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पर्शियन गल्फ में कम हुआ सिग्नल जैमिंग का असर, जहाजों की असली लोकेशन आने लगी सामने
तनाव अब भी बरकरार, लेकिन तकनीकी दखल में कमी से नौवहन जोखिम में आई थोड़ी राहत
पर्शियन गल्फ क्षेत्र में बीते कुछ समय से जहाजों की लोकेशन छिप जाने की समस्या अब धीरे-धीरे कम होती नजर आ रही है। हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार, इस इलाके में इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल जैमिंग का असर कम हुआ है, जिससे जहाजों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने लगी है। इससे उन जहाज मालिकों और ऑपरेटर्स को राहत मिली है, जो अब तक अनिश्चितता के माहौल में काम कर रहे थे।
Persian Gulf और Strait of Hormuz जैसे संवेदनशील समुद्री मार्ग लंबे समय से वैश्विक व्यापार के लिए अहम रहे हैं। लेकिन हालिया संघर्ष और सैन्य गतिविधियों के कारण यहां जहाजों के नेविगेशन में भारी बाधाएं आ रही थीं। सिग्नल जैमिंग की वजह से कई जहाजों की वास्तविक लोकेशन छिप जाती थी, जिससे कानूनी और बीमा से जुड़े जोखिम भी बढ़ जाते थे।
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संयुक्त समुद्री सूचना केंद्र (Joint Maritime Information Center) की ताजा एडवाइजरी के मुताबिक, अब इस तरह की व्यापक सिग्नल बाधा में कमी आई है। हालांकि, खतरा पूरी तरह टला नहीं है और क्षेत्र में स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुधार के पीछे कई कारण हो सकते हैं। एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि Iran की जैमिंग क्षमता पर United States की सैन्य कार्रवाई का असर पड़ा हो। वहीं दूसरी ओर, United Arab Emirates द्वारा भी हस्तक्षेप में कमी लाई गई हो सकती है, खासकर तब जब क्षेत्र में हमलों की घटनाएं कम हुई हैं।
Jennifer Parker, जो University of Western Australia Defence and Security Institute से जुड़ी हैं, ने कहा कि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। उनके अनुसार, “जैमिंग का स्तर अभी भी पूरी तरह समझ में नहीं आया है और जहाजों के लिए जोखिम बरकरार है।”
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अगर जहाज Strait of Hormuz से गुजरते हैं, तो उन्हें ट्रांसपोंडर बंद कर केवल विजुअल नेविगेशन पर निर्भर रहना चाहिए। हालांकि यह तरीका सुरक्षित तो है, लेकिन इससे संचालन और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
कुल मिलाकर, सिग्नल जैमिंग में आई यह कमी राहत जरूर देती है, लेकिन पर्शियन गल्फ का यह इलाका अभी भी वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए एक जोखिम भरा मार्ग बना हुआ है।
