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मेलबर्न टेस्ट दो दिन में खत्म और कोई सवाल नहीं? पिच पर बहस सिर्फ भारत के लिए ही क्यों
Ashes टेस्ट 48 घंटे में समाप्त, लेकिन न आलोचना न हंगामा; Monty Panesar बोले – अगर यहां चुप हैं तो भारत में भी शिकायत मत करो
क्रिकेट की दुनिया में पिच को लेकर शोर मचाना कोई नई बात नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि यह शोर सिर्फ कुछ देशों तक ही सीमित क्यों रहता है? ताज़ा उदाहरण है Ashes का मेलबर्न टेस्ट, जो महज़ दो दिनों के भीतर खत्म हो गया। 48 घंटे में एक टेस्ट मैच समाप्त हो जाए, तो आमतौर पर बहस छिड़ जानी चाहिए थी—लेकिन यहां अजीब सी खामोशी छाई रही।
अब ज़रा घड़ी को दो महीने पीछे ले चलिए। कोलकाता के Eden Gardens में भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका टेस्ट, जहां मैच ढाई दिन में खत्म हुआ था। उस वक्त दुनिया भर के पूर्व खिलाड़ी, एक्सपर्ट्स और सोशल मीडिया यूज़र्स एक सुर में बोले थे—“यह टेस्ट पिच नहीं है”, “स्पिन के लिए बहुत ज्यादा मदद है”, “क्रिकेट की आत्मा को नुकसान हो रहा है”।
एशिया बनाम SENA – दो पैमाने क्यों?
भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका या बांग्लादेश में अगर टेस्ट मैच तीसरे दिन से पहले खत्म हो जाए, तो पिच कटघरे में खड़ी कर दी जाती है। लेकिन वही हालात जब Australia, England, या अन्य SENA देशों में बनते हैं, तो इसे “तेज़ गेंदबाज़ों का कमाल” कहकर नजरअंदाज़ कर दिया जाता है।

मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेले गए बॉक्सिंग डे टेस्ट में पहले दिन 20 विकेट गिरे। दूसरे दिन, जो मैच का आखिरी दिन भी साबित हुआ, ऑस्ट्रेलिया सिर्फ 132 रन पर ढेर हो गया। इंग्लैंड ने 175 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया और सीरीज़ में अपनी पहली जीत दर्ज की।
लेकिन सवाल यह है—अगर यही स्कोरलाइन भारत में होती, तो क्या बहस इतनी शांत रहती?
Monty Panesar ने उठाया दोहरे मापदंड का मुद्दा
पूर्व इंग्लिश स्पिनर Monty Panesar ने इस पाखंड पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर मेलबर्न जैसी पिच पर सब चुप हैं, तो भारत में पहले दिन टर्न मिलने पर भी शिकायत बंद होनी चाहिए।
Panesar के शब्दों में,
“अगर भारत में एक दिन में 15-16 विकेट गिरते हैं, तो कहा जाता है कि गेंद पहले दिन नहीं घूमनी चाहिए। लेकिन यहां गेंद सीम कर रही है, विकेट उड़ रहे हैं—फिर यह Ashes क्रिकेट के लिए अच्छा कैसे है?”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब ऑस्ट्रेलिया पहले ही Ashes जीत चुका था, तो 10mm घास वाली पिच की जरूरत ही क्या थी।
उनका मानना है कि 5mm घास वाली सामान्य टेस्ट पिच से मैच कम से कम चौथे या पांचवें दिन तक जा सकता था।
क्या टेस्ट क्रिकेट का भविष्य खतरे में है?
पिछले कुछ वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में कई टेस्ट तीन दिन से कम में खत्म हुए हैं। पर्थ, ब्रिस्बेन और अब मेलबर्न—हर जगह तेज़ नतीजे। देखने में रोमांचक लग सकता है, लेकिन इससे टेस्ट क्रिकेट की मूल भावना पर सवाल उठते हैं।
World Test Championship (WTC) के दौर में नतीजे ज़रूरी हैं, लेकिन क्या कीमत इतनी बड़ी होनी चाहिए कि टेस्ट क्रिकेट दो दिन का खेल बन जाए?

Panesar साफ कहते हैं—
“अगर टेस्ट क्रिकेट को बचाना है, तो मैचों को 3-4 दिन तक चलना ही चाहिए। दो दिन के टेस्ट Ashes ब्रांड और खेल—दोनों के लिए नुकसानदायक हैं।”
अब ICC को दखल देना चाहिए?
आज हर मेज़बान देश अपनी मर्ज़ी से पिच तैयार कर रहा है। नतीजा—कहीं स्पिन ट्रैक, कहीं ग्रीन कार्पेट। सवाल यह है कि जब यह एक विश्व टेस्ट चैंपियनशिप है, तो क्या International Cricket Council को पिचों पर भी नियंत्रण नहीं रखना चाहिए—ठीक वैसे ही जैसे वर्ल्ड कप में होता है?
अगर एशियाई पिचों पर सवाल उठते हैं, तो मेलबर्न जैसी पिचों पर भी वही कसौटी लागू होनी चाहिए। वरना यह मानना पड़ेगा कि पिच पर बहस सिर्फ भारत और एशिया के लिए आरक्षित है।
