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कर्नाटक में सीएम की कुर्सी पर संग्राम: सिद्धारमैया vs शिवकुमार, ‘गुप्त समझौते’ ने बढ़ाई गर्मी
डीके शिवकुमार के ‘सीक्रेट डील’ कबूलने के बाद कांग्रेस में सत्ता साझेदारी विवाद तेज, फैसले की गेंद अब हाई कमान के पाले में
कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता को लेकर बढ़ती खींचतान अब खुले मंच पर दिखाई देने लगी है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर विवाद लंबे समय से चर्चा में है, लेकिन इस सप्ताह स्थिति और नाटकीय हो गई जब शिवकुमार ने पहली बार एक “गुप्त समझौते” के अस्तित्व को स्वीकार कर लिया। वहीं सिद्धारमैया ने सार्वजनिक रूप से हाई कमान से अपील की कि इस भ्रम को खत्म करते हुए जल्द फैसला लिया जाए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट किया है कि अब अंतिम निर्णय केवल सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ चर्चा के बाद ही होगा। इससे संकेत मिलता है कि मामला अब पूरी तरह दिल्ली की शीर्ष नेतृत्व के हाथ में है।

‘गुप्त डील’ का दावा
कनाकपुरा यात्रा के दौरान शिवकुमार ने कहा कि “हम पांच-छह लोगों के बीच एक समझौता हुआ था,” लेकिन वह इसे सार्वजनिक करने से बचते रहे। उनके अनुसार, वह पार्टी को शर्मिंदा नहीं करना चाहते। माना जा रहा है कि मई 2023 में खड़गे के आवास पर यह सत्ता साझा करने का समझौता हुआ था, जिसके तहत:
- पहले 2.5 साल सिद्धारमैया मुख्यमंत्री
- बाकी कार्यकाल शिवकुमार
कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि सिद्धारमैया ने कहा था, “2.5 साल पूरे होने से एक सप्ताह पहले मैं इस्तीफा दे दूंगा।”
सिद्धारमैया का रुख बदलता हुआ
पहले सिद्धारमैया कहते रहे कि सरकार पूरे पांच साल चलेगी और वह पूरे कार्यकाल तक सीएम रहेंगे। लेकिन 22 नवंबर को खड़गे से मुलाकात के बाद उनका बयान बदल गया और उन्होंने कहना शुरू किया:
“अंतिम फैसला हाई कमान करेगी।”
शिवकुमार खेमे की मांग
शिवकुमार के समर्थक कहते हैं कि:
- वह विद्रोह नहीं करेंगे
- पार्टी के प्रति वफादार हैं
- लेकिन समझौते का सम्मान होना चाहिए
उनका तर्क है कि अगर कांग्रेस अपने ही वादे पर कायम नहीं रहती, तो संगठनात्मक नेतृत्व कमजोर पड़ जाएगा और विश्वास टूटेगा।
सिद्धारमैया खेमे का जवाब
सिद्धारमैया के करीबी किसी भी समझौते के अस्तित्व से इनकार करते हैं। उनका कहना है कि:
- उन्हें CLP नेता के रूप में बहुमत से चुना गया
- बदलाव पर चर्चा तभी हो जब विधायक दल की बैठक में प्रस्ताव आए
दिल्ली में लॉबिंग तेज
शिवकुमार समर्थक कई विधायक दिल्ली पहुंच चुके हैं। इस पर सिद्धारमैया ने टिप्पणी की:
“उन्हें जाने दो… देखते हैं वे क्या राय देते हैं।”
यह भी कहा जा रहा है कि शिवकुमार चाहते हैं कि कैबिनेट विस्तार से पहले नेतृत्व का फैसला हो जाए।

विपक्ष का हमला
कर्नाटक BJP अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा कि राज्य “कार्यवाहक या विदाई की तैयारी कर रहे मुख्यमंत्री” नहीं चाहता और कांग्रेस से जल्द समाधान निकालने की मांग की।
मामला अब हाई कमान के हाथों में
दोनों खेमों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि फैसला शीर्ष नेतृत्व को करना है। ऐसे में सभी की निगाहें अब खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की ओर हैं, जो तय करेंगे कि:
- सिद्धारमैया ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे
या - शिवकुमार को सत्ता सौंप दी जाएगी
कर्नाटक विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले इस विवाद का समाधान कांग्रेस के लिए मजबूरी बन चुका है, क्योंकि किसी भी अस्थिरता का सीधा असर सरकार और पार्टी की साख पर पड़ेगा।
