Connect with us

Indian Railways

Mumbai’s की पहली नॉन-एसी ऑटो-डोर लोकल ट्रेन का वेंटिलेशन टेस्ट शुरू, यात्रियों की सुरक्षा और हवा पर फोकस

कुरला कारशेड पहुंची 12 डिब्बों वाली नई ट्रेन, 65% बढ़ी एयरफ्लो क्षमता; पारंपरिक ओपन-डोर रेक से बड़ा बदलाव माना जा रहा है

Published

on

कुरला कारशेड में टेस्टिंग के दौरान खड़ी नॉन-एसी ऑटो-डोर लोकल ट्रेन, जिसमें वेंटिलेशन सिस्टम का परीक्षण किया जा रहा है।

मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली उपनगरीय रेल सेवा एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। पहली बार नॉन-एसी लोकल ट्रेन को ऑटोमैटिक दरवाजों के साथ तैयार किया गया है, जो अब अपने महत्वपूर्ण वेंटिलेशन टेस्ट से गुजर रही है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह कदम सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक अहम प्रयोग माना जा रहा है।

यह 12 डिब्बों वाली ट्रेन सोमवार शाम इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) से कुरला कारशेड पहुंची। यह ट्रेन पारंपरिक खुले दरवाजों वाली लोकल ट्रेनों से काफी अलग है, क्योंकि इसमें ऑटोमैटिक स्लाइडिंग दरवाजे लगाए गए हैं, जो यात्रा के दौरान खुले नहीं रहेंगे।

सबसे बड़ी चुनौती इस डिजाइन में हवा के सही प्रवाह (ventilation) को बनाए रखना है। रेलवे का दावा है कि इस ट्रेन में एयरफ्लो क्षमता को लगभग 65 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। इसके लिए रूफ-माउंटेड ब्लोअर्स और ड्यूल एयर इनटेक सिस्टम लगाए गए हैं, जो कोच के भीतर ताजी हवा के संचार को बेहतर बनाते हैं।

इसके अलावा, यात्रियों की सुविधा और हवा के प्रवाह को ध्यान में रखते हुए चौड़ी स्लाइडिंग विंडो और लूवर्ड (louvred) दरवाजों का उपयोग किया गया है। यह डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि दरवाजे बंद रहने पर भी हवा का प्रवाह बाधित न हो।

154075067


मुंबई लोकल में अक्सर भीड़ और गर्मी बड़ी समस्या रहती है। ऐसे में यह नई ट्रेन एक समाधान के रूप में देखी जा रही है, लेकिन इसके साथ यात्रियों के अनुभव को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। खासकर गर्मी के मौसम में जब ट्रेनें खचाखच भरी होती हैं, तब बंद दरवाजों के साथ हवा की गुणवत्ता और आराम कितना बना रहेगा—यह आने वाला समय तय करेगा।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह परीक्षण चरण बेहद महत्वपूर्ण है, और इसके परिणामों के आधार पर आगे के बदलाव तय किए जाएंगे। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में ऐसे और रेक मुंबई की उपनगरीय सेवा में शामिल किए जा सकते हैं।

मुंबई की तेज रफ्तार जिंदगी में लोकल ट्रेनें सिर्फ परिवहन का साधन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की दिनचर्या का हिस्सा हैं। ऐसे में यह तकनीकी बदलाव आने वाले समय में यात्रा के अनुभव को पूरी तरह बदल सकता है।

और पढ़ें- DAINIK DIARY