Noida
Noida में मजदूरों का उग्र प्रदर्शन: फैक्ट्रियों पर हमला, सुरक्षा और वेतन को लेकर बड़ा सवाल
कम वेतन, खराब कामकाजी हालात और हरियाणा से तुलना ने बढ़ाया गुस्सा; प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए
उत्तर प्रदेश के Noida में सोमवार को औद्योगिक क्षेत्रों में उस वक्त तनाव फैल गया जब मजदूरों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। खासकर फेज-2 और सेक्टर 63 के इलाकों में कई फैक्ट्रियों को निशाना बनाया गया, जिससे उद्योग जगत में डर का माहौल बन गया है।
क्यों भड़का विरोध?
बताया जा रहा है कि यह प्रदर्शन मजदूरों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के कारण हुआ। मजदूर न्यूनतम वेतन बढ़ाकर ₹20,000 प्रति माह करने, ओवरटाइम का भुगतान और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग कर रहे हैं।
कई मजदूरों का कहना है कि वे वर्तमान में ₹10,000–₹13,000 के बीच वेतन पर काम कर रहे हैं, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। कुछ दैनिक मजदूरों ने यह भी बताया कि उन्हें ₹300–₹400 प्रतिदिन ही मिलते हैं।
हरियाणा से तुलना बनी वजह
प्रदर्शन को और हवा तब मिली जब पड़ोसी राज्य Haryana में मजदूरी दरों में करीब 35% की बढ़ोतरी की गई। वहां एक अकुशल मजदूर को ₹15,220 और अर्ध-कुशल मजदूर को ₹16,780 तक वेतन मिल रहा है।
ऐसे में नोएडा के मजदूरों ने सवाल उठाया कि समान काम के लिए उन्हें कम वेतन क्यों दिया जा रहा है।
हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं
प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर स्थिति बेकाबू हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- वाहनों में तोड़फोड़ की गई
- कुछ गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया
- पुलिस वैन को भी नुकसान पहुंचाया गया
- इमारतों पर पथराव हुआ
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने दंगा-रोधी बल तैनात किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।
फैक्ट्री मालिकों में डर का माहौल
कई फैक्ट्री मालिकों ने सोशल मीडिया के जरिए मदद की गुहार लगाई। एक उद्योगपति ने बताया कि “कर्मचारी डरे हुए हैं, फैक्ट्री के शीशे तोड़े जा रहे हैं।”
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इस घटना के बाद कुछ कंपनियों ने एहतियातन ‘वर्क फ्रॉम होम’ का विकल्प भी अपनाया।
महिलाओं और सुरक्षा पर भी सवाल
कुछ महिला प्रदर्शनकारियों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा की कमी और समय पर भोजन जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि काम का दबाव ज्यादा है लेकिन सुविधाएं बेहद कम हैं।
सरकार और प्रशासन का रुख
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कहा कि मजदूरों को उचित वेतन और सुरक्षित कार्य वातावरण मिलना चाहिए।

साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि “जो लोग कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
प्रशासन ने औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने और स्थिति सामान्य करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है।
आगे क्या?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर मजदूरों की मांगों पर समय रहते बातचीत नहीं हुई, तो इसका असर निवेश और उद्योगों पर पड़ सकता है।
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि आर्थिक विकास के साथ-साथ श्रमिकों के अधिकार और जीवन स्तर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।