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34 सेकंड की खामोशी… Vladimir Putin का माइक बंद, विश्व नेताओं के सामने हुई बड़ी गलती… लोग बोले– ‘शांति सम्मेलन में यही होना था!’
तुर्कमेनिस्तान के अश्गाबात में चल रहे शांति और विश्वास मंच पर तकनीकी गड़बड़ी से Putin असहज, 16 देशों के नेता खामोशी में देखते रह गए
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर Russia के राष्ट्रपति Vladimir Putin को शायद ही कभी असहज देखा गया हो, लेकिन तुर्कमेनिस्तान की राजधानी Ashgabat में आयोजित International Forum on Peace and Trust के दौरान कुछ ऐसा हुआ कि वे पूरे 34 सेकंड तक ‘मौन भाषण’ देते नजर आए।
जैसे ही उन्होंने अपना संबोधन शुरू किया, माइक्रोफोन अचानक काम करना बंद कर गया। पूरे हॉल में 16 देशों के राष्ट्राध्यक्ष मौजूद थे—जिनमें Turkey के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdoğan और Hungary के प्रधानमंत्री Viktor Orbán भी शामिल थे—लेकिन किसी को उनकी आवाज सुनाई नहीं दी।
पुतिन का चेहरा देखते ही लग रहा था कि वह स्थिति से बेहद नाराज हैं।
उन्होंने कई बार बोलना शुरू किया, फिर रुके, फिर माइक को छूकर देखा—लेकिन कोई फायदा नहीं। अंत में एक अधिकारी उनके पास आया और माइक का बटन ऑन करके चला गया। उसी समय पुतिन ने बेहद छोटे से दो शब्द कहे—“Thank you.” और फिर भाषण आगे बढ़ाया।
सोशल मीडिया पर इस घटना का जमकर मज़ाक बनाया जा रहा है। अज़रबैजान के मीडिया आउटलेट Minval ने लिखा—“पुतिन ने गलत बटन दबाया और लगभग एक मिनट तक बिना आवाज़ के बोले।”
वहीं Ukraine के एक पोर्टल ने टिप्पणी की—“उन्हें वही मिला जिसके वे हकदार थे। हजारों लोगों की जान लेने के बाद शांति मंच पर भाषण देने का हक नहीं।”

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चटडी नामक न्यूज़ पोर्टल ने लिखा—
“कुछ नया नहीं, अश्गाबात में पुतिन आधे मिनट तक बिना आवाज़ बोले। वही पुतिन जो विदेशी नेताओं को हेडफोन का बटन सिखाते दिखते हैं, अब खुद गलत बटन दबा बैठे।”
इस फोरम के दौरान पुतिन दो दिवसीय दौरे पर हैं और जल्द ही Iraq तथा Iran के नेताओं से मुलाक़ात करेंगे। वे अपनी मशहूर Aurus Limousine में अश्गाबात की सड़कों पर घूमते भी देखे गए।
ब्रिटेन ने दी कड़ी चेतावनी — “यूरोप के दरवाज़े पर युद्ध की आहट”
जहां पुतिन ‘शांति सम्मेलन’ में तकनीकी गड़बड़ी से जूझ रहे थे, वहीं दूसरी तरफ United Kingdom में माहौल गंभीर होता दिख रहा है। ब्रिटेन के आर्म्ड फोर्सेज मिनिस्टर Al Carns ने कहा है कि “यूरोप के दरवाज़े पर युद्ध की परछाई साफ दिख रही है।”
यह चेतावनी ऐसे समय पर आई है जब NATO के नए महासचिव Mark Rutte ने सदस्य देशों से रक्षा खर्च और हथियार उत्पादन बढ़ाने को कहा है। उनका दावा है कि “रूस अगले लक्ष्य की तलाश में है और कई देश खतरों को हल्के में ले रहे हैं।”
Carns ने कहा—
“आने वाला युद्ध पहले से कहीं बड़ा और खूनखराबे वाला हो सकता है। हमें अब और देरी नहीं करनी चाहिए।”

यानी अश्गाबात में माइक्रोफोन की 34 सेकंड की खामोशी और यूरोप को लेकर ब्रिटेन की चेतावनी—दोनों घटनाएं दिखा रही हैं कि दुनिया फिलहाल बेहद नाज़ुक दौर से गुजर रही है।
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