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ईरान ने तबाह किया अमेरिका का ₹2500 करोड़ का THAAD रडार खाड़ी में अमेरिकी रक्षा तंत्र को लगा सबसे बड़ा झटका
जॉर्डन के एयरबेस पर तैनात अमेरिका की सबसे उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली का “आँख” कहलाने वाला रडार ध्वस्त — अब खाड़ी देशों की सुरक्षा पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल
जब कोई देश अमेरिका के सबसे महँगे और उन्नत हथियार को निशाना बनाकर तबाह कर दे, तो दुनिया को रुककर सोचना पड़ता है। ईरान ने ठीक यही किया है। अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार ईरान ने 30 करोड़ डॉलर (करीब 2500 करोड़) की कीमत वाले एक अहम रडार सिस्टम को नष्ट कर दिया है, जो खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी मिसाइल रक्षा बैटरियों को दिशा देने का काम करता था।
यह रडार कोई साधारण उपकरण नहीं था। यह था AN/TPY-2 रडार — जिसे अमेरिका की सबसे शक्तिशाली मिसाइल रक्षा प्रणाली THAAD की “आँख” कहा जाता है। सैटेलाइट तस्वीरों में साफ दिखा कि जॉर्डन के मुवफ्फक सल्ती एयरबेस पर यह रडार और उसका सहायक उपकरण पूरी तरह नष्ट हो चुका है। इसकी पुष्टि बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने भी की।
THAAD आखिर है क्या?
आम भाषा में समझें तो THAAD वह सिस्टम है जो दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को आसमान में ही — वायुमंडल की सीमा पर — मार गिराता है। जैसे क्रिकेट में गेंद बल्ले तक पहुँचने से पहले ही उसे हवा में रोक लिया जाए। एक THAAD बैटरी में 90 सैनिक, 6 ट्रक-माउंटेड लॉन्चर, 48 इंटरसेप्टर मिसाइलें और एक TPY-2 रडार होता है। हर इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत करीब 1.3 करोड़ डॉलर है।
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पूरी THAAD बैटरी की कीमत करीब 1 अरब डॉलर होती है, जिसमें अकेले इस रडार की कीमत 30 करोड़ डॉलर थी। अब यह रडार राख का ढेर बन चुका है।
अमेरिका के लिए कितना बड़ा नुकसान?
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मिसाइल रक्षा विशेषज्ञ टॉम कराको ने कहा, “ये दुर्लभ रणनीतिक संसाधन हैं और इनका नुकसान एक बहुत बड़ा झटका है।” उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना के पास दुनियाभर में केवल आठ THAAD सिस्टम हैं — जिनमें दक्षिण कोरिया और गुआम में तैनात सिस्टम भी शामिल हैं — और पहले से ही यह संख्या 2012 में तय की गई 9 बैटरी की ज़रूरत से कम है।
सीधे शब्दों में — जो गई वह वापस नहीं आएगी, और उसकी जगह लेने के लिए कोई “spare” उपलब्ध नहीं है।
इस रडार के नष्ट होने के साथ ही कतर में एक अन्य अर्ली-वार्निंग रडार AN/FPS-132 को भी ईरानी हमले में नुकसान पहुँचा, और बहरीन में SATCOM टर्मिनल्स पर भी हमले की खबर है — जो यह संकेत देता है कि ईरान एक सोची-समझी रणनीति के तहत खाड़ी की पूरी रक्षा “आँखों” को अंधा करने में लगा है।

अब क्या होगा?
इस रडार के बाहर जाने से मिसाइल इंटरसेप्शन का पूरा बोझ Patriot सिस्टम पर आ गया है, जिसके लिए PAC-3 मिसाइलें पहले से ही बेहद कम बची हैं। इससे खाड़ी देशों — सऊदी अरब, UAE, कुवैत — की सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं।
रक्षा कंपनियाँ Lockheed Martin और RTX व्हाइट हाउस में पेंटागन के साथ बैठक कर चुकी हैं। ट्रंप ने घोषणा की कि इन कंपनियों ने “Exquisite Class” हथियारों का उत्पादन चौगुना करने पर सहमति जताई है। लेकिन उत्पादन बढ़ाना एक लंबी प्रक्रिया है — मैदान में खाली जगह अभी भी है।
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के रयान ब्रोबस्ट ने कहा कि “THAAD रडार पर ईरान का यह हमला अब तक के उसके सबसे सफल हमलों में से एक है।”
भारत के लिए सबक
यह घटना भारत के लिए भी एक सबक है। भारत के पास रूस का S-400 मिसाइल रक्षा सिस्टम है और वह अमेरिका के साथ THAAD जैसी प्रणाली पर भी बातचीत कर चुका है। यह युद्ध बता रहा है कि कोई भी सिस्टम अभेद्य नहीं होता — असली ताकत रणनीति और तैयारी में है।
ईरान ने दुनिया को दिखा दिया कि अमेरिका की “ढाल” को भी भेदा जा सकता है। यह युद्ध अब सिर्फ मिसाइलों का नहीं, बल्कि तकनीक, रणनीति और सहनशक्ति का भी है।
