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क्या दिमाग की उम्र बढ़ने से है मूंगफली का कनेक्शन? जानिए दिमाग को जवान रखने की यह आसान आदत
रोज़ाना थोड़ी-सी मूंगफली खाने से याददाश्त और सोचने की क्षमता पर पड़ सकता है असर, लेकिन क्या यह सच में दिमाग की उम्र को धीमा करती है?
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे दिमाग से जुड़ी चिंताएं भी बढ़ने लगती हैं। भूलने की आदत, ध्यान की कमी और सोचने की गति धीमी होना आज आम समस्या बनती जा रही है। ऐसे में अगर कोई सस्ती, आसानी से मिलने वाली चीज़ दिमाग की सेहत में मदद कर सके, तो दिलचस्पी होना स्वाभाविक है। हाल ही में आई एक हेल्थ रिपोर्ट में मूंगफली (Peanuts) को लेकर कुछ ऐसे ही संकेत मिले हैं।
दिमागी क्षमता और मूंगफली का रिश्ता
रिपोर्ट के मुताबिक, जो बुज़ुर्ग लोग रोज़ाना लगभग दो सर्विंग मूंगफली खाते हैं—यानी एक छोटी मुट्ठी सुबह या शाम—उनकी याददाश्त, ध्यान और सोचने की गति अपेक्षाकृत बेहतर पाई गई। कुछ कॉग्निटिव टेस्ट में ऐसे लोगों का प्रदर्शन बेहतर रहा, जिससे यह संकेत मिलता है कि मूंगफली दिमागी कार्यक्षमता को सपोर्ट कर सकती है।
पोषण से भरपूर है मूंगफली
मूंगफली को अक्सर सिर्फ़ स्नैक समझ लिया जाता है, लेकिन असल में यह पोषण का पावरहाउस है। इसमें
- हेल्दी फैट
- प्रोटीन
- विटामिन और मिनरल्स
- एंटीऑक्सीडेंट्स
पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर में सूजन (Inflammation) और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं—और यही दो चीज़ें दिमाग की उम्र बढ़ने की रफ्तार से जुड़ी मानी जाती हैं। सही पोषण मिलने से दिमाग की कोशिकाएं लंबे समय तक स्वस्थ रह सकती हैं।
अकेले मूंगफली से चमत्कार नहीं
यह समझना ज़रूरी है कि मूंगफली कोई जादुई इलाज नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर तब ज्यादा दिखता है जब इसे

संतुलित आहार- नियमित व्यायाम
- पूरी नींद
- तनाव से दूरी
के साथ अपनाया जाए। यानी अगर लाइफस्टाइल बिगड़ी हुई है, तो सिर्फ़ मूंगफली खाने से दिमाग हमेशा जवान नहीं रहेगा।
आदत बनाना है ज़रूरी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि फायदा तब दिखा जब मूंगफली रोज़ाना और नियमित रूप से खाई गई। कभी-कभार खाने से वही असर नहीं मिला। इससे यह साफ होता है कि दिमाग की सेहत भी रोज़मर्रा की आदतों पर निर्भर करती है, न कि कभी-कभार किए गए हेल्थ प्रयोगों पर।
सस्ती, आसान और हर घर में उपलब्ध
मूंगफली की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह महंगी नहीं है और लगभग हर जगह आसानी से मिल जाती है। सीमित मात्रा में रोज़ इसे डाइट में शामिल करना ज़्यादातर लोगों के लिए आसान है और अगर एलर्जी न हो, तो इसका जोखिम भी कम है।
रिसर्च क्या पूरी तरह साबित करती है?
हालांकि यह रिसर्च उम्मीद जगाती है, लेकिन वैज्ञानिक साफ कहते हैं कि ये नतीजे सिर्फ़ संबंध (Association) दिखाते हैं, कोई पक्का दावा नहीं। इसका मतलब यह नहीं कि मूंगफली खाने से डिमेंशिया रुक जाएगा या दिमाग की उम्र बढ़ेगी ही नहीं। जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल और कुल आहार अब भी सबसे अहम भूमिका निभाते हैं।
निष्कर्ष
अगर आप दिमाग की सेहत को लेकर सजग हैं, तो रोज़ाना थोड़ी-सी मूंगफली खाना एक छोटा लेकिन समझदारी भरा कदम हो सकता है। यह कोई चमत्कार नहीं, लेकिन सही आदतों के साथ मिलकर यह दिमाग को लंबे समय तक एक्टिव रखने में मदद कर सकती है।
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