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बिहार फतह के बाद अब BJP की नज़र बंगाल पर! क्या ‘बाहरी’ टैग और बंगाली अस्मिता की चुनौती पार कर पाएगी पार्टी?
2026 के चुनाव से पहले BJP ने तेज की बंगाल रणनीति—PM मोदी ने बिहार जीत के बाद संकेत दिए, लेकिन TMC की पहचान राजनीति और ममता बनर्जी का जनाधार बड़ा रोड़ा।
नई दिल्ली — बिहार में ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब पूरे फोकस के साथ पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ रही है। पार्टी के अंदर इसे “अगला बड़ा मिशन” माना जा रहा है। कारण साफ है—बंगाल न सिर्फ राजनीतिक रूप से अहम है, बल्कि पूर्वी भारत में BJP के विस्तार का सबसे बड़ा दरवाज़ा भी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में शानदार जीत के बाद अपने भाषण में साफ कहा था कि “बिहार की जीत ने बंगाल की राह आसान कर दी है। बंगाल के लोगों का आशीर्वाद मिला तो हम वहां भी जंगल राज को समाप्त कर देंगे।”
यही बयान पार्टी की रणनीति की झलक देता है।
TMC का किला—BJP की सबसे कठिन परीक्षा
बंगाल में BJP को सबसे बड़ी चुनौती ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मज़बूत जनाधार से है।
TMC ने पिछले दशक में अपनी राजनीति को तीन स्तंभों पर खड़ा किया है:
- बंगाली अस्मिता (Bengali Identity)
- ममता बनर्जी का व्यक्तिगत जनाधार
- स्थानीय बनाम बाहरी की राजनीति
2021 के चुनाव में BJP ने सीटें बढ़ाईं जरूर, लेकिन “बाहरी पार्टी” का टैग उसके लिए भारी पड़ा।
बंगाली अस्मिता को काउंटर करना—सबसे बड़ा गेम
BJP की रणनीति इससे पहले तक विकास, हिंदुत्व और भ्रष्टाचार-विरोध जैसे मुद्दों पर केंद्रित रही है।
लेकिन TMC ने इसे काँट्रास्ट कर दिया:
- “दिल्ली वाली पार्टी” बनाम “बंगाल की पार्टी”
- “बाहरी बनाम बंगाली”
- “माटी-मानुष” बनाम “केंद्रीकरण”
अब BJP अंदर ही अंदर मानती है कि इस दांव को काटना चुनाव जीतने की सबसे बड़ी शर्त है।
CM फेस नहीं उतारेगी BJP—क्यों?
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक, बंगाल चुनाव में BJP अपना मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं करेगी।
कारण:

TMC के पास ममता जैसे बड़े नेता हैं- BJP एक सामूहिक नेतृत्व मॉडल दिखाना चाहती है
- क्षेत्रीय अस्मिता के मुद्दे पर एक चेहरा उतारने से उल्टा दांव पड़ सकता है
ऐसे में अभियान की कमान मोदी-शाह की जोड़ी और स्थानीय नेताओं के गठजोड़ के हाथों में रहेगी।
क्यों है बंगाल BJP की टॉप विशलिस्ट में?
पार्टी के भीतर कई नेता मानते हैं कि:
- पूर्वी भारत में पार्टी का सबसे बड़ा विस्तार बंगाल में संभव है
- राज्य में 40+ लोकसभा सीटें हैं, जो 2029 की राष्ट्रीय राजनीति पर असर डालेंगी
- उत्तर बंगाल में पहले से BJP का अच्छा आधार है, अब दक्षिण बंगाल में पैठ बनाना लक्ष्य है
अपनी रणनीति में पार्टी नए चेहरों, पुराने असंतुष्ट TMC नेताओं और युवा वर्ग को जोड़ने की कोशिश करेगी।
बंगाल के राजनीतिक समीकरण—एक भावनात्मक राज्य
पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से भावनाओं, संस्कृति और अस्मिता से जुड़ी रही है।
यहां मुद्दे सिर्फ विकास से तय नहीं होते, बल्कि:
- साहित्य
- भाषा
- माटी
- भू-सांस्कृतिक पहचान
भी बड़े चुनावी कारक हैं।
BJP की नेता हालांकि मानते हैं कि 2021 की तुलना में पार्टी अब:
- अधिक संगठित है
- बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क बना चुकी है
- और TMC सरकार की “शासन मॉडल” पर आक्रामक तरीके से सवाल उठा रही है
मानव स्पर्श—बंगाल की जनता की उम्मीदें बदल रहीं हैं
बंगाल के वोटर अब “सिर्फ राजनीतिक वादों” से आगे बढ़कर:

सुरक्षा- रोज़गार
- आर्थिक स्थिरता
- सांप्रदायिक सौहार्द
जैसे मुद्दों पर सोच रहे हैं।
चाहे BJP हो या TMC—लोग अब देखते हैं कि कौन उनके रोज़मर्रा के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकता है।
बिहार की जीत से मिलेगी मनोवैज्ञानिक बढ़त
बिहार की धमाकेदार जीत ने BJP कैडर में नई ऊर्जा भर दी है।
पार्टी को उम्मीद है कि इस जोश का असर:
- बांका
- उत्तर दिनाजपुर
- अलीपुरदुआर
- हावड़ा और हुगली
जैसे जिलों में महसूस होगा, जहाँ BJP पहले भी मजबूत प्रदर्शन कर चुकी है।
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