Breaking News
Noida में मजदूरों का गुस्सा सड़कों पर 8 घंटे काम और 20000 वेतन की मांग से भड़का आंदोलन
हरियाणा में वेतन बढ़ने के बाद नोएडा के श्रमिकों ने उठाई आवाज, प्रदर्शन के दौरान हिंसा भी
सोमवार सुबह Noida में उस वक्त माहौल अचानक गरमा गया जब सैकड़ों फैक्ट्री मजदूर सड़कों पर उतर आए। बेहतर वेतन और काम के घंटे कम करने की मांग को लेकर शुरू हुआ यह प्रदर्शन जल्द ही उग्र हो गया और कई जगहों पर हिंसा की खबरें सामने आईं।
क्या है पूरा मामला
नोएडा के औद्योगिक इलाकों, खासकर फेज-2 में काम करने वाले मजदूर लंबे समय से कम वेतन और ज्यादा काम के घंटे से परेशान हैं। उनका कहना है कि उन्हें महीने में 12-12 घंटे काम कराया जाता है, लेकिन सैलरी 13 से 15 हजार रुपये के बीच ही रहती है।
मजदूरों की साफ मांग है—
- 8 घंटे की शिफ्ट
- कम से कम 20,000 रुपये मासिक वेतन
- ओवरटाइम का अलग भुगतान
एक महिला मजदूर ने बताया कि महंगाई इतनी बढ़ चुकी है कि घर चलाना मुश्किल हो गया है। गैस सिलेंडर, किराया और बच्चों की पढ़ाई—सब महंगा हो गया है, लेकिन उनकी कमाई वहीं की वहीं है।
हरियाणा बना बड़ा कारण
इस आंदोलन के पीछे एक बड़ा कारण पड़ोसी राज्य Haryana का फैसला भी है। वहां की सरकार ने हाल ही में मजदूरों के न्यूनतम वेतन में करीब 35% तक की बढ़ोतरी की है।
नई दरों के अनुसार:
- अकुशल मजदूर: 15,220/माह
- अर्ध-कुशल मजदूर: 16,780/माह
अब नोएडा के मजदूर सवाल उठा रहे हैं कि जब पास के राज्य में ज्यादा वेतन मिल रहा है, तो उन्हें कम पैसे में क्यों काम करना पड़े।

प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप
शुरुआत में शांतिपूर्ण प्रदर्शन धीरे-धीरे उग्र हो गया। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों में आग लगा दी, पुलिस वैन को नुकसान पहुंचाया और इमारतों पर पथराव भी किया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने कहा कि हालात पर नजर रखी जा रही है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
सरकार का रुख क्या है
इस पूरे मामले पर Yogi Adityanath ने भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि हर मजदूर को सम्मानजनक वेतन और सुरक्षित कार्य वातावरण मिलना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मजदूरों और कंपनियों के बीच बातचीत कर समाधान निकालें। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मजदूरों की असली परेशानी
मजदूरों का कहना है कि वे सिर्फ अपने हक की मांग कर रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम रोज 300-400 रुपये में काम कर रहे हैं, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। कम से कम 800 रुपये रोज मिलना चाहिए।”
महिलाओं ने खासतौर पर सुरक्षा और समय पर भोजन जैसी सुविधाओं की कमी को लेकर भी नाराजगी जताई।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन और कंपनियां मजदूरों की मांगों को किस तरह हल करती हैं। अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
और पढ़ें- DAINIK DIARY
