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बंगाल BJP को Amit Shah का साफ संदेश मतभेद भूलो और साथ चलो Dilip Ghosh की वापसी के भी संकेत
विधानसभा चुनाव से पहले कोलकाता में हुई अहम बैठकों में अमित शाह ने संगठन को एकजुट रहने का मंत्र दिया और पुराने-नए नेतृत्व के बीच दूरी पाटने पर ज़ोर दिया
पश्चिम बंगाल की सियासत में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियों को तेज़ कर दिया है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कोलकाता में पार्टी के शीर्ष नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ रणनीतिक बैठकें कीं। यह दौरा न सिर्फ चुनावी गणित को दुरुस्त करने की कोशिश माना जा रहा है, बल्कि संगठन के भीतर चल रहे मतभेदों को खत्म करने की पहल भी है।
कोलकाता में हुई बैठकों में राज्य BJP अध्यक्ष Shamik Bhattacharya, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Dilip Ghosh और केंद्रीय मंत्री Sukanta Majumdar मौजूद रहे। इसके अलावा पार्टी के कई केंद्रीय पदाधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में जीत के लिए सभी नेताओं को “आपसी मतभेद भुलाकर” एक टीम की तरह काम करना होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी अब पुराने और नए नेतृत्व के बीच की दूरी को खत्म करना चाहती है, ताकि जमीनी स्तर पर संगठन मज़बूत हो सके।

इस बैठक का एक अहम राजनीतिक संकेत दिलीप घोष की संभावित वापसी को लेकर भी माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से राज्य BJP की गतिविधियों से दूर दिख रहे दिलीप घोष ने बैठक के बाद मीडिया से कहा कि उन्हें अपने अनुभव साझा करने के लिए बुलाया गया था और आने वाले चुनावों में वह अधिक सक्रिय भूमिका निभाते नज़र आएंगे। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर सुलह और नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि दिलीप घोष और मौजूदा राज्य नेतृत्व के बीच संबंध उस वक्त तनावपूर्ण हो गए थे, जब उन्होंने मई में दीघा में जगन्नाथ मंदिर उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री Mamata Banerjee से मुलाकात की थी। इस मुलाकात को लेकर पार्टी के भीतर असहजता दिखी थी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अमित शाह का यह दौरा केवल रणनीति बनाने तक सीमित नहीं है। यह संदेश भी साफ है कि Bharatiya Janata Party बंगाल में किसी भी तरह की अंदरूनी कलह को चुनावी नुकसान में बदलने नहीं देना चाहती।
अब देखना होगा कि अमित शाह की यह “टीमवर्क” वाली अपील जमीन पर कितना असर दिखाती है और क्या दिलीप घोष की सक्रिय वापसी BJP को बंगाल की राजनीति में नई ऊर्जा दे पाती है।
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