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सुपर ओवर में पूरन को भेजना पड़ा भारी? Rishabh Pant पर उठे सवाल, कोच जस्टिन लैंगर ने दी सफाई

नारायण के सामने पूरन का रिकॉर्ड कमजोर होने के बावजूद LSG का फैसला बना चर्चा का विषय

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Rishabh Pant Super Over Decision Controversy: पूरन को भेजने पर क्यों मचा बवाल?
सुपर ओवर के फैसले के बाद चर्चा में आए ऋषभ पंत और निकोलस पूरन

आईपीएल 2026 में हर मुकाबला अब रोमांच और विवाद दोनों लेकर आ रहा है। हाल ही में खेले गए लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के बीच मुकाबले में सुपर ओवर का फैसला चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया। इस मैच के बाद LSG कप्तान Rishabh Pant को सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना का सामना करना पड़ा।

दरअसल, जब मैच सुपर ओवर में पहुंचा, तो LSG की ओर से बल्लेबाजी के लिए Nicholas Pooran और Aiden Markram को भेजा गया। सभी को हैरानी तब हुई जब स्ट्राइक पर पूरन आए, क्योंकि उनके और Sunil Narine के बीच पुराना रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है।

क्रिकेट इतिहास में अब तक केवल एक ही बार सुपर ओवर मेडन गया है, और वह भी साल 2014 में कैरेबियन प्रीमियर लीग के दौरान, जब सुनील नारायण ने निकोलस पूरन को एक भी रन बनाने का मौका नहीं दिया था। ऐसे में फैंस का सवाल उठना लाजमी था कि क्या टीम मैनेजमेंट ने इस रिकॉर्ड को नजरअंदाज कर दिया?

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सुपर ओवर की पहली ही गेंद पर नारायण ने पूरन को बोल्ड कर दिया, जिससे LSG की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा। इसके बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने पंत और टीम मैनेजमेंट के फैसले पर सवाल उठाए। कई यूजर्स ने लिखा कि इतने अहम मौके पर रणनीति में चूक टीम को भारी पड़ गई।

हालांकि, मैच के बाद LSG के हेड कोच Justin Langer ने इस फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा, “क्रिकेट में हर खिलाड़ी को समर्थन देना जरूरी होता है। हम पूरन पर भरोसा करते हैं और चाहते थे कि वह इस चुनौती का सामना करें।”

Rishabh Pant Super Over Decision Controversy: पूरन को भेजने पर क्यों मचा बवाल?


लैंगर का यह बयान साफ दिखाता है कि टीम मैनेजमेंट खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को प्राथमिकता दे रहा है, भले ही आंकड़े कुछ और कहानी क्यों न कहें। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या बड़े मैचों में केवल भरोसा ही काफी होता है या फिर आंकड़ों को भी ध्यान में रखना चाहिए?

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि टी20 क्रिकेट में एक छोटा सा फैसला भी मैच का रुख बदल सकता है। LSG के लिए यह हार सिर्फ एक मैच की हार नहीं, बल्कि रणनीति पर फिर से विचार करने का संकेत भी है।

अब देखने वाली बात होगी कि आने वाले मैचों में लखनऊ की टीम अपनी रणनीति में क्या बदलाव करती है और क्या पंत आलोचनाओं से उबरकर टीम को जीत की राह पर वापस ला पाते हैं।