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बंगाल चुनाव में दिलीप घोष की वापसी: खड़गपुर सदर से BJP का बड़ा दांव
RSS से राजनीति तक का सफर, विवादों के बीच फिर मैदान में उतरे दिलीप घोष
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ा फैसला लेते हुए Dilip Ghosh को खड़गपुर सदर सीट से उम्मीदवार घोषित किया है। यह वही सीट है, जहां से उन्होंने 2016 में अपनी पहली जीत दर्ज की थी।
राज्य में चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होने हैं, जबकि नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। ऐसे में सभी दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है और घोष की उम्मीदवारी को BJP के अहम दांव के रूप में देखा जा रहा है।
साधारण शुरुआत से राजनीति तक
1 अगस्त 1964 को पश्चिम बंगाल के कुलियाना गांव में जन्मे दिलीप घोष ने अपने करियर की शुरुआत 1984 में Rashtriya Swayamsevak Sangh के स्वयंसेवक के रूप में की थी।
उन्होंने झाड़ग्राम के एक पॉलिटेक्निक कॉलेज से इंजीनियरिंग डिप्लोमा करने का दावा किया था, जिस पर विवाद भी हुआ। हालांकि, 2017 में Calcutta High Court ने इस मामले को खारिज कर दिया था।
BJP में तेजी से उभार
घोष 2014 में BJP में शामिल हुए और जल्द ही पश्चिम बंगाल के महासचिव बने। 2015 में उन्हें राज्य अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई।
2016 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने खड़गपुर सदर सीट से चुनाव लड़कर कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्ञान सिंह सोहनपाल को हराया और BJP के तीन विधायकों में से एक बने।
इसके बाद 2019 में उन्होंने मेदिनीपुर लोकसभा सीट से जीत हासिल की और लगभग 89,000 वोटों के अंतर से Manas Bhunia को हराया।
चुनावी रणनीति और नई चुनौती
2020 में उन्हें फिर से बंगाल BJP का अध्यक्ष बनाया गया। हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन पूरे राज्य में पार्टी के लिए प्रचार किया।
अब 2026 में उनकी वापसी को BJP के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
विवादों से घिरा रहा राजनीतिक सफर
दिलीप घोष का राजनीतिक करियर जितना तेज रहा, उतना ही विवादों से भी भरा रहा है। उन्होंने कई बार ऐसे बयान दिए, जिन पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई।

उन्होंने छात्राओं और छात्रों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं, विरोधियों को धमकी भरे बयान दिए और यहां तक कि Mamata Banerjee पर भी व्यक्तिगत टिप्पणी की।
हाल ही में All India Trinamool Congress ने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि घोष ने आचार संहिता का उल्लंघन किया और धमकी भरे बयान दिए।
आगे क्या?
खड़गपुर सदर सीट पर दिलीप घोष की उम्मीदवारी से मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। एक ओर उनका अनुभव और संगठनात्मक पकड़ है, तो दूसरी ओर विवादों की छाया भी उनके साथ चल रही है।
अब यह देखना होगा कि मतदाता उनके अनुभव को तरजीह देते हैं या उनके बयानों को मुद्दा बनाते हैं।
