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बंगाल में सियासी तपिश बढ़ी: Abhishek Banerjee की ‘आबर जितबे बांग्ला’ यात्रा को क्यों गेमचेंजर मान रही है TMC
विधानसभा चुनाव से पहले अभिषेक बनर्जी की राज्यव्यापी यात्रा, BJP पर सीधा हमला और 2023 की ‘नबो जोआर यात्रा’ जैसी जीत की उम्मीद
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और इसी सियासी माहौल में Abhishek Banerjee ने राज्यव्यापी यात्रा की कमान संभाल ली है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार से अपनी बहुचर्चित ‘आबर जितबे बांग्ला’ यात्रा की शुरुआत की, जिसे पार्टी आने वाले चुनावों से पहले एक बड़े गेमचेंजर के रूप में देख रही है।
करीब एक महीने तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान अभिषेक बंगाल के गांव-गांव, कस्बे-कस्बे जाकर रोड शो, जनसभाएं और स्थानीय संवाद करेंगे। TMC का दावा है कि इस यात्रा का मकसद सिर्फ चुनाव प्रचार नहीं, बल्कि आम लोगों से सीधा जुड़ाव और जमीनी फीडबैक लेना भी है।
TMC नेतृत्व के मुताबिक, अभिषेक इस दौरान तीन बार सत्ता में रही Mamata Banerjee सरकार की उपलब्धियों को सामने रखेंगे। खासतौर पर सामाजिक कल्याण योजनाएं, बंगाल की भाषा-संस्कृति की पहचान और केंद्र सरकार के साथ टकराव जैसे मुद्दे इस यात्रा का केंद्र होंगे। पार्टी का नारा है— “जितना भी हमला करो, आबर जितबे बांग्ला”—जो सीधे तौर पर Bharatiya Janata Party पर राजनीतिक प्रहार माना जा रहा है।

TMC नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियां बंगाल को दबाने की कोशिश कर रही हैं। पार्टी यह भी कह रही है कि केंद्र पर बंगाल के करीब 1.96 लाख करोड़ रुपये के बकाया हैं और चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को वोटरों को वंचित करने की कवायद बताया जा रहा है।
इस यात्रा की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि TMC इसे अभिषेक की 2023 की ‘नबो जोआर यात्रा’ से जोड़कर देख रही है। उसी यात्रा के बाद पंचायत चुनावों में TMC को बड़ी जीत मिली थी और फिर 2024 के लोकसभा चुनावों में भी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उस समय कई उम्मीदवारों का चयन खुद अभिषेक बनर्जी की रणनीति का नतीजा था।
अभिषेक बनर्जी का कद पार्टी में लगातार बढ़ता रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्हें TMC का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। INDIA गठबंधन की बैठकों में भी वह पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे। यहां तक कि जब 2023 में ममता बनर्जी चोटिल होकर सक्रिय राजनीति से कुछ समय दूर रहीं, तब अभिषेक ने दिल्ली तक विरोध मार्च का नेतृत्व किया।
हाल ही में उन्हें लोकसभा में TMC का नेता भी नियुक्त किया गया, जिससे साफ है कि आगामी विधानसभा चुनाव में रणनीति और संगठन की कमान काफी हद तक उन्हीं के हाथ में होगी। हालांकि, विपक्ष इस यात्रा को महज एक “फाइव स्टार यात्रा” बता रहा है। BJP और Communist Party of India (Marxist) दोनों ने दावा किया है कि TMC की यात्राएं जमीनी हकीकत नहीं बदल पाएंगी।
इसके बावजूद, सियासी जानकार मानते हैं कि अभिषेक बनर्जी की यह यात्रा TMC के लिए सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि संगठन को एकजुट करने और टिकट वितरण से पहले जनता की नब्ज टटोलने का बड़ा प्रयोग है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि ‘आबर जितबे बांग्ला’ सच में इतिहास दोहराती है या नहीं।
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