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बिहार चुनाव 2025 में बड़ा उलटफेर? एग्जिट पोल्स बोले – भाजपा बनेगी ‘सबसे बड़ी पार्टी’, तेजस्वी यादव की आरजेडी पिछड़ी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के एग्जिट पोल्स ने दिखाया चौंकाने वाला रुझान – भाजपा 69 सीटों पर आगे, जेडीयू और आरजेडी में कड़ी टक्कर
बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। 2025 के विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल्स के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) इस बार राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा को 67 से 70 सीटें मिलने का अनुमान है, जो इसे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में “बिग ब्रदर” की भूमिका में ला सकती है।
वहीं, लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janata Dal) को 56 से 69 सीटों के बीच मिलने का अनुमान है, जबकि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की जनता दल (यूनाइटेड) (Janata Dal (United)) 58 से 71 सीटों तक पहुंच सकती है। औसतन देखें तो भाजपा 69, जेडीयू 62 और आरजेडी 63 सीटों पर सिमट सकती है।
यह नतीजे अगर वास्तविक परिणामों के करीब भी रहे, तो बिहार की सत्ता समीकरण में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 2020 में जहां आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, इस बार भाजपा उसकी जगह लेने के करीब है।

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भाजपा की रणनीति पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने इस बार चिराग पासवान (Chirag Paswan) और लोक जनशक्ति पार्टी (Lok Janshakti Party) के पुराने समीकरणों को सुधारकर मजबूत नेटवर्क तैयार किया है। 2020 के चुनावों में एलजेपी के अकेले लड़ने से नीतीश कुमार की पार्टी को नुकसान हुआ था, लेकिन इस बार भाजपा ने एनडीए के भीतर तालमेल पर जोर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की लोकप्रियता और केंद्र की योजनाओं का प्रभाव बिहार में वोटिंग पैटर्न पर दिखा है।
एग्जिट पोल्स की भविष्यवाणी
इस बार नौ अलग-अलग एजेंसियों — दैनिक भास्कर, मेट्राइज, पीपल्स इनसाइट, चानक्य स्ट्रैटेजीज और पीपल्स पल्स — ने अपने एग्जिट पोल जारी किए हैं। इनमें से अधिकतर ने एनडीए की स्पष्ट बढ़त बताई है।
एग्जिट पोल्स के अनुसार:
- एनडीए (NDA) को 130 से 167 सीटें मिल सकती हैं
- महागठबंधन (Grand Alliance) को 73 से 108 सीटें मिलने का अनुमान
- कुल औसत: एनडीए 147 सीटें, महागठबंधन 90 सीटें
हालांकि एग्जिट पोल्स की सटीकता पर सवाल भी उठते रहे हैं। 2015 और 2020 के चुनावों में भी कई सर्वे गलत साबित हुए थे। इस बार भी मतगणना के दिन तस्वीर कुछ अलग हो सकती है।

तेजस्वी यादव के लिए चुनौतीपूर्ण समय
तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के लिए यह चुनाव बेहद अहम था। पिछली बार वे विपक्ष के चेहरे के रूप में उभरे थे, लेकिन इस बार महागठबंधन को वोटरों की उम्मीदों पर खरा उतरना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है।
विश्लेषक मानते हैं कि युवा वोट बैंक का झुकाव भाजपा की ओर बढ़ा है, जबकि ग्रामीण इलाकों में जेडीयू ने अपनी स्थिति बेहतर की है।
बिहार की जनता का फैसला क्या कहेगा?
भले ही एग्जिट पोल्स भाजपा को आगे दिखा रहे हों, लेकिन बिहार की जनता का असली फैसला 3 दिसंबर को मतगणना के बाद सामने आएगा। इतिहास गवाह है कि बिहार ने कई बार एग्जिट पोल्स को गलत साबित किया है।
अगर भाजपा वाकई सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती है, तो यह राज्य की राजनीति में नया अध्याय होगा, और नीतीश कुमार की भूमिका पर भी नए सिरे से मंथन होगा।
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