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Hormuz Strait पर US नाकेबंदी की पहली परीक्षा! चीन से जुड़ा टैंकर समेत 3 जहाज निकले पार
प्रतिबंधों के बावजूद गुजरते रहे टैंकर, वैश्विक तेल आपूर्ति और बाजार पर बढ़ा तनाव
दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz पर अमेरिका की नाकेबंदी (blockade) का पहला दिन ही बड़ी परीक्षा बन गया। मंगलवार को तीन ईरान-लिंक्ड टैंकर इस रास्ते से गुजर गए, जिससे इस ऑपरेशन की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन से जुड़ा टैंकर Rich Starry इस नाकेबंदी के बाद इस रास्ते से गुजरने वाला पहला जहाज बना। यह जहाज करीब 2.5 लाख बैरल मेथनॉल लेकर खाड़ी क्षेत्र से बाहर निकला।
इसके अलावा, एक और अमेरिकी प्रतिबंधित टैंकर Murlikishan भी इस जलमार्ग में प्रवेश करता देखा गया, जबकि तीसरा जहाज Elpis भी इस रास्ते से गुजरने में सफल रहा।
क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
यह घटनाएं दिखाती हैं कि अमेरिका द्वारा घोषित सख्त नाकेबंदी और जमीनी स्तर पर लागू किए गए नियमों में फर्क है। United States Central Command (CENTCOM) ने साफ किया है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को रोका नहीं जाएगा।
यानी, अगर कोई जहाज सीधे ईरान के पोर्ट से नहीं जुड़ा है, तो वह तकनीकी रूप से इस मार्ग से गुजर सकता है—even अगर उस पर प्रतिबंध ही क्यों न हो।
तेल बाजार पर असर
इस नाकेबंदी के चलते वैश्विक समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में करीब 187 टैंकर फंसे हुए हैं, जिनमें लगभग 172 मिलियन बैरल तेल और अन्य उत्पाद भरे हुए हैं।
इसके अलावा, सैकड़ों जहाज स्ट्रेट के बाहर इंतजार कर रहे हैं, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है।
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कुछ जहाजों ने बदला रास्ता
नाकेबंदी के डर से कुछ जहाजों ने अपना रास्ता बदलना भी शुरू कर दिया है। उदाहरण के तौर पर, एक टैंकर ‘Ostria’ ने बीच रास्ते से ही यू-टर्न ले लिया और अपना गंतव्य बदल दिया।
भारत समेत दुनिया पर असर
Hormuz Strait से होकर दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
भारत जैसे देश, जो तेल आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति और भी चिंता का विषय है।

निष्कर्ष
अमेरिका की नाकेबंदी के पहले ही दिन यह साफ हो गया है कि इसे पूरी तरह लागू करना आसान नहीं होगा। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह कार्रवाई वैश्विक तेल आपूर्ति को और ज्यादा प्रभावित करती है या कोई नया समाधान निकलता है।
