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अब नेहरू पर बहस तय कर लें’: प्रियंका गांधी का संसद में पलटवार, बोलीं—‘BJP चुनाव के लिए, हम देश के लिए’
वंदे मातरम बहस पर प्रियंका गांधी का तीखा हमला—PM मोदी के आरोपों का दिया जवाब, कहा ‘दो वजहों से लाई गई यह बहस—बंगाल चुनाव और स्वतंत्रता सेनानियों को अपमानित करने का मौका’
संसद में वंदे मातरम को लेकर चल रही बहस सोमवार को उस समय और तेज़ हो गई जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आरोपों का सीधे-सीधे जवाब देते हुए कहा—
“अगर आपको नेहरू जी पर बात ही करनी है, तो आइए एक बार तय समय पर पूरी बहस कर लेते हैं… और इस मुद्दे को हमेशा के लिए खत्म कर देते हैं।”
“वंदे मातरम हमारे लिए पवित्र है… इसे विवाद का हिस्सा बनाना पाप है”
प्रियंका गांधी ने कहा कि वंदे मातरम पर बहस की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि यह गीत हमेशा से देश की आत्मा का प्रतीक रहा है।
उन्होंने दो टूक कहा—
“कांग्रेस इसे हमेशा पवित्र मानती आई है और हमेशा मानती रहेगी।”
उन्होंने PM मोदी के बयान का संदर्भ देते हुए कहा कि इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि:
- रवींद्रनाथ टैगोर ने ही राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत की संरचना में अहम भूमिका निभाई।
- संविधान सभा ने भी केवल उन्हीं हिस्सों को अपनाया जो सभी भारतीयों के लिए समावेशी थे।
प्रियंका गांधी के अनुसार, इस इतिहास पर सवाल उठाना “स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं दोनों का अपमान” है।
“सरकार दो कारणों से यह बहस लाई—बंगाल चुनाव और स्वतंत्रता सेनानियों को गाली देने का अवसर”
प्रियंका ने BJP पर राजनीतिक मंशा का आरोप लगाया।
उनके अनुसार बहस लाने का उद्देश्य—
- पश्चिम बंगाल चुनाव में ध्रुवीकरण
- स्वतंत्रता सेनानियों और पूर्व नेताओं को निशाना बनाने का मंच
उन्होंने कहा कि सरकार देश के असली मुद्दों—बेरोज़गारी और महंगाई—से ध्यान भटकाना चाहती है।
“आप चुनाव के लिए, हम देश के लिए… चाहे जितने चुनाव हारें, लड़ाई जारी रहेगी”
जब कुछ सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने कांग्रेस की हालिया हारों पर तंज कसा तो प्रियंका का जवाब बेहद मजबूत था—
“आप चुनाव के लिए हैं, हम देश के लिए हैं। चाहे हम कितने भी चुनाव हारें, हम आपकी विचारधारा से लड़ते रहेंगे।”
उनका यह बयान विपक्षी बेंचों पर तालियों के साथ दर्ज हुआ।

नेहरू और सुभाष बोस के पत्रों का हवाला देकर बताया सही ‘क्रोनोलॉजी’
प्रियंका गांधी ने ऐतिहासिक दस्तावेज़ों का ज़िक्र करते हुए कहा कि:
- कुछ मुस्लिम समुदायों और कुछ “साम्प्रदायिक समूहों” द्वारा गीत के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई गई थी।
- इसलिए केवल पहले दो पद अपनाने का निर्णय लिया गया, जो राष्ट्र के लिए सार्वभौमिक संदेश देते हैं।
उन्होंने कहा—
“यह सही क्रोनोलॉजी है, जिसे लगातार तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है।”
“PM मोदी तथ्य प्रस्तुत करने में कलाकार हैं… लेकिन मैं जनता की प्रतिनिधि हूं”
प्रियंका गांधी ने PM मोदी पर तंज कसते हुए कहा—
“मोदी जी अच्छे भाषण देते हैं, लेकिन तथ्यों में कमजोर हैं। तथ्यों को पेश करना उनका कला है, पर मैं जनता की प्रतिनिधि हूं—कला नहीं दिखाती।”
उन्होंने पूछा कि PM ने यह क्यों नहीं बताया कि टैगोर ने वंदे मातरम किस सेशन में गाया था—
“क्या यह बताने में शर्म आती है कि वह कांग्रेस का सेशन था?”
उन्होंने जोर देकर कहा—
“कांग्रेस के हर सेशन में वंदे मातरम गाया जाता है। इसे विवादित बनाना पाप है, और कांग्रेस इस पाप का हिस्सा नहीं बनेगी।”
PM मोदी का दावा—“वंदे मातरम को नेहरू ने काटा”
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में आरोप लगाया था कि कांग्रेस और नेहरू ने ‘धार्मिक संदर्भ’ के कारण गीत को पूर्ण रूप में अपनाने से इनकार किया।
उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल विभाजन के वक्त वंदे मातरम एकजुटता का प्रतीक था।
