Balod Chhattisgarh
बालोद में मां सियादेवी के दर्शन की ज़िद में दो युवक बहे, ग्रामीणों ने बचाई जान
भारी बारिश में तेज़ बहाव के बावजूद युवक रपटा पार करने लगे, थोड़ी सी लापरवाही जान पर पड़ सकती थी भारी
आस्था जरूरी है, लेकिन सावधानी उससे भी ज़रूरी
छत्तीसगढ़ के बालोद ज़िले में स्थित मां सियादेवी मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल है। हर साल यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन बीते रविवार को यहां एक भयानक लापरवाही ने दो युवकों की जान खतरे में डाल दी।
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भारी बारिश के चलते मंदिर तक पहुंचने वाला रपटा पुल पानी से भर चुका था और बहाव बेहद तेज़ था। इसके बावजूद, दो युवक अपनी बाइक लेकर रपटा पार करने लगे। देखते ही देखते वे तेज धार में बहने लगे।
गनीमत रही, ग्रामीण समय पर पहुंचे
जब यह घटना हो रही थी, तब आसपास मौजूद ग्रामीणों ने साहस और सतर्कता दिखाते हुए दोनों युवकों को समय रहते बाहर खींच लिया। नहीं तो यह लापरवाही दो ज़िंदगियों को लील सकती थी।
घटना के तुरंत बाद लोगों ने सवाल उठाए कि जब शासन-प्रशासन लगातार अलर्ट जारी कर रहा है, नदियों-नालों के उफान पर होने की जानकारी दे रहा है, तो आखिर लोग जान की परवाह क्यों नहीं करते?
प्रशासन से पहले, हमें भी समझदारी दिखानी होगी
बाढ़ के समय हर साल सैकड़ों लोग सिर्फ इसी तरह की लापरवाहियों के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। बाद में दोष दिया जाता है प्रशासन को, लेकिन सोचने वाली बात है कि क्या हमारी ज़िंदगी की ज़िम्मेदारी केवल सरकार की है?
मां सियादेवी मंदिर की महिमा और पहुंच
बालोद के जंगलों में बसे मां सियादेवी मंदिर को लेकर लोगों की अपार श्रद्धा है। नवरात्रि में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। लेकिन बरसात के मौसम में यहां जाने वाला मार्ग कई बार जानलेवा साबित होता है। इसके बावजूद, न तो श्रद्धालु रुकते हैं और न ही कोई स्थायी सुरक्षात्मक इंतज़ाम नज़र आते हैं।
क्या ये घटना चेतावनी नहीं?
इस घटना ने एक बार फिर सोचने को मजबूर कर दिया है कि भक्ति और साहस के नाम पर जान से खिलवाड़ करना कहां तक सही है? प्रशासन को चाहिए कि ऐसे स्थलों पर चेतावनी बोर्ड, बैरिकेड्स और चौकी की व्यवस्था की जाए। वहीं श्रद्धालुओं को भी खुद की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।
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