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PM CARES पर सवाल क्यों नहीं पूछे जा सकते लोकसभा में PMO ने बताई वजह जानिए पूरा मामला
PMO ने लोकसभा सचिवालय को क्यों कहा कि PM CARES, PMNRF और National Defence Fund पर सवाल नियमों के दायरे से बाहर हैं
प्रधानमंत्री कार्यालय यानी Prime Minister’s Office ने लोकसभा सचिवालय को साफ कर दिया है कि संसद में PM CARES Fund, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष और नेशनल डिफेंस फंड से जुड़े सवाल या मुद्दे स्वीकार नहीं किए जा सकते। इस फैसले के पीछे सरकार ने नियमों और फंड की प्रकृति को आधार बनाया है।
सूत्रों के मुताबिक, 30 जनवरी 2026 को PMO ने Lok Sabha सचिवालय को बताया कि इन तीनों फंड्स से जुड़े प्रश्न लोकसभा की कार्यवाही और प्रक्रिया के नियमों के तहत मान्य नहीं हैं। खास तौर पर नियम 41(2)(viii) और 41(2)(xvii) का हवाला दिया गया है।
PM CARES और अन्य फंड आखिर हैं क्या
PM CARES फंड की स्थापना 27 मार्च 2020 को कोविड-19 महामारी के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में देश को राहत पहुंचाना था। यह फंड एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत है और इसकी राशि पूरी तरह से स्वैच्छिक जन-दान से आती है।
सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मार्च 2023 के अंत तक PM CARES फंड में करीब 6,283 करोड़ रुपये की शेष राशि थी। इसके अलावा, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) की स्थापना 1948 में हुई थी, जिसका उपयोग प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटनाओं में प्रभावित परिवारों की मदद के लिए किया जाता है। वहीं National Defence Fund (NDF) का इस्तेमाल सशस्त्र बलों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए किया जाता है।

पहले भी अदालतों में साफ कर चुका है केंद्र
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने PM CARES फंड की कानूनी स्थिति पर अपना रुख साफ किया हो। जनवरी 2023 में केंद्र सरकार ने Delhi High Court में बताया था कि PM CARES फंड न तो संविधान के तहत बना है और न ही संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के अंतर्गत। सरकार ने यह भी कहा था कि यह ट्रस्ट RTI एक्ट के दायरे में नहीं आता।
इसके बाद Supreme Court of India ने अगस्त 2020 में यह निर्देश देने से इनकार कर दिया था कि PM CARES फंड की राशि को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) में ट्रांसफर किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि दोनों फंड्स का उद्देश्य और स्वरूप अलग-अलग है।
लोकसभा में सवाल क्यों नहीं बनते
PMO के अनुसार, इन तीनों फंड्स की राशि भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से नहीं आती, बल्कि पूरी तरह जनता के स्वैच्छिक योगदान से बनती है। इसी वजह से इन्हें सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण में नहीं माना गया है।
लोकसभा के नियम 41(2)(viii) के तहत ऐसे सवाल स्वीकार नहीं किए जा सकते जो मुख्य रूप से भारत सरकार की जिम्मेदारी के अंतर्गत न आते हों। वहीं नियम 41(2)(xvii) कहता है कि ऐसे मामलों पर सवाल नहीं उठाए जा सकते जो उन संस्थाओं से जुड़े हों, जो सरकार के प्रति सीधे तौर पर जवाबदेह नहीं हैं।
राजनीतिक और सार्वजनिक बहस फिर तेज
PMO के इस रुख के बाद एक बार फिर PM CARES फंड की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। हालांकि सरकार का कहना है कि फंड का स्वरूप और उद्देश्य पहले से स्पष्ट है और इसी आधार पर संसद में सवालों को अस्वीकार्य माना गया है।
कुल मिलाकर, PMO का यह फैसला कानूनी नियमों और फंड्स की संरचना पर आधारित बताया जा रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और चर्चाएं और तेज हो सकती हैं।
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