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ईरान में अमेरिकी योजना फेल? प्रदर्शनकारियों के लिए भेजे गए हथियार बीच रास्ते ही गायब
डोनाल्ड ट्रंप ने खुद माना—“बहुत सारी बंदूकें भेजीं, लेकिन जनता तक नहीं पहुंचीं”; सवाल उठा, आखिर किसने खेल बिगाड़ा?
अमेरिका की एक और विदेश नीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार मामला ईरान का है, जहां कथित तौर पर सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को मजबूत करने के लिए भेजे गए हथियार अपने मकसद तक पहुंच ही नहीं पाए। इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा खुद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने किया है।
व्हाइट हाउस में ईस्टर समारोह के दौरान मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने स्वीकार किया कि अमेरिका ने ईरान में विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों की मदद के लिए “बहुत सारी बंदूकें” भेजी थीं। लेकिन ये हथियार उन लोगों तक नहीं पहुंचे, जिनके लिए उन्हें भेजा गया था।
ट्रंप के अनुसार, “हमने बहुत सारी बंदूकें भेजीं ताकि लोग उन ‘गुंडों’ के खिलाफ लड़ सकें। लेकिन हुआ क्या? जिन लोगों के पास ये हथियार पहुंचे, उन्होंने उन्हें खुद ही रख लिया। उन्होंने सोचा—ये तो बहुत शानदार बंदूक है, इसे मैं ही रख लेता हूं।”
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इस बयान के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या अमेरिका के साथ धोखा हुआ? अगर हां, तो किसने किया? ट्रंप ने इस पर सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को “भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हथियारों को ईरान तक पहुंचाने के लिए कुर्द नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि हथियार कहां और किस स्तर पर रोके गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना अमेरिकी खुफिया एजेंसी Central Intelligence Agency (CIA) की पारंपरिक रणनीतियों पर भी सवाल खड़े करती है, जो दशकों से विभिन्न देशों में सत्ता परिवर्तन के लिए इस तरह के तरीकों का इस्तेमाल करती रही है। लेकिन ईरान जैसे जटिल और सख्त नियंत्रण वाले देश में यह रणनीति काम नहीं कर पाई।
ईरान में लंबे समय से सरकार के खिलाफ असंतोष देखने को मिलता रहा है, लेकिन इस तरह के बाहरी हस्तक्षेप अक्सर उल्टा असर भी डाल सकते हैं। इस मामले में भी यही होता दिख रहा है—जहां हथियार प्रदर्शनकारियों के बजाय किसी और के हाथों में चले गए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अमेरिका को इस ऑपरेशन में धोखा दिया गया, या यह पूरी योजना ही गलत आकलन पर आधारित थी?
