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दिल्ली की जहरीली हवा से तंग आकर गोवा भागे दिल्लीवाले – जानिए कैसे बदली उनकी ज़िंदगी

वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर से परेशान कई दिल्लीवासी अब गोवा में बसा रहे हैं नया जीवन, जहाँ सांस लेना अपराध नहीं बल्कि राहत है।

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दिल्ली की जहरीली हवा से तंग आकर गोवा पहुंचे लोग – जानिए क्यों हो रही है ये नई प्रवृत्ति
दिल्ली की जहरीली हवा से परेशान लोग अब गोवा जैसे तटीय इलाकों में बसा रहे हैं नया जीवन।

दिल्ली की हवा अब सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक चेतावनी बन चुकी है। हर साल दीपावली के बाद जब राजधानी पर धुंध और धुआं छा जाता है, तो लोगों की आँखों में जलन और सांसों में घुटन बढ़ जाती है। इस जहरीली हवा से बचने के लिए अब कई दिल्लीवासी गोवा जैसे राज्यों का रुख कर रहे हैं, जहाँ आसमान साफ है और हवा में जिंदगी की खुशबू अब भी बाकी है।

दिल्ली छोड़कर गोवा – एक नई शुरुआत

गुरजोत सिंह और उनकी पत्नी पूनम चौधरी, जो पेशे से सलाहकार हैं, ने दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में ऊँचा किराया देकर यह सोचकर घर लिया था कि वहाँ कुछ बेहतर हवा मिलेगी। लेकिन लगातार सिरदर्द, साइनस, त्वचा की एलर्जी और आसपास चल रहे मेट्रो प्रोजेक्ट की धूल ने उनकी उम्मीदें तोड़ दीं।
इस साल फरवरी में दोनों ने दिल्ली को अलविदा कहकर गोवा में बसने का निर्णय लिया।
गुरजोत कहते हैं – “हमने शहर की जिंदगी नहीं छोड़ी, हमने सिर्फ प्रदूषण छोड़ा है। एयर प्यूरीफायर या मास्क से घर तो सुरक्षित हो सकता है, लेकिन बाहर की हवा नहीं बदली जा सकती।”

“अब सांस लेना अपराध नहीं लगता”

गोवा में रहते हुए अब इस जोड़े की सेहत में जबरदस्त सुधार आया है। वे कहते हैं – “तीन महीनों में हमने जितना बाहर समय बिताया, उतना पिछले दो साल में दिल्ली में नहीं बिता पाए थे। यहाँ की हवा दुश्मन नहीं, साथी लगती है।”

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आंकड़ों में दिल्ली की हालत

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, इस अक्टूबर में दिल्ली का औसत AQI 223 रहा — जो पिछले पांच सालों में दूसरा सबसे खराब रहा।
दीपावली के दिन (20 अक्टूबर) दिल्ली का AQI 345 दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष से भी अधिक जहरीला था।
और 24 अक्टूबर को तो हालात इतने बिगड़े कि AQI 373 तक पहुंच गया — यानी “गंभीर श्रेणी” में।

“सांसों की कीमत पर नहीं जीना था”

सोनाली वर्मा, जो जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण नीति पर काम करती हैं, ने 2024 में गोवा में रहने का फैसला किया।
वो बताती हैं – “मेरी माँ कैंसर सर्वाइवर हैं, और मैं खुद हर हफ्ते बीमार पड़ जाती थी। दिल्ली की हवा अब सुधरने वाली नहीं लगती। हर दिन AQI देखना और डर के साथ जीना — यही जिंदगी नहीं हो सकती।”
अब गोवा में उनकी माँ की सेहत में सुधार है, और वे कहती हैं – “अब मुझे सुबह टहलने जाने से डर नहीं लगता। खिड़कियाँ खोल सकती हूँ, और हवा में धुआं नहीं, समंदर की खुशबू है।”

बच्चों के लिए भी राहत

दिल्ली की चार्टर्ड अकाउंटेंट कृति अवस्थी बताती हैं कि उन्होंने भी इस साल सिओलिम, गोवा में घर खरीदा है।
वह कहती हैं – “हमारा तीन साल का बच्चा दिल्ली की धूल में बार-बार बीमार पड़ता था। यहाँ वह खुली हवा में खेलता है, दौड़ता है, और अब कम बीमार पड़ता है। बच्चे को खुला आकाश मिलना सबसे बड़ा सुख है।”

प्रवासियों की बढ़ती लहर

दिल्ली के कई परिवार अब “सेकंड होम इन गोवा” का विकल्प चुन रहे हैं। जो लोग रिमोट जॉब करते हैं, वे पूरी तरह गोवा में शिफ्ट हो गए हैं, जबकि कुछ कामकाजी लोग साल में कुछ महीने वहाँ बिताते हैं ताकि प्रदूषण से राहत मिल सके।

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पर्यावरण विशेषज्ञों की राय

पर्यावरणविदों का कहना है कि यह प्रवृत्ति आने वाले वर्षों में और बढ़ेगी।
“जब सरकारें वायु गुणवत्ता पर कड़े कदम नहीं उठातीं, तो नागरिक अपने लिए विकल्प खोजते हैं। गोवा, केरल और पहाड़ी राज्यों में अब ऐसे ‘प्रदूषण प्रवासी’ तेजी से बढ़ रहे हैं,” कहते हैं पर्यावरण विशेषज्ञ अरुण बंसल

निष्कर्ष

दिल्ली की दमघोंटू हवा ने न सिर्फ फेफड़ों को बल्कि लोगों की जीवनशैली और सोच को भी बदल दिया है। अब यह सिर्फ शहर छोड़ने का नहीं, बल्कि जीने का फैसला बन चुका है।
जैसे गुरजोत सिंह कहते हैं – “दिल्ली में हम जिंदा थे, पर सांस नहीं ले पा रहे थे। गोवा में हम जी रहे हैं — और वो भी खुले आसमान के नीचे।”

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