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Hardik Pandya का कप्तानी सफर खत्म होने की कगार पर? 103 रन की शर्मनाक हार के बाद MI के प्लेऑफ के सपने चकनाचूर
सात मैचों में पाँच हार, बल्ले से 97 रन और गेंद से बेअसर — Hardik खुद ज़िम्मेदार हैं या टीम उन्हें अकेला छोड़ रही है?
मुंबई। IPL 2026 में Mumbai Indians का हाल देखकर दिल दुखता है — वो टीम जिसने पाँच बार ट्रॉफी उठाई, आज पॉइंट्स टेबल की तली में बैठी है। गुरुवार रात Chennai Super Kings के खिलाफ 103 रनों की करारी हार ने तो जैसे आखिरी कील ठोक दी। 208 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए पूरी टीम महज़ 104 रन पर ढेर हो गई — यह MI के IPL इतिहास की सबसे बड़ी रनों से हार है।
और इस सबके बीच सबसे बड़ा सवाल खड़ा है — Hardik Pandya कब तक?
Gujarat में शेर, Mumbai में बिल्ली?
यह कहना गलत नहीं होगा कि Hardik Pandya एक बेहतरीन क्रिकेटर हैं। 2022 में जब उन्होंने Gujarat Titans को उनके debut season में ही IPL ट्रॉफी दिलाई, तो पूरा देश हैरान रह गया था। अगले साल 2023 में भी वो GT को फाइनल तक ले गए। लेकिन 2024 में जब वो Mumbai Indians की कप्तानी संभालने लौटे — और वो भी Rohit Sharma को हटाकर — तब से जैसे किस्मत ने पलटी मारी।
2024 में MI आखिरी स्थान पर रही। 2025 में प्लेऑफ तक पहुँचे, लेकिन जिस टीम ने पाँच खिताब जीते हों, उसके लिए प्लेऑफ कोई बड़ी उपलब्धि नहीं। और अब 2026 में — हालात 2024 से भी बदतर नज़र आ रहे हैं।
आँकड़े झूठ नहीं बोलते
सात मैचों में Hardik का बल्लेबाज़ी औसत महज़ 19.40 रहा है — कुल 97 रन। एक ऑलराउंडर के लिए जो करोड़ों की सैलरी लेता है, यह निराशाजनक है। गेंदबाज़ी में तीन विकेट ज़रूर हैं, लेकिन 12.67 की इकॉनमी रेट से — यानी वो रन रोकने में भी नाकाम रहे।
CSK के खिलाफ तो हद हो गई। जब टीम को एक बड़ी पारी की दरकार थी, Hardik सिर्फ 1 रन बनाकर पवेलियन लौट गए।
“Drawing board पर जाना होगा” — लेकिन कब तक?
Punjab Kings से हार के बाद Hardik का बयान याद है? उन्होंने कहा था — “To be very honest, I don’t have much to say right now. We really need to go back to the drawing board.” यह बयान एक कप्तान की नहीं, एक हारे हुए इंसान की भाषा थी।
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हर हार के बाद वही बात — drawing board, planning देखना होगा, individuals को देखना होगा। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या Hardik खुद उस drawing board का हिस्सा नहीं हैं?
क्या Bumrah और Suryakumar भी उनसे दूर हो रहे हैं?
सिर्फ Hardik ही नहीं डूब रहे — पूरी टीम का हाल बेहाल है। Jasprit Bumrah पिछले छह IPL मैचों से एक भी विकेट नहीं ले पाए — यह किसी के लिए भी हज़म करना मुश्किल है। Suryakumar Yadav भी अपनी असली फॉर्म से कोसों दूर हैं। सोशल मीडिया पर Hardik और Bumrah के बीच तनाव की खबरें चल रही हैं — body language पर सवाल उठ रहे हैं।

यानी माजरा सिर्फ एक खिलाड़ी का नहीं, बल्कि पूरी ड्रेसिंग रूम की केमिस्ट्री का है।
प्लेऑफ — अब सिर्फ एक चमत्कार से मुमकिन
सात मैचों में पाँच हार — MI की प्लेऑफ की उम्मीद अब एक चमत्कार पर टिकी है। इतिहास गवाह है कि इस तरह की स्थिति से टीमें बहुत कम बार उबरी हैं। फैंस सड़कों पर नहीं उतरे, लेकिन social media पर #HardikOut और #BringBackRohit ट्रेंड होने लगा है।
तो आखिर दोष किसका?
सच यह है कि दोष सिर्फ Hardik का नहीं — लेकिन एक कप्तान को सब कुछ अपने कंधे पर लेना होता है। Rohit Sharma ने वही किया था, इसीलिए वो पाँच बार चैंपियन बने। जब टीम जीतती है तो कप्तान को श्रेय मिलता है, जब हारती है तो सवाल भी उसी से पूछे जाते हैं।
Hardik के पास अभी भी कुछ मैच बचे हैं। लेकिन अगर वो बल्ले, गेंद और कप्तानी — तीनों मोर्चों पर खुद को साबित नहीं कर पाए, तो Mumbai Indians management को एक कठोर फैसला लेना पड़ सकता है।
क्योंकि यह MI है — यहाँ सिर्फ प्रयास नहीं, नतीजे चाहिए।
