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Bihar Chunav 2025: RJD की करारी हार के पीछे छुपी 5 बड़ी वजहें, अब Tejashwi Yadav के सामने क्या रास्ता?
NDA की सोशल इंजीनियरिंग, Chirag Paswan की वापसी, कमजोर नैरेटिव और ‘जंगल राज’ की छाया—RJD को क्यों मिला अब तक का सबसे बड़ा झटका
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का जनादेश साफ कर गया—राज्य की राजनीति में इस बार हवा बिल्कुल अलग थी। 2020 में Tejashwi Yadav की रैलियों में दिखने वाली लहर और “10 लाख नौकरी” वाले वादे को जिस तरह जनता ने हाथों-हाथ लिया था, इस चुनाव में वैसी रोशनी नजर नहीं आई। RJD का प्रदर्शन बीते कई चुनावों में सबसे खराब साबित हुआ और महागठबंधन की कमान संभालने वाले तेजस्वी एक बार फिर सत्ता की चौखट पर ही रुक गए।
दिलचस्प बात यह है कि इस बार तेजस्वी ने वोटिंग से पहले ही 18 नवंबर को “शपथ ग्रहण” की तारीख तय कर दी थी और मीडिया से कहते दिखे—
“Shubhkamnayen, badlav ho raha hai.”
लेकिन नतीजों ने जो तस्वीर पेश की, वह इस उम्मीद से बिल्कुल उलट निकली।
1. NDA की ‘नयी सोशल इंजीनियरिंग’ ने बिगाड़ा खेल
इस बार NDA की सबसे बड़ी ताकत रही उनकी सूझबूझ से बनाई गई सोशल इंजीनियरिंग।
- Chirag Paswan की NDA में वापसी
- Upendra Kushwaha का कोर वोट बैंक
- BJP–JDU का संयुक्त ग्राउंड मैनेजमेंट
इन सबने मिलकर कई सीटों पर वोट का सीधा कन्वर्ज़न कराया। 7% से अधिक वोट शेयर वाला पासवान–कुशवाहा समीकरण RJD के कई पारंपरिक गढ़ों को हिला गया।
2. ‘जंगल राज’ का पुराना नैरेटिव RJD के पीछे फिर पड़ा भारी
RJD वर्षों से “योजनाओं”, “रोज़गार”, “युवा नेतृत्व” की बात कर रही है, लेकिन विपक्ष की तरफ से बार-बार उठाया जाने वाला “जंगल राज” का नैरेटिव इस बार भी जनता के मन में घर करता दिखा।
तेजस्वी इस छवि को तोड़ने की कोशिश करते रहे, मगर एक मज़बूत कंट्रानैरेटिव न आने की वजह से मुद्दा फिर भारी पड़ गया।
3. महागठबंधन में समन्वय की कमी
कई सीटों पर
- उम्मीदवार चयन में असहमति,
- कार्यकर्ताओं के बीच मतभेद
- और कमजोर बूथ मैनेजमेंट
ने RJD को भारी नुकसान पहुँचाया।
कांग्रेस की हालत तो इतनी कमजोर रही कि कई सीटों पर उसके उम्मीदवार तीसरे–चौथे नंबर पर चले गए।

4. तेजस्वी का नैरेटिव इस बार असरदार क्यों नहीं रहा?
पिछले चुनाव में नौकरी और युवा नेतृत्व का वादा चुनावी हवा का केंद्र था।
इस बार, महंगाई–रोज़गार–कृषि संकट जैसे मुद्दे उठाए जरूर गए, मगर ना तो ज़मीनी अभियान मजबूत दिखा, ना ही जनता को लगा कि RJD की तरफ से कोई नई योजना या बड़े बदलाव की तस्वीर सामने आ रही है।
तेजस्वी के कुछ बयान भी सोशल मीडिया पर गलत संदर्भों में वायरल हुए, जिसका असर युवा वोटर्स पर पड़ा।
5. NDA का शांत लेकिन बेहद रणनीतिक कैंपेन
जहाँ RJD बड़े-बड़े दावे कर रही थी, वहीं NDA ने इस बार कम बोलकर ज्यादा किया।
- पंचायत स्तर पर माइक्रो कैंपेन
- महिलाओं और पहली बार वोट करने वाले युवाओं तक सीधा संपर्क
- लाभार्थी योजनाओं का बड़ा नेटवर्क
इन सभी ने NDA को ज़मीन पर एक मज़बूत स्थिति दे दी।
RJD के सामने आगे क्या? तेजस्वी क्या करेंगे?
चुनाव के नतीजे भले निराशाजनक हों, लेकिन तेजस्वी की उम्र और ऊर्जा दोनों उनके साथ हैं। पार्टी के अंदर चर्चा है कि अब
- संगठन में बड़े बदलाव
- युवा कार्यकर्ताओं को नेतृत्व
- पुराने चेहरों की समीक्षा
- और सोशल मीडिया–ग्राउंड कैंपेन को फिर से डिज़ाइन
जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि तेजस्वी को अब “भावनात्मक भाषण” से हटकर “नियोजित नीति–मॉडल” दिखाना होगा, तभी वे अगली लड़ाई में मजबूती के साथ वापसी कर पाएंगे।
क्या 2025 की हार RJD को नया रास्ता दिखाएगी?
यह चुनाव भले RJD के लिए झटका हो, पर राजनीति में हर हार एक सीख होती है। महागठबंधन की टूटती पकड़, NDA का योजनाओं पर फोकस और युवा वोटर के बदलते रुझान—इन तीनों का सामना किए बिना RJD आगे नहीं बढ़ सकती।
बिहार की राजनीति बदल रही है और तेजस्वी को उसी के हिसाब से अपनी रणनीति बदलनी होगी।
अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि 2025 की यह हार तेजस्वी को कमज़ोर बनाएगी या और मज़बूत।
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