था।

MQ-9 Reaper ड्रोन ने उन ईरानी ताकतों पर हमला किया जो WSO के तीन किलोमीटर के दायरे में आ चुकी थीं। Air & Space Forces Magazine आखिरकार करीब दो दिन बाद — 5 अप्रैल को तड़के — WSO को सुरक्षित निकाल लिया गया।

ट्रम्प ने कहा — ‘WE GOT HIM!’

ट्रम्प ने Truth Social पर लिखा — “हमारी सेना ने अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी Search and Rescue Operations में से एक को अंजाम दिया। यह बहादुर योद्धा ईरान के खतरनाक पहाड़ों में दुश्मन के बीच था, जो उसे घेरते आ रहे थे — लेकिन वो कभी अकेला नहीं था।”

इजरायल के PM नेतन्याहू ने भी बधाई देते हुए कहा कि Israel ने इस ऑपरेशन में खुफिया मदद दी और कुछ हमले टाले ताकि rescue mission में रुकावट न आए।

ऑपरेशन में नुकसान भी हुआ

अमेरिका ने खुद कुछ विमान नष्ट किए — दो C-130 Hercules को जानबूझकर उड़ा दिया ताकि वो दुश्मन के हाथ न लगें। चार MH-6 या AH-6 स्पेशल ऑपरेशन हेलीकॉप्टर भी नष्ट हुए। हालाँकि अमेरिका का दावा है कि इस पूरे ऑपरेशन में एक भी अमेरिकी सैनिक की जान नहीं गई।

ईरान ने इस ऑपरेशन को “विफल” बताया और इसकी तुलना 1980 के Operation Eagle Claw से की — जब अमेरिका 53 बंधकों को छुड़ाने की कोशिश में नाकाम रहा था।

यह ऑपरेशन क्यों है इतिहास में खास?

सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह अमेरिका के सबसे कठिन Combat Search and Rescue Missions में से एक था — इलाके, दुश्मन की सक्रियता और बचाव के बाद की जटिलताओं को देखते हुए। सात अलग-अलग ठिकानों पर ऑपरेशन चलाना, 176 विमान तैनात करना और 45 घंटे से ज्यादा तक कोऑर्डिनेशन बनाए रखना — यह सब मिलकर इसे अभूतपूर्व बनाता है।

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