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लालू यादव की वापसी से गरमाया बिहार का चुनाव – दानापुर में ‘जंगलराज बनाम रोजगार’ की जंग
77 साल की उम्र में लालू यादव ने फिर थामी सियासत की कमान, जेल में बंद रितलाल यादव के समर्थन में किया रोड शो, भीड़ में पुराने दिन लौटने की आहट
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहला चरण नज़दीक है और इसी के साथ राज्य की सियासत में एक पुराना नाम फिर गूंज उठा है — लालू प्रसाद यादव।
राजद (RJD) सुप्रीमो, जिनकी राजनीति ने कभी बिहार का चेहरा बदला था, अब फिर मैदान में हैं। उम्र और बीमारी से कमजोर हुए लालू यादव ने दानापुर सीट से अपने पुराने सहयोगी और मौजूदा विधायक रितलाल यादव के समर्थन में पहला रोड शो किया।
लालू का करिश्मा अब भी कायम
सफेद पोशाक, गले में हरी पट्टी और गाड़ियों का काफिला — यह नज़ारा था लालू यादव के रोड शो का, जो दीघा से खगौल तक 15 किलोमीटर लंबा सफर तय करता हुआ निकला।
रास्ते भर लोग सिर्फ एक झलक पाने को उमड़े थे। 27 वर्षीय अंकित यादव, जो दानापुर में कपड़े की दुकान चलाते हैं, कहते हैं – “लालू जी ने छोटे जातियों को इज़्ज़त दी, आवाज़ दी। आज भी लोग उनका नाम आदर से लेते हैं।”
रितलाल यादव – वफादारी या विवाद?
लालू का यह रोड शो सिर्फ एक प्रचार नहीं, बल्कि उनके पुराने राजनीतिक दौर की याद भी था।
जिन रितलाल यादव के लिए लालू प्रचार कर रहे हैं, वे इस समय भभुआ जेल में बंद हैं। उन पर 40 से अधिक आपराधिक मामले हैं, जिनमें हत्या, फिरौती और धमकी शामिल हैं।
फिर भी राजद ने उन पर भरोसा जताया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, “रितलाल पटना की राजनीति में लालू के सबसे वफादार सिपाही माने जाते हैं।”

दानापुर के लोगों में रितलाल को लेकर राय बंटी हुई है।
स्थानीय व्यापारी सुबोध गुप्ता कहते हैं, “हमसे दुकान चलाने के लिए पैसे मांगे जाते हैं। अपराध बढ़ा है, रात को लौटना मुश्किल है।”
वहीं कई लोग कहते हैं, “वो गरीबों की मदद करते हैं, हमेशा साथ खड़े रहते हैं।”
‘जंगलराज बनाम विकास’ की बहस फिर शुरू
एनडीए के नेता लगातार लालू के दौर को ‘जंगलराज’ बताकर हमला बोल रहे हैं, जबकि राजद का दावा है कि जनता अब रोजगार और युवाओं के भविष्य की बात करना चाहती है।
दानापुर के कन्हैया राय कहते हैं, “नीतीश कुमार ने सड़क और बिजली दी, लेकिन अब नौकरियों की जरूरत है। अगर रोजगार मिलेगा तो कारोबार अपने आप बढ़ेगा।”
वहीं रहीस कुमार, जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, कहते हैं, “हम रितलाल को पसंद नहीं करते, लेकिन इस बार वोट बदलाव के लिए देंगे। देखना है कि तेजस्वी क्या नया कर पाते हैं।”
राजनीति का नया मोड़ या पुरानी यादों की वापसी?
रितलाल के खिलाफ भाजपा ने रामकृपाल यादव को मैदान में उतारा है, जो कभी लालू के ही करीबी थे और बाद में बीजेपी में शामिल हुए। अब मुकाबला दिलचस्प हो चला है —
लालू का वफादार बनाम लालू का बागी।
दानापुर की गलियों में हर तरफ हरे झंडे लहरा रहे हैं और नारे गूंज रहे हैं – “लालू यादव ज़िंदाबाद!”
लेकिन सवाल वही है जो हर चुनाव के बाद रह जाता है –
क्या बिहार की जनता पुराने लालू युग की यादों को फिर जिंदा करेगी, या नए रोजगार के सपनों पर भरोसा जताएगी?
इसका जवाब 6 नवंबर को आने वाला है, जब दानापुर की जनता तय करेगी कि यह लालू का अलविदा है या नई शुरुआत।
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