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3 बड़ी वजहें क्यों Vaibhav Sooryavanshi ने छोड़ी 10वीं बोर्ड परीक्षा, क्रिकेट बना सबसे बड़ा कारण

वैभव सूर्यवंशी का बड़ा फैसला—पढ़ाई से पहले क्रिकेट को दी प्राथमिकता, जानिए आखिर क्यों लिया इतना साहसी कदम

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क्यों वैभव सूर्यवंशी ने छोड़ी 10वीं बोर्ड परीक्षा? जानिए बड़ी वजह
क्रिकेट करियर पर फोकस करते हुए वैभव सूर्यवंशी ने 10वीं बोर्ड परीक्षा को किया स्थगित

भारतीय क्रिकेट में इन दिनों एक नया नाम तेजी से उभर रहा है—वैभव सूर्यवंशी। महज कम उम्र में ही अपने प्रदर्शन से सबको चौंकाने वाले इस युवा खिलाड़ी ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने खेल और शिक्षा दोनों जगत में चर्चा छेड़ दी है। खबरों के मुताबिक वैभव सूर्यवंशी ने इस साल अपनी 10वीं बोर्ड परीक्षा नहीं देने का निर्णय लिया है।

सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों? क्या यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया है या इसके पीछे कोई ठोस वजह है?

क्रिकेट करियर को दी प्राथमिकता

सूत्रों के अनुसार, वैभव सूर्यवंशी इस समय कई अहम क्रिकेट टूर्नामेंट और कैंप में व्यस्त हैं। लगातार ट्रेनिंग, मैच और चयन प्रक्रिया के बीच बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर पाना उनके लिए बेहद कठिन हो रहा था। ऐसे में परिवार और कोचिंग स्टाफ से सलाह लेकर उन्होंने फिलहाल पढ़ाई को थोड़ा विराम देने का निर्णय लिया।

आज के दौर में जब क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर है, तो खिलाड़ियों के लिए हर मौका बेहद कीमती होता है। खासकर तब, जब आप राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हों।

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क्या दोबारा देंगे परीक्षा?

जानकारी के मुताबिक, वैभव सूर्यवंशी ने परीक्षा को पूरी तरह छोड़ा नहीं है, बल्कि उसे आगे के लिए टालने की योजना बनाई है। माना जा रहा है कि वह अगले सत्र में या ओपन स्कूलिंग के माध्यम से 10वीं की परीक्षा पूरी कर सकते हैं।

यह कदम इस बात को दर्शाता है कि उनका फोकस पूरी तरह अपने क्रिकेट करियर को मजबूत करने पर है, लेकिन शिक्षा को भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा।

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परिवार और कोच का समर्थन

किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए इतना बड़ा फैसला लेना आसान नहीं होता। लेकिन बताया जा रहा है कि वैभव सूर्यवंशी को उनके परिवार और कोच का पूरा समर्थन मिला है। उनका मानना है कि जब अवसर दरवाजे पर दस्तक दे रहा हो, तो उसे गंवाना नहीं चाहिए।

सोशल मीडिया पर चर्चा

जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोग इसे जोखिम भरा कदम बता रहे हैं, तो कई इसे जुनून और समर्पण का उदाहरण मान रहे हैं।

भारत में पहले भी कई खिलाड़ियों ने कम उम्र में खेल को प्राथमिकता दी है और बाद में अपनी पढ़ाई पूरी की है। ऐसे में वैभव सूर्यवंशी का यह फैसला भी उसी राह का हिस्सा माना जा सकता है।

क्या यह सही निर्णय है?

यह कहना मुश्किल है कि यह फैसला सही है या गलत। लेकिन इतना तय है कि वैभव सूर्यवंशी का आत्मविश्वास और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण काबिले तारीफ है। अगर उनका प्रदर्शन इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में यह फैसला उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

फिलहाल पूरा क्रिकेट जगत उनकी अगली पारी का इंतजार कर रहा है।