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Kane Williamson ने चेताया सिर्फ तीन देशों के भरोसे टेस्ट क्रिकेट नहीं बचेगा

विलियमसन और ब्रायन लारा ने जताई चिंता, टेस्ट क्रिकेट को बचाने के लिए सभी देशों की भागीदारी जरूरी

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Kane Williamson warns Test cricket cannot survive only with India England Australia
केन विलियमसन और ब्रायन लारा ने जताई चिंता – टेस्ट क्रिकेट सिर्फ तीन देशों से नहीं बचेगा

टेस्ट क्रिकेट को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के पहले विजेता केन विलियमसन का कहना है कि अगर टेस्ट क्रिकेट केवल भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया (Big Three) के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा, तो इसका भविष्य संकट में पड़ जाएगा।

विलियमसन की चिंता

विलियमसन ने कहा – “अगर सिर्फ तीन टीमें ही टेस्ट क्रिकेट खेलेंगी तो यह लंबे समय तक जीवित नहीं रह पाएगा। हम भले ही भारत-इंग्लैंड या एशेज सीरीज का मज़ा लेते हैं, लेकिन यह टेस्ट क्रिकेट की असली ग्रोथ को सपोर्ट नहीं करता।”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह ज़रूरी है कि सभी क्रिकेट खेलने वाले देश इस फॉर्मेट को जीवित रखने के लिए एकजुट हों और जरूरी संसाधन जुटाएं।

टू-टियर सिस्टम पर सवाल

ICC और बिग थ्री देशों के बीच टू-टियर टेस्ट सिस्टम की चर्चाओं पर विलियमसन ने कहा कि इससे छोटे देशों के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा – “टेस्ट क्रिकेट को बचाने के लिए हर देश को इसमें महत्व देना होगा और उन्हें ज्यादा मौके मिलेंगे तभी यह फॉर्मेट टिकेगा।”

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ब्रायन लारा की राय

वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज़ ब्रायन लारा ने भी इस बहस में अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट की असली चुनौती उन देशों में है जहां भीड़ और स्पॉन्सर्स की कमी है।
लारा ने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में भारत और वेस्टइंडीज के बीच अहमदाबाद में खेला गया टेस्ट मैच तीन दिन में ही खत्म हो गया और स्टेडियम लगभग खाली था।

उन्होंने कहा – “अगर वेस्टइंडीज जैसे देश अच्छा प्रदर्शन नहीं करते और टी20 लीग जैसी दूसरी चीजें ज्यादा लोकप्रिय होती हैं, तो स्वाभाविक है कि दर्शक टेस्ट क्रिकेट से दूरी बना लेंगे।”

भविष्य की राह

टेस्ट क्रिकेट को बचाने के लिए ज़रूरी है कि सिर्फ बिग थ्री ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश और वेस्टइंडीज जैसे देशों को भी बराबर मौके मिलें। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संसाधन, प्रसारण और दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ाने पर ध्यान दिया गया तो टेस्ट क्रिकेट को नया जीवन मिल सकता है।
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