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खामेनेई जिंदा हैं या नहीं? इज़राइल बोला ‘मारे गए’, ईरान बोला ‘जहां तक मुझे पता है — ज़िंदा हैं’
इज़राइली चैनल ने खामेनेई की मौत का दावा किया, ईरानी विदेश मंत्री का जवाब सुनकर पूरी दुनिया हैरान रह गई — रक्षा मंत्री और IRGC कमांडर के मारे जाने की खबर भी आई।
दुनिया में जब कोई बड़ा नेता अचानक गायब हो जाता है तो अफवाहें उड़ने लगती हैं। और जब उस नेता के देश पर बम गिर रहे हों — तो उन अफवाहों की रफ्तार और भी तेज़ हो जाती है।
शनिवार को कुछ ऐसा ही हुआ। इज़राइल के मशहूर चैनल 12 ने खबर दी कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के “बढ़ते संकेत” मिल रहे हैं। खबर आग की तरह फैली। दुनियाभर के मीडिया ने इसे उठाया।
लेकिन जब NBC News ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची से सीधे पूछा — तो उनका जवाब था: “जहां तक मुझे पता है — वो ज़िंदा हैं।”
बस यही एक जवाब काफी था पूरी दुनिया को और उलझाने के लिए।
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“जहां तक मुझे पता है” — यह जवाब क्यों है इतना अजीब?
किसी देश का विदेश मंत्री अपने सर्वोच्च नेता के बारे में इतने अनिश्चित शब्दों में जवाब दे — यह अपने आप में बड़ी बात है। आमतौर पर ऐसे सवालों पर “बिल्कुल ज़िंदा हैं, यह झूठी खबर है” जैसा ठोस जवाब आता है। लेकिन “जहां तक मुझे पता है” — इसमें एक अनिश्चितता है जो और सवाल खड़े करती है।
यह कुछ वैसा ही है जैसे कोई डॉक्टर मरीज़ के परिवार से कहे — “जहां तक मुझे पता है, वो ठीक हैं।” यह आश्वासन नहीं, यह खुद एक सवाल है।
क्या सच में खामेनेई को निशाना बनाया गया?
इज़राइली मीडिया के मुताबिक खामेनेई और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान दोनों इस हमले के निशाने पर थे। हमले की शुरुआत में ही खामेनेई के दफ्तर के आसपास के इलाकों पर स्ट्राइक हुई।

Reuters ने तीन सूत्रों के हवाले से खबर दी कि ईरान के रक्षा मंत्री अमीर नसीरज़ादेह और रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर मोहम्मद पाकपोर इन हमलों में मारे गए। अगर यह सच है तो यह ईरान की सैन्य और सुरक्षा व्यवस्था के लिए बहुत बड़ा झटका है।
नेतन्याहू और ट्रंप का ईरानी जनता को सीधा संदेश
इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस ऑपरेशन को “ऑपरेशन लायन्स रोअर” नाम दिया। उन्होंने कहा कि ईरान ने परमाणु बम और हज़ारों मिसाइलें बनाने में अरबों रुपये लगाए — सिर्फ इज़राइल को नक्शे से मिटाने के लिए।
नेतन्याहू ने ईरानी जनता को सीधे संबोधित किया — “यह आपका मौका है। एक नया और आज़ाद ईरान बनाइए। अपनी किस्मत अपने हाथों में लीजिए।”
ट्रंप ने भी यही सुर अलापा। उन्होंने कहा — “ईरान के महान और गर्वीले लोगों से मैं कहता हूं — आपकी आज़ादी का वक्त आ गया है। घर में रहिए। बाहर खतरनाक है। जब हम काम खत्म कर लें — अपनी सरकार खुद संभालिए।”
यह संदेश सुनकर लगता है जैसे यह युद्ध सिर्फ परमाणु ठिकानों को तबाह करने तक सीमित नहीं — इसका मकसद ईरान में शासन परिवर्तन भी हो सकता है।
ईरान का जवाब — “हम तैयार थे, हैं और रहेंगे”
ईरानी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि यह हमला तब हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चल रही थी। ईरान ने इसे “आपराधिक सैन्य आक्रमण” करार दिया।
ईरानी बयान में कहा गया — “हम बातचीत के लिए जितने तैयार थे, रक्षा के लिए उससे भी ज़्यादा तैयार हैं। हमारी सेना पूरी ताकत से जवाब देगी।”
इस बीच ईरान ने कतर, UAE, सऊदी अरब और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर भी हमले किए — यह बताता है कि यह जंग अब एक देश की सीमाओं में नहीं समाई।
खामेनेई ज़िंदा हैं या नहीं — यह सवाल अभी अनुत्तरित है। लेकिन एक बात तय है — मध्य-पूर्व अब पहले जैसा नहीं रहेगा।
