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ईरान हमले पर अमेरिका की नई चाल? रूस का तीखा वार, कहा—“अब असली रंग सामने आया”
तेहरान पर अमेरिकी रुख बदलते ही रूस ने दिखाई नाराज़गी, कहा– वाशिंगटन की नीति अब पूरी दुनिया देख रही है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की हालिया टिप्पणी पर रूस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के मिसाइल हमले के दौरान वॉशिंगटन के रुख में बदलाव को लेकर मॉस्को ने कहा कि अमेरिका की “दोहरी नीति” अब खुलकर दुनिया के सामने आ चुकी है।
रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने मीडिया से कहा कि अमेरिका क्षेत्र को स्थिर करने की बजाय और अधिक भड़काने वाला रवैया अपना रहा है। उन्होंने दावा किया कि वाशिंगटन का यह नया बयान केवल उसके रणनीतिक हितों को दर्शाता है, न कि वैश्विक शांति की चिंता को।
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रूस ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका किसी भी संघर्ष को अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करता है। मॉस्को के मुताबिक, जब ईरान ने सीमाई सुरक्षा का हवाला देते हुए जवाबी कार्रवाई की, तब वाशिंगटन ने उसे “अनुचित आक्रामकता” करार दिया, जबकि वर्षों से इसी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति विवाद का कारण रही है।
नई मिसालों के साथ रूस का पलटवार
इस बार रूस ने अमेरिका की तुलना 2014 के सीरिया संकट और 2021 के अफगानिस्तान से की। रूसी अधिकारियों ने कहा कि इतिहास गवाह है—जहां-जहां अमेरिका ने हस्तक्षेप किया, वहां हालात और बिगड़े।
रूस का आरोप है कि ईरान के मामले में भी अमेरिका की वही “पुरानी नीति” दोहराई जा रही है—दबाव बनाओ, हस्तक्षेप करो और फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने खुद को शांति का झंडाबरदार दिखाने की कोशिश करो।

अमेरिका की सफाई—इसे रूस ने नकारा
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ईरान का हमला “अनुपातहीन” था और इससे क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। हालांकि रूस का कहना है कि अमेरिका वही कह रहा है जो उसके भू-राजनीतिक हितों के अनुरूप है।
मॉस्को ने यह भी चेतावनी दी कि यदि वाशिंगटन इसी तरह “एकपक्षीय बयानबाज़ी” जारी रखता है, तो हालात और तनावपूर्ण हो सकते हैं।
कया बढ़ेगा अमेरिका-रूस टकराव?
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व में कोई भी नया संघर्ष अमेरिका और रूस को आमने-सामने ला सकता है। पहले ही यूक्रेन युद्ध और नाटो विस्तार को लेकर दोनों देशों में तल्खी है। अब ईरान का मुद्दा दोनों के बीच नए टकराव की ज़मीन तैयार कर सकता है।
हालात जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में अमेरिका, रूस और ईरान के समीकरण वैश्विक राजनीति की नई परिभाषा तय करेंगे।
