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तेहरान की हर कैमरा फ़ीड हैक थी! खामेनेई की हत्या कैसे बनी सालों पुरानी जासूसी का ‘फाइनल मूव’

रिपोर्टों के मुताबिक, US–Israel की संयुक्त ऑपरेशन में तेहरान की ट्रैफिक कैमरा नेटवर्क से लेकर मोबाइल टावर तक वर्षों पहले ही हैक कर लिए गए थे — खामेनेई की हर गतिविधि पर गुप्त नज़र रखी जा रही थी।

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तेहरान में हमले के बाद उठता धुआँ—वहीं जहाँ महीनों की जासूसी ने एक निर्णायक सुबह तय कर दी।
तेहरान में हमले के बाद उठता धुआँ—वहीं जहाँ महीनों की जासूसी ने एक निर्णायक सुबह तय कर दी।

Iran के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत दुनिया के लिए भले ही अचानक हुई हो, लेकिन पर्दे के पीछे यह एक ऐसी ऑपरेशन का नतीजा था जो कई सालों से तैयार किया जा रहा था। शनिवार को हुए एयर स्ट्राइक में खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद से यह खुलासा हुआ कि जिस हमले ने पूरे मध्य-पूर्व को हिला दिया, वह एक बारीक तरीके से बुनी गई जासूसी मशीनरी का अंतिम अध्याय था।

तेहरान के ट्रैफिक कैमरे—सालों तक हैक

Financial Times की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस ऑपरेशन की नींव तब पड़ी जब तेहरान में लगे सैकड़ों ट्रैफिक कैमरों को अमेरिकी और इज़रायली एजेंसियों ने चुपचाप हैक कर लिया।

इन कैमरों की फ़ीड ने खामेनेई समेत शीर्ष ईरानी अधिकारियों के बॉडीगार्ड्स की रोजमर्रा की आदतें, उनकी पार्किंग लोकेशन और मूवमेंट पैटर्न तक उजागर कर दिए। यह जानकारी आगे चलकर खामेनेई के सटीक लोकेशन की भविष्यवाणी में बेहद निर्णायक साबित हुई।

यह ऑपरेशन उतना आसान नहीं था, जितना दिखा

इस ऑपरेशन को तैयार करने में इज़रायल की खुफिया एजेंसी Mossad, सिग्नल इंटेलिजेंस यूनिट Unit 8200, और अमेरिकी Central Intelligence Agency (CIA) ने मिलकर काम किया।
सूत्रों के मुताबिक, सिर्फ कैमरे ही नहीं—मोबाइल फोन टावर, कॉल इंटरसेप्शन, और सोशल नेटवर्क एनालिसिस तक का इस्तेमाल किया गया ताकि खामेनेई की सुरक्षा चक्र में हर छोटी-बड़ी कमजोरी पकड़ी जा सके।

एक इज़रायली अधिकारी ने कहा:
“हम तेहरान को उतना ही जानते थे जितना यरुशलम को। एक छोटी भी गड़बड़ी हमें दिख जाती थी।”

ट्रंप ने दी थी अंतिम मंज़ूरी

हमले की अंतिम अनुमति शुक्रवार दोपहर Donald Trump ने ‘एयर फ़ोर्स वन’ में उड़ान के दौरान दी।
अमेरिका ने इस मिशन को Operation Epic Fury और इज़रायल ने Roaring Lion नाम दिया था।

हमले से ठीक पहले अमेरिकी साइबर टीमों ने ईरान के रडार सिस्टम को ब्लाइंड कर दिया—यानी किसी भी incoming स्ट्राइक का पता लगाने की क्षमता लगभग खत्म कर दी गई।

नाश्ता कर रहे थे शीर्ष नेता—तभी हुआ हमला

हमलावर लड़ाकू विमानों ने खामेनेई के आवासीय और प्रशासनिक परिसर पर लगभग 30 प्रिसिशन-गाइडेड बम गिराए।
जब हमला हुआ, खामेनेई अपने साथियों के साथ नाश्ते की बैठक में थे। यह बैठक सुबह होने के कारण हाई-वैल्यू टारगेट्स एक साथ मौजूद थे—जो इज़रायल के लिए “सबसे अनुकूल” समय था।

तेहरान में हमले के बाद उठता धुआँ—वहीं जहाँ महीनों की जासूसी ने एक निर्णायक सुबह तय कर दी।


क्यों नहीं लिया शरण—खामेनेई की एक बड़ी चूक?

ईरान के कई वरिष्ठ नेताओं की तरह खामेनेई आमतौर पर भूमिगत बंकर में नहीं रहते थे। यही वजह रही कि उनके लोकेशन को निशाना बनाना इज़रायल के लिए संभव हो पाया।
एक सूत्र के अनुसार:
“अगर वे अपने बंकर में होते तो इज़रायल के पास मौजूद कोई भी बम उन्हें नहीं छू सकता था।”

दो दशक पुराना बदला?

पूर्व Mossad अधिकारी सिमा शाइन के अनुसार, इस ऑपरेशन की जड़ें 2001 तक जाती हैं, जब इज़रायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया था कि ईरान को शीर्ष प्राथमिकता बनाया जाए।
इसके बाद से इज़रायल ने:

  • ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों की हत्याएँ
  • परमाणु संयंत्रों में तोड़फोड़
  • Hezbollah पर ऑपरेशन
  • सीरिया में सैन्य ढांचे का विनाश

जैसे दर्जनों गुप्त अभियानों को अंजाम दिया।

क्या दुनिया को अस्थिरता का नया अध्याय मिलने वाला है?

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी राष्ट्र प्रमुख की हत्या—वह भी साइबर, जासूसी और एआई आधारित इंटेलिजेंस की मदद से—मध्य-पूर्व में एक पूरी तरह नई प्रकार की जंग की शुरुआत है।

ईरान की ओर से जवाबी हमला कब और कैसे होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन वैश्विक विश्लेषक मानते हैं कि यह संघर्ष अब पारंपरिक युद्ध के बजाय हाई-टेक इंटेलिजेंस वॉर की तरफ बढ़ चुका है।

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