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क्या अब भी विराट कोहली तोड़ सकते हैं सचिन का 100 शतकों का रिकॉर्ड? टेस्ट–T20 रिटायरमेंट, ODI फॉर्म और SA सीरीज़ की दो ताज़ा शतकों ने बदल दिया पूरा गणित
टेस्ट और T20 से रिटायरमेंट के बाद लगा था कि कोहली 100 शतकों के और दूर चले जाएंगे—लेकिन SA ODI सीरीज़ में दो धमाकेदार शतक जड़कर उन्होंने साबित कर दिया कि दौड़ अभी ख़त्म नहीं हुई
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे बड़ी बहसों में से एक—
क्या विराट कोहली सचिन तेंदुलकर के 100 इंटरनेशनल शतकों का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं?
कुछ महीने पहले यह सवाल थोड़ा धुंधला पड़ गया था, क्योंकि विराट ने टेस्ट और T20—दोनों फॉर्मेट से रिटायरमेंट लेकर सभी को चौंका दिया। उस समय लगा कि अब उनके पास शतकों की संख्या बढ़ाने के लिए अवसर काफी कम हो जाएंगे।
लेकिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जारी ODI सीरीज़ में विराट कोहली ने लगातार दो शतक जड़कर एक बार फिर पूरी बहस को जगा दिया है।
उनका संदेश साफ है—
“मैं अभी खत्म नहीं हुआ हूं।”

टेस्ट–T20 रिटायरमेंट: अवसर कम, दबाव ज्यादा
कोहली ने टेस्ट और T20I से संन्यास लेकर इंटरनेशनल मैचों की संख्या को काफी सीमित कर दिया।
इससे:
- साल में मिलने वाले मैच कम होंगे
- शतक बनाने के अवसर कम दिखाई दिए
- आलोचकों ने कहा कि 100 शतक अब लगभग असंभव है
लेकिन कोहली ने इस बदलते माहौल में खुद को ODI स्पेशलिस्ट के रूप में और तेज़ धार दी है।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो शतक—पुरानी भूख वापस
चालू SA सीरीज़ में विराट ने:
- एक क्लासिक 118* रन की पारी
- और फिर एक बेहतरीन 104 रन का शतक
लगातार दो वनडे शतकों से उन्होंने दिखा दिया कि जब वे फोकस्ड होते हैं, तो दुनिया की किसी भी गेंदबाज़ी के खिलाफ शतक बनाना उनके लिए सामान्य बात है।
इन दो शतकों ने:
- उनकी शतकों की कुल संख्या और ऊपर पहुंचाई
- और 100 शतकों के सपने को फिर से जिंदा कर दिया
क्या टेस्ट–T20 रिटायरमेंट से रिकॉर्ड की रेस खत्म?
नहीं। उल्टा, यह रणनीतिक कदम हो सकता है।
क्यों?
1. अब वनडे और फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट पर फोकस
कोहली अब अपना पूरा ऊर्जा वर्कलोड ODI और लीग क्रिकेट पर लगा सकते हैं—जहाँ उन्हें रन बनाना और लय पाना दोनों आसान होता है।
2. कम फॉर्मेट, ज़्यादा फिटनेस
टेस्ट और T20 के दबाव से मुक्त होकर वे:
- शरीर का बेहतर ध्यान रखेंगे
- लंबा करियर खेल पाएंगे
- वनडे में और भी ज्यादा समय तक टिकेंगे
3. ODI में शतक बनाना आसान नहीं, लेकिन उनका पसंदीदा फॉर्मेट है
कोहली के इंटरनेशनल शतकों में सबसे अधिक हिस्सा ODI का है।
अगर कोई फॉर्मेट उन्हें तेज़ी से 20 शतक और जोड़ने में मदद कर सकता है—
तो वह ODI ही है।
100 शतक—कितना दूर, कितना पास?
सचिन तेंदुलकर: 100 शतक
विराट कोहली: 80+ शतक (नए SA सीरीज़ शतकों सहित)
फासला — लगभग 18–19 शतक
विराट कोहली को चाहिए:
- हर साल 3–4 शतक
- 4–5 साल का निरंतर क्रिकेट
उनकी फिटनेस और hunger देखते हुए यह अविश्वसनीय नहीं लगता।
कोहली के पक्ष में पाँच सबसे बड़े तर्क
1. ODI में दुनिया का सबसे Consistent खिलाड़ी
उनका औसत, स्ट्राइक रेट और chasing ability—आज भी unmatched है।
2. बोल्ड कैप्टन नहीं, लेकिन बड़ा खिलाड़ी
कप्तानी छोड़ने के बाद दबाव कम हुआ है—और यह उनके बल्लेबाज़ी के लिए अच्छा है।
3. फिटनेस 30 की नहीं, लगभग 25 की
विराट की fitness उन्हें 40 वर्ष तक भी खेलने लायक बना सकती है।
4. भारत हर साल 20–25 ODI खेलता है
अवसर अब भी पर्याप्त हैं।
5. मानसिक रूप से रीफ़्रेश और भूखे
दो शतक साबित करते हैं कि उनकी motivation अभी भी आसमान छू रही है।

कौन सी चुनौतियाँ रास्ता रोक सकती हैं?
- ODI का भविष्य थोड़ा अनिश्चित है
- वर्कलोड मैनेजमेंट के तहत मैच कम मिल सकते हैं
- उम्र के साथ चोट का जोखिम बढ़ता है
- फॉर्म में गिरावट न आए, यह सुनिश्चित करना होगा
लेकिन फिर भी—
कोहली उन खिलाड़ियों में से हैं जो चुनौती देखकर और बड़ा खेलते हैं।
निष्कर्ष: रिकॉर्ड तेंदुलकर का है… पर उसे चुनौती कोहली ही देंगे
विराट कोहली:
- दो फॉर्मेट से रिटायर
- लेकिन ODI में और खतरनाक
- मानसिक रूप से फ्री
- और हाल ही में दो चमकदार शतक
इन सबके बाद अब यह सवाल उठता है—
क्या 100 शतकों का रिकॉर्ड उनके पहुंच में है?
जवाब है—
हाँ, अब भी है।
और SA सीरीज़ की दो शतकों ने यह साबित कर दिया कि यह रेस खत्म नहीं, बस एक नए मोड़ पर पहुंची है।
