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2029 में लागू होगा महिला आरक्षण कानून? 16 अप्रैल से संसद में होगी बड़ी चर्चा

पीएम नरेंद्र मोदी बोले—चार दशकों की बहस अब निर्णायक मोड़ पर, 2011 जनगणना डेटा से लागू करने पर भी विचार

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Women’s Reservation Law Likely by 2029, Parliament Debate Begins April 16: PM Modi
नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में महिला आरक्षण कानून पर बोलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम अब अपने निर्णायक चरण में पहुंचता दिख रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोमवार को संकेत दिया कि महिला आरक्षण कानून को 2029 तक लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है।

दिल्ली के Vigyan Bhawan में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग कोई नई नहीं है, बल्कि यह करीब 40 सालों से चल रही बहस का परिणाम है।

उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में पारित Nari Shakti Vandan Adhiniyam को संसद के दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी। उस समय सरकार और विपक्ष के बीच यह सहमति बनी थी कि इस कानून को 2029 तक लागू किया जाएगा, ताकि इसे बिना स्पष्ट समयसीमा के अधूरा न छोड़ा जाए।

प्रधानमंत्री ने बताया कि इस दिशा में सरकार लगातार विचार-विमर्श, विशेषज्ञों से सलाह और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा कर रही है। इसी कड़ी में 16 अप्रैल से संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा शुरू होने जा रही है, जिसे इस कानून के क्रियान्वयन की दिशा में अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।

हालांकि, इस कानून के लागू होने में एक अहम शर्त जनगणना और परिसीमन (Delimitation) से जुड़ी थी। लेकिन जनगणना में हो रही देरी को देखते हुए अब केंद्र सरकार एक अहम बदलाव पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता तलाश रही है, ताकि प्रक्रिया में और देरी न हो।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है—ऐसा इतिहास जो सामाजिक न्याय को सिर्फ नारे तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि उसे व्यवस्था और निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनाएगा।

Women’s Reservation Law Likely by 2029, Parliament Debate Begins April 16: PM Modi


विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह कानून समय पर लागू होता है, तो राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इससे न केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया में विविधता आएगी, बल्कि समाज के हर वर्ग की आवाज भी अधिक प्रभावी तरीके से सामने आएगी।

आने वाले दिनों में संसद की बहस और सरकार के फैसले इस दिशा में देश की राजनीति को एक नया रूप दे सकते हैं।