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“नहीं चाहिए मुझे यह पद!” Donald Trump का दावा: ईरान ने मुझे बनाना चाहा सुप्रीम लीडर, मैंने कर दिया इनकार

रिपब्लिकन डिनर में ट्रंप का चौंकाने वाला बयान — ईरान ने किया खंडन, कहा “अमेरिका खुद से ही बातें कर रहा है”

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ट्रंप का बड़ा दावा: ईरान ने मुझे सुप्रीम लीडर बनाना चाहा, मैंने किया इनकार | Dainik Diary
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NRCC डिनर में दावा किया कि ईरान ने उन्हें सुप्रीम लीडर बनाने की "पेशकश" की थी — जिसे उन्होंने ठुकरा दिया।

वॉशिंगटन। दुनिया की राजनीति में अजीबोगरीब बयान कोई नई बात नहीं, लेकिन जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मंच पर खड़े होकर यह कहें कि “ईरान मुझे अपना सुप्रीम लीडर बनाना चाहता था, लेकिन मैंने मना कर दिया” — तो दुनिया का ध्यान खिंचना तय है।

बुधवार, 25 मार्च को वॉशिंगटन में नेशनल रिपब्लिकन कांग्रेशनल कमेटी (NRCC) के सालाना फंडरेजिंग डिनर में ट्रंप ने यह दावा किया। उन्होंने कहा — “ईरान की कमान संभालने में सबसे कम दिलचस्पी रखने वाले देश के नेता मैं हूँ। हम उनकी बातें बहुत साफ सुनते हैं। वे कहते हैं — ‘हम आपको अगला सुप्रीम लीडर बनाना चाहते हैं।’ मैं कहता हूँ — नहीं, शुक्रिया। मुझे यह नहीं चाहिए।”

क्या यह सच है या सियासी मजाक?

ट्रंप का यह दावा किसी भी ईरानी अधिकारी द्वारा प्रमाणित नहीं किया गया है। ईरान ने साफ कहा है कि वह अमेरिका से किसी भी स्तर पर बातचीत नहीं कर रहा। ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता इब्राहिम जुलफकारी ने करारा जवाब देते हुए कहा — “क्या आपका आंतरिक संघर्ष इस हद तक पहुंच गया है कि आप खुद से ही बातें करने लगे हैं?”

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लेकिन ट्रंप की असली बात शायद यह थी — उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि ईरान में सुप्रीम लीडर की कुर्सी इस वक्त इतनी खतरनाक हो चुकी है कि कोई भी उसे नहीं चाहता। जैसे किसी गाँव में सबसे पुराना कुआँ हो जिसे जानते सब हैं, पर पीने की हिम्मत किसी में न हो।

पृष्ठभूमि — क्यों है यह स्थिति?

28 फरवरी को इज़राइल ने “ऑपरेशन रोर ऑफ द लायन” के तहत ईरान पर हमले किए जिसमें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत हो गई।इसके बाद मोजतबा ख़ामेनेई — अली ख़ामेनेई के बेटे — ने सुप्रीम लीडर का पद संभाला। लेकिन वे युद्ध शुरू होने के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे। ऐसे में ट्रंप का कहना है कि यह पद इस वक्त किसी के लिए भी “अभिशाप” बन चुका है।

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ईरान को लेकर ट्रंप के और दावे

ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान बातचीत करना चाहता है और “बहुत बुरी तरह” कोई समझौता चाहता है — लेकिन नेता इसे खुलकर स्वीकार करने से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके अपने लोग उन्हें मार देंगे।

अमेरिका ने पाकिस्तान जैसे मध्यस्थों के ज़रिए ईरान को एक 15-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव भेजा है जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने, हिज़बुल्लाह जैसे प्रॉक्सी समूहों का समर्थन बंद करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मांगें शामिल हैं। लेकिन ईरान ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए अपनी अलग पाँच-सूत्रीय शर्तें रखी हैं।

व्हाइट हाउस की चेतावनी

व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कड़े शब्दों में कहा — “अगर ईरान मौजूदा हालात की सच्चाई को नहीं मानता और यह नहीं समझता कि वह सैन्य रूप से हार चुका है, तो राष्ट्रपति ट्रंप यह सुनिश्चित करेंगे कि उन पर पहले से कहीं ज़्यादा कड़ी मार पड़े।”

ट्रंप का यह बयान चाहे राजनीतिक मज़ाक हो या कूटनीतिक संदेश — एक बात तय है कि अमेरिका-ईरान के बीच यह युद्ध अब सिर्फ मैदान में नहीं, बयानों की जंग में भी लड़ा जा रहा है। और इस जंग में ट्रंप शायद खुद को सबसे बड़े खिलाड़ी के रूप में पेश करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।