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दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट लीग, लेकिन खिलाड़ियों के हक में तीसरे नंबर पर IPL की रैंकिंग ने चौंकाया
World Cricketers’ Association की रिपोर्ट में खुलासा — England की The Hundred और SA20 ने खिलाड़ी कल्याण में IPL को पीछे छोड़ा
IPL यानी Indian Premier League — दुनिया की सबसे महंगी, सबसे ग्लैमरस और सबसे ज़्यादा देखी जाने वाली T20 क्रिकेट लीग। करोड़ों के कॉन्ट्रैक्ट, चमचमाते स्टेडियम, और हर मैच पर अरबों आंखें। लेकिन हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने IPL की एक ऐसी तस्वीर पेश की है जो शायद BCCI को पसंद न आए।
WCA की रैंकिंग में IPL तीसरे नंबर पर
World Cricketers’ Association (WCA) ने दुनियाभर की T20 फ्रेंचाइज़ी लीग्स को खिलाड़ियों के अधिकार और कल्याण के आधार पर रैंक किया है — और नतीजे चौंकाने वाले हैं।
इस रैंकिंग में The Hundred (इंग्लैंड) पहले नंबर पर है जिसे 75.2 का स्कोर मिला। दूसरे नंबर पर है दक्षिण अफ्रीका की SA20 लीग जिसे 68 अंक मिले। और IPL? दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग को मिले सिर्फ 62.6 अंक — यानी तीसरा स्थान।
सोचिए — जैसे Forbes की अमीरों की लिस्ट में कोई कंपनी सबसे ऊपर हो, लेकिन अपने कर्मचारियों की संतुष्टि की रैंकिंग में वो मझधार में हो। पैसा और सम्मान — ये दोनों हमेशा साथ नहीं चलते।
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Mustafizur Rahman विवाद ने खोली पोल
यह रिपोर्ट ऐसे वक्त आई है जब IPL पहले से ही एक बड़े विवाद में घिरी हुई है। जनवरी 2025 में BCCI ने Kolkata Knight Riders को निर्देश दिया कि वो बांग्लादेशी पेसर Mustafizur Rahman को रिलीज़ करें। वजह थी — भारत और बांग्लादेश के बीच चल रहे राजनीतिक तनाव।
एक खिलाड़ी जिसने अपनी मेहनत से नीलामी में जगह बनाई, उसे राजनीति की भेंट चढ़ा दिया गया। इस फैसले की क्रिकेट जगत में काफी आलोचना हुई। WCA की यह रैंकिंग उसी पृष्ठभूमि में और भी प्रासंगिक हो जाती है।
The Hundred से क्या सीख सकता है IPL?
The Hundred — इंग्लैंड में शुरू हुई यह लीग अभी भी अपेक्षाकृत नई है, लेकिन खिलाड़ियों के अधिकारों के मामले में यह IPL से आगे निकल गई। खिलाड़ियों को बेहतर अनुबंध की शर्तें, स्पष्ट नियम, और राजनीतिक दबाव से दूरी — यही वो तत्व हैं जो The Hundred को ऊपर ले जाते हैं।

SA20 भी महज़ तीन सीज़न पुरानी लीग है, फिर भी खिलाड़ी कल्याण में IPL से बेहतर है। यह BCCI के लिए एक आईना है।
पैसा सब कुछ नहीं होता
IPL में खेलना हर क्रिकेटर का सपना होता है — यह सच है। लाखों-करोड़ों की बोली, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं और ग्लोबल एक्सपोज़र — यह सब IPL देता है। लेकिन WCA की रिपोर्ट यह सवाल उठाती है कि क्या यह पैसा खिलाड़ियों के असली हितों की रक्षा भी करता है?
जैसे किसी बड़े कॉर्पोरेट में सैलरी तो अच्छी हो, लेकिन कर्मचारी की आवाज़ सुनने वाला कोई न हो — तो क्या वो सच में एक अच्छी जगह है?
IPL के लिए यह वेक-अप कॉल है
BCCI और IPL फ्रेंचाइज़ीज़ के लिए यह रैंकिंग सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, एक चेतावनी है। जब दुनिया की छोटी लीग्स खिलाड़ियों के अधिकारों में आगे निकल जाती हैं, तो सबसे बड़ी लीग को भी अपना आत्ममंथन करना होगा।
IPL की चमक बरकरार रहे — इसके लिए ज़रूरी है कि जो खिलाड़ी इस चमक को बनाते हैं, उनकी आवाज़ भी सुनी जाए।
