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50 इज़रायली जेट, Mossad की खुफिया जानकारी और तेहरान के दिल में धमाका Ali Khamenei का वो बंकर जो उनके काम कभी न आया
नई दिल्ली / तेहरान। कुछ चीज़ें बनाई जाती हैं सबसे बुरे वक्त के लिए। एक बंकर — ज़मीन के नीचे, इतना मज़बूत कि बम भी असर न करें, इतना गुप्त कि दुश्मन की खुफिया एजेंसी भी न जान पाए। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनई के लिए भी ऐसा ही एक बंकर बनाया गया था — तेहरान के एकदम बीचोंबीच, उनके आवास परिसर के ठीक नीचे।
लेकिन यह बंकर उनके किसी काम नहीं आया। क्योंकि जिस दिन युद्ध शुरू हुआ — उसी दिन, पहले ही हमले में, खामेनई मारे गए।
और फिर शुक्रवार को — युद्ध के सातवें दिन — इज़रायल ने उस बंकर को भी इतिहास बना दिया।
50 जेट, 100 से ज़्यादा बम, एक मिशन
इज़रायली वायु सेना के करीब 50 लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार की सुबह तेहरान स्थित उस भूमिगत बंकर पर 100 से अधिक बम गिराए जो खामेनई के नेतृत्व परिसर के नीचे बना था। इज़रायली सेना ने कहा कि इस बंकर को ईरानी नेतृत्व “अभेद्य” मानता था।
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IDF के बयान में कहा गया — “यह भूमिगत परिसर तेहरान के केंद्र में कई सड़कों तक फैला था और इसमें ईरानी शासन के वरिष्ठ सदस्यों के लिए कई प्रवेश द्वार और बैठक कक्ष थे।”
कल्पना करें — किसी शहर के बीचोंबीच, ज़मीन के नीचे एक पूरा का पूरा किला। मेट्रो स्टेशन जैसी सुरंगें, कमांड रूम, बैठक कक्ष — सब कुछ। और यह सब आम नागरिकों के घरों और सड़कों के ठीक नीचे।
Mossad की वो जानकारी जो सालों से जमा हो रही थी
यह हमला एक दिन में नहीं हुआ। इसके पीछे थी महीनों की खुफिया मेहनत।
इज़रायली सेना ने बताया कि खुफिया निदेशालय की रिसर्च डिवीज़न, एलीट Unit 8200 और Unit 9900 ने सालों तक इस बंकर की हर बारीकी को मैप किया था — इसके हर कोने, हर कमरे और हर प्रवेश द्वार की जानकारी इकट्ठा की गई थी।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह हमला “महीनों की गहन खुफिया कार्रवाई का नतीजा था जिसमें ईरान के वरिष्ठ नेतृत्व की गतिविधियों के पैटर्न की मैपिंग की गई, नियमित बैठकों की पहचान की गई और यह पता लगाया गया कि किस वक्त प्रमुख अधिकारी हमले के लिए सबसे कम तैयार होंगे।”
यह उस शतरंज के खेल जैसा था जहाँ एक खिलाड़ी सालों से चालें सोच रहा था — और दूसरे को अंदाज़ा भी नहीं था।
वो बंकर जो खामेनई के काम नहीं आया
यह बंकर मूल रूप से खामेनई के लिए एक “सुरक्षित आपातकालीन सुविधा” के रूप में बनाया गया था ताकि वे युद्ध के दौरान वहाँ से सैन्य अभियानों का संचालन कर सकें। लेकिन वे कभी इसका उपयोग नहीं कर पाए — क्योंकि Operation “Roaring Lion” के शुरुआती हमलों में ही उन्हें मार दिया गया था।
खामेनई की मौत के बाद भी यह परिसर ईरानी शासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के लिए उपयोग में था — यही वजह बनी कि इज़रायल के लिए यह अभी भी एक हाई-वैल्यू टारगेट था।

“ऑपरेशन रोअरिंग लायन” — सातवाँ दिन भी भारी
इज़रायली सेना के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल Eyal Zamir ने कहा — “हमने ईरान की 80 प्रतिशत वायु रक्षा प्रणाली को नष्ट कर दिया है और ईरानी आकाश पर लगभग पूर्ण वायु वर्चस्व हासिल कर लिया है। हमने 60 प्रतिशत से अधिक बैलेस्टिक मिसाइल लॉन्चर को बेअसर और नष्ट कर दिया है।”
इज़रायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि इस ऑपरेशन का लक्ष्य “बहादुर ईरानी जनता को अपनी नियति खुद तय करने के लिए परिस्थितियाँ बनाना है।”
एक बंकर की कहानी — जो अधूरी रह गई
दुनिया के इतिहास में जब भी किसी नेता ने अपने लिए भूमिगत बंकर बनाए, उनकी एक ही उम्मीद थी — “जब सब कुछ खत्म होने लगे, तो यहाँ से कमान संभालेंगे।” हिटलर के Führerbunker से लेकर सद्दाम हुसैन के छुपने के ठिकानों तक — इतिहास गवाह है कि यह उम्मीद अक्सर टूटी है।
खामेनई का बंकर भी उसी कड़ी में जुड़ गया।
87 वर्षीय खामेनई Operation Epic Fury के दौरान मारे जाने वाले तेहरान के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से एक थे। वो बंकर तक पहुँच भी नहीं पाए — और जो बंकर उन्हें बचाने के लिए बना था, वह खुद 50 जेट विमानों के निशाने पर आ गया।
यह सिर्फ एक बंकर का अंत नहीं था। यह एक पूरे युग का अंत था।
