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प्रियंका गांधी के बयान पर धर्मेंद्र प्रधान का पलटवार – “यह अज्ञानता और राजनीतिक अवसरवाद की पराकाष्ठा है”
प्रियंका गांधी ने NEP और PM-श्री योजना को बताया ‘ब्रेनवॉशिंग का जरिया’, तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा – “यह उन शिक्षकों और नागरिकों का अपमान है जिन्होंने इन सुधारों को आकार दिया।”
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और पीएम-श्री योजना (PM-SHRI Scheme) पर दिए गए बयान ने सियासी माहौल गरमा दिया है।
केरल के वायनाड में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि नई शिक्षा नीति और प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया योजना का उद्देश्य “बच्चों का ब्रेनवॉश करना है” और यह “सिर्फ एक विचारधारा की ओर झुकी हुई है।”
उनके इस बयान पर केंद्र के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तीखा पलटवार किया और कहा कि यह बयान न केवल “अज्ञानता का प्रतीक है” बल्कि “राजनीतिक अवसरवाद की मिसाल” भी है।
प्रियंका गांधी ने क्या कहा?
प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में कहा,
“आज बच्चों को पढ़ाई के नाम पर एक ही विचारधारा की दिशा में मोड़ा जा रहा है।
शिक्षा का मकसद सोचने-समझने की क्षमता विकसित करना होता है, न कि किसी राजनीतिक विचार को थोपना।
लेकिन नई शिक्षा नीति और पीएम-श्री योजना के तहत बच्चों का ब्रेनवॉश किया जा रहा है।”
उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा को “राजनीतिक उपकरण” बना रही है और स्कूलों को प्रचार का माध्यम बना दिया गया है।
धर्मेंद्र प्रधान का पलटवार – ‘यह बयान राष्ट्र निर्माण की भावना का अपमान है’
प्रियंका गांधी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा —
“प्रियंका गांधी का बयान अज्ञानता और राजनीतिक अवसरवाद की पराकाष्ठा है।
नई शिक्षा नीति और पीएम-श्री जैसी योजनाएँ देश के करोड़ों बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए बनाई गई हैं।
इन सुधारों को शिक्षकों, शिक्षाविदों और नागरिकों के सामूहिक विचार से तैयार किया गया है।
ऐसे गैर-जिम्मेदार और भ्रामक बयान देकर वह उन सभी का अपमान कर रही हैं।”
प्रधान ने आगे कहा कि यदि “बच्चों में नवाचार, आलोचनात्मक सोच और भारत की विरासत पर गर्व करना” एक विचारधारा कहलाती है, तो “यह विचारधारा राष्ट्र निर्माण की है।”

क्या है NEP और PM-श्री योजना?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) —
- भारत की शिक्षा प्रणाली में सबसे बड़ा सुधार, जिसे 34 साल बाद लागू किया गया।
- इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता, विश्लेषणात्मक सोच और कौशल विकास को बढ़ावा देना है।
- इसमें बोर्ड परीक्षा के पैटर्न से लेकर उच्च शिक्षा के ढांचे तक में सुधार किया गया है।
पीएम-श्री योजना (PM Schools for Rising India) —
- इस योजना के तहत देशभर में 14,500 मॉडल स्कूलों को विकसित किया जा रहा है।
- इन स्कूलों में डिजिटल शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, कला और विज्ञान प्रयोगशालाएँ जैसी सुविधाएँ दी जा रही हैं।
- उद्देश्य है “हर बच्चे को आधुनिक और मूल्य आधारित शिक्षा” देना।
राजनीतिक हलचल और प्रतिक्रियाएँ
प्रियंका गांधी के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस “हर उस नीति का विरोध कर रही है जो देश के युवाओं को सशक्त बनाती है।”
वहीं कांग्रेस के कुछ नेताओं ने प्रियंका के समर्थन में कहा कि “शिक्षा व्यवस्था में विचारधारा का संतुलन ज़रूरी है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद 2026 के लोकसभा चुनावों से पहले शिक्षा और विचारधारा को लेकर बड़ा विमर्श खड़ा कर सकता है।
प्रधान का अंतिम संदेश — “शिक्षा राजनीति नहीं, राष्ट्र नीति होनी चाहिए”
अपने बयान के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा —
“शिक्षा बच्चों का अधिकार है, किसी पार्टी की विचारधारा का माध्यम नहीं।
हमें राजनीति से ऊपर उठकर यह समझना होगा कि देश का भविष्य कक्षा में ही बनता है, संसद में नहीं।”
उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार शिक्षा को “राष्ट्र नीति” के रूप में देखती है, न कि “राजनीतिक साधन” के रूप में।
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