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Iran-US Ceasefire संकट: शांति समझौता कागज़ों तक सीमित, तनाव फिर बढ़ा, वैश्विक चिंता गहरी
तेहरान से लेकर इस्लामाबाद तक हालात तनावपूर्ण, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विवाद ने बढ़ाई ऊर्जा संकट की आशंका
मध्य-पूर्व में घोषित Iran–US सीज़फायर एक बार फिर गंभीर संकट में फंसता दिख रहा है। शुरुआत में इसे शांति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा था, लेकिन अब हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
ताज़ा घटनाक्रम के अनुसार, Iran और United States के बीच हुए अस्थायी सीज़फायर के कुछ ही दिनों बाद समझौता कमजोर पड़ने लगा है। तनाव का असर सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है।
होर्मुज स्ट्रेट बना बड़ा विवाद
सबसे बड़ा टकराव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर सामने आया है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का बेहद अहम रास्ता माना जाता है। Iran द्वारा रोज़ाना जहाजों की आवाजाही सीमित करने के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल पैदा कर दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कई टैंकरों को रास्ता बदलना पड़ा, जिससे शिपिंग इंश्योरेंस की लागत तेजी से बढ़ गई है। इसे सीज़फायर की भावना के खिलाफ एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
ट्रंप का तीखा बयान
अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने इस स्थिति पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ईरान के फैसले को “अनुचित” बताते हुए कहा कि यह समझौते की मूल भावना के खिलाफ है।
कुछ दिन पहले ही Donald Trump ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी थी कि हालात और बिगड़ सकते हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि अमेरिका इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर बनाए हुए है।

पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल
इस पूरे विवाद में Pakistan की मध्यस्थ भूमिका भी चर्चा में आ गई है। इस्लामाबाद में चल रही डिप्लोमैटिक बैठकों के बीच कुछ बयानों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिसके बाद उसकी न्यूट्रल भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और कई प्रमुख रास्तों को बंद रखा गया है ताकि विदेशी प्रतिनिधिमंडल की आवाजाही सुचारू रह सके।
लेबनान में बढ़ता संकट
सीज़फायर के बावजूद लेबनान में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। वहां नागरिक हताहतों की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय चिंता को और बढ़ा दिया है। कई देशों ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है।
आम लोगों की चिंता बढ़ी
तेहरान के नागरिकों का कहना है कि शहर में डर और अनिश्चितता का माहौल है। कुछ लोग लंबे संघर्ष के बाद राहत महसूस कर रहे थे, लेकिन मौजूदा हालात ने फिर से डर बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीज़फायर अभी भी बेहद नाजुक स्थिति में है और अगर जल्द ही कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, तो पूरा क्षेत्र एक बड़े संकट की ओर बढ़ सकता है।
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