Connect with us

Politics

बंगाल में फिर शुरू हो सकता है मनरेगा, सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद केंद्र ने पीएमओ को दी रिपोर्ट

तीन साल से बंद योजना पर केंद्र सरकार ने जताई “विशेष परिस्थितियों” में बहाली की संभावना, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी केंद्र की अपील

Published

on

MGNREGA in West Bengal: Centre may resume scheme after Supreme Court setback | Dainik Diary
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बंगाल में फिर से शुरू हो सकता है मनरेगा — केंद्र सरकार ने पीएमओ को सौंपी रिपोर्ट।

पश्चिम बंगाल में मनरेगा (MGNREGS) की बहाली को लेकर एक बड़ी ख़बर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बाद ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को सूचित किया है कि वह “विशेष परिस्थितियों” में राज्य में इस योजना को फिर से शुरू करने पर विचार कर सकता है।

यह कदम उस समय आया है जब तीन साल से अधिक समय से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार केंद्र से लगातार अपील कर रही थी कि मनरेगा जैसी योजना को राज्य में फिर से बहाल किया जाए। यह योजना लाखों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन मानी जाती रही है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और केंद्र की प्रतिक्रिया

27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की स्पेशल लीव पेटिशन (SLP) को खारिज कर दिया, जिसमें केंद्र ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 18 जून 2025 के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 1 अगस्त 2025 से पश्चिम बंगाल में मनरेगा लागू किया जाए, लेकिन केंद्र को “विशेष शर्तें और नियम” लगाने का अधिकार रहेगा ताकि किसी तरह की अनियमितता न हो।

हाईकोर्ट के अनुसार —

1761622117432 bengal mgnrega


“केंद्र सरकार की उपयुक्त प्राधिकारी को यह अधिकार है कि वह अन्य राज्यों की तुलना में बंगाल में विशेष नियम या प्रतिबंध लागू करे, ताकि योजना के क्रियान्वयन में कोई अवैधता न हो।”

केंद्र ने इस आदेश के खिलाफ 31 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि हाईकोर्ट का आदेश उचित है।

2022 से बंद है योजना

गौरतलब है कि 9 मार्च 2022 को केंद्र ने MGNREGA अधिनियम, 2005 की धारा 27 के तहत पश्चिम बंगाल को फंड जारी करना बंद कर दिया था। इसका कारण बताया गया था — “केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन न करना।”
तब से राज्य में इस योजना के अंतर्गत कोई काम नहीं हुआ है।

योजना बंद होने से पहले 51 लाख से 80 लाख परिवार हर साल मनरेगा के तहत काम पाते थे (2014-15 से 2021-22 के बीच)। यह न केवल ग्रामीण मजदूरों के लिए आमदनी का साधन था, बल्कि राज्य के ग्रामीण विकास की रीढ़ भी थी।

पीएमओ को भेजी गई रिपोर्ट

सूत्रों के अनुसार, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री कार्यालय को रिपोर्ट भेजकर बताया है कि मंत्रालय “विशेष परिस्थितियों में योजना बहाली पर विचार” कर सकता है। यह रिपोर्ट पीएमओ द्वारा मांगी गई थी, ताकि केंद्र आगे की रणनीति तय कर सके।

The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। लेकिन संकेत यही हैं कि केंद्र “सशर्त बहाली” के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

बंगाल सरकार की प्रतिक्रिया

राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को “जनता की जीत” बताया था। उन्होंने कहा था —

“मनरेगा को बंद करना गरीबों के अधिकारों पर हमला था। अब न्याय मिला है, और केंद्र को गरीबों के प्रति अपना दायित्व निभाना चाहिए।”

टीएमसी सांसदों ने भी केंद्र से अपील की है कि अब राजनीतिक मतभेदों को छोड़कर गरीबों के लिए योजना को जल्द से जल्द बहाल किया जाए।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

मनरेगा के बंद होने से बंगाल के कई जिलों में बेरोज़गारी बढ़ी और प्रवास में तेज़ी आई। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह योजना फिर से शुरू होती है, तो न केवल ग्रामीण आय में सुधार होगा बल्कि स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

अर्थशास्त्री जीन द्रेज़ जैसे विशेषज्ञ पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि मनरेगा जैसी योजनाओं को राजनीतिक विवाद से ऊपर रखा जाना चाहिए, क्योंकि यह ग्रामीण भारत के लिए जीवनरेखा है।

01 05 2024 mgnrega scheme 23709033 18553958


आगे की राह

केंद्र सरकार के लिए अब चुनौती यह होगी कि योजना को पारदर्शिता के साथ लागू किया जाए। भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों को ध्यान में रखते हुए, मंत्रालय “विशेष निगरानी तंत्र” लागू करने पर विचार कर सकता है।

अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो अगस्त 2025 से बंगाल के लाखों ग्रामीणों को फिर से रोज़गार की उम्मीद मिल सकती है — और यह कदम राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

अधिक अपडेट के लिए http://www.dainikdiary.com

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *