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Pax Silica से भारत बाहर क्यों? कांग्रेस ने मोदी सरकार पर साधा निशाना, बताया ‘मिस्ड ऑपर्च्युनिटी’
US-नेतृत्व वाले रणनीतिक टेक्नोलॉजी गठबंधन में भारत की गैर-मौजूदगी पर कांग्रेस का सवाल, ट्रंप-मोदी रिश्तों पर उठाई उंगली
अमेरिका के नेतृत्व में शुरू की गई नई रणनीतिक पहल Pax Silica से भारत को बाहर रखे जाने को लेकर अब सियासी घमासान तेज हो गया है। Indian National Congress ने इस मुद्दे पर केंद्र की Narendra Modi सरकार को घेरते हुए इसे भारत के लिए एक “बड़ा चूका हुआ मौका” करार दिया है।
कांग्रेस का कहना है कि जिस पहल का मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती तकनीकों से जुड़ी वैश्विक निर्भरता को कम करना है, उसमें भारत जैसे टेक्नोलॉजी-हब देश का बाहर होना सवाल खड़े करता है।
क्या है Pax Silica पहल?
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, Pax Silica का उद्देश्य उन देशों को एक मंच पर लाना है, जो Artificial Intelligence और उससे जुड़ी रणनीतिक सामग्रियों में “जबरन निर्भरता” को खत्म करना चाहते हैं। इसके तहत तकनीकी क्षमताओं की सुरक्षा, सप्लाई-चेन को मजबूत करना और सहयोगी देशों को बड़े पैमाने पर नई तकनीक विकसित व लागू करने में मदद करना शामिल है।
QUAD में सब शामिल, भारत बाहर क्यों?
इस पहल में Japan और Australia जैसे भारत के करीबी रणनीतिक साझेदार शामिल हैं, जो QUAD का भी हिस्सा हैं। ऐसे में भारत की गैर-मौजूदगी को कांग्रेस ने “हैरान करने वाला” बताया है।
कांग्रेस नेताओं ने सवाल किया कि जब QUAD के बाकी देश इस पहल में शामिल हैं, तो भारत को बाहर क्यों रखा गया? क्या यह भारत की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति में आई कमजोरी का संकेत है?

ट्रंप-मोदी रिश्तों पर तंज
कांग्रेस ने इस मुद्दे को Donald Trump और पीएम मोदी के रिश्तों से भी जोड़ा। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर ट्रंप के साथ अपनी बातचीत को “पुराने दोस्त” की तरह साझा किया था—जिनके साथ कभी अहमदाबाद, ह्यूस्टन और वॉशिंगटन डीसी में सार्वजनिक रूप से गले मिलने की तस्वीरें सुर्खियां बनी थीं।
कांग्रेस के अनुसार, Pax Silica से बाहर रखा जाना यह दिखाता है कि अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते उतने मजबूत नहीं रहे, जितना सरकार दावा करती रही है।
सरकार की चुप्पी, बढ़ते सवाल
अब तक केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की बहुपक्षीय पहल से बाहर रहना भारत की रणनीतिक स्थिति पर बहस को और तेज कर सकता है।
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