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प्रियंका चोपड़ा ने माना सच: मैं मॉर्निंग पर्सन नहीं हूं, लेकिन इस एक कार्डियो से रहती हूं फिट

सुबह जल्दी उठने से नफरत, पर फिटनेस को लेकर कोई समझौता नहीं—प्रियंका का स्कूल से हॉलीवुड तक का फिटनेस मंत्र

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Priyanka Chopra Fitness Secret: Why She Loves Skipping Cardio and Hates Mornings
फिटनेस और लाइफस्टाइल को लेकर अपने बेबाक विचार साझा करतीं प्रियंका चोपड़ा

बॉलीवुड से हॉलीवुड तक अपनी पहचान बना चुकीं प्रियंका चोपड़ा सिर्फ अपनी एक्टिंग ही नहीं, बल्कि अपनी फिटनेस और लाइफस्टाइल को लेकर भी अक्सर चर्चा में रहती हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी दिनचर्या को लेकर एक ऐसा खुलासा किया, जिससे लाखों लोग खुद को उनसे जुड़ा महसूस कर सकते हैं।

प्रियंका ने खुलकर स्वीकार किया कि वह मॉर्निंग पर्सन बिल्कुल नहीं हैं। उनका कहना है कि उन्हें सुबह जल्दी उठना बिल्कुल पसंद नहीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि वह रात भर जाग सकती हैं, लेकिन सुबह जल्दी उठने के लिए तभी तैयार होंगी जब काम हो और उसके लिए “वाकई पैसे मिल रहे हों।”

हालांकि, सुबह जल्दी न उठ पाने का मतलब यह नहीं कि प्रियंका फिटनेस को नजरअंदाज करती हैं। उन्होंने बताया कि वह हफ्ते में कम से कम तीन बार कोई न कोई वर्कआउट करने की कोशिश जरूर करती हैं, भले ही वह खुद को पूरी तरह अनुशासित न मानती हों।

प्रियंका का पसंदीदा कार्डियो एक्सरसाइज है — स्किपिंग (रस्सी कूदना)। उन्होंने बताया कि स्किपिंग उन्होंने स्कूल के दिनों में सीखी थी और फिल्म Mary Kom की तैयारी के दौरान इसमें और भी निखार आया। प्रियंका के मुताबिक स्किपिंग न सिर्फ असरदार कार्डियो है, बल्कि इसे कहीं भी किया जा सकता है क्योंकि रस्सी आसानी से बैग में आ जाती है।

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उन्होंने यह भी माना कि फिट रहने के लिए किसी भारी-भरकम जिम या महंगे इक्विपमेंट की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी स्कूल में सीखी गई छोटी-सी आदतें भी लंबे समय तक काम आती हैं।

खाने-पीने को लेकर भी प्रियंका काफी ईमानदार हैं। उन्होंने एक अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने दुनिया के कुछ हिस्सों में कीड़ों (worms) को भी चखा है, जो वहां एक डेलिकेसी माने जाते हैं। लेकिन यह अनुभव उनके लिए इतना खास नहीं रहा कि वह इसे दोबारा दोहराना चाहें।

प्रियंका चोपड़ा की यह बातें एक बार फिर साबित करती हैं कि परफेक्ट लाइफस्टाइल जैसा कुछ नहीं होता। हर इंसान की अपनी पसंद, सीमाएं और आदतें होती हैं—बस जरूरी है खुद के शरीर और मन की सुनना।

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