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Politics

मोहम्मद अजहरुद्दीन बने तेलंगाना की सियासत का नया ‘गेम चेंजर’, रेवंत रेड्डी कैबिनेट में शामिल होने से मचा बवाल

पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन की मंत्री पद पर एंट्री से सियासी हलचल तेज़, बीजेपी और बीआरएस ने कांग्रेस पर लगाया ‘मुस्लिम वोट बैंक राजनीति’ का आरोप।

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Mohammad Azharuddin to Join Revanth Reddy Cabinet in Telangana, Sparks Political Controversy
पूर्व क्रिकेट कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन जल्द लेंगे मंत्री पद की शपथ — जुबली हिल्स उपचुनाव से पहले तेलंगाना की राजनीति में मचा भूचाल।

तेलंगाना की राजनीति में इन दिनों क्रिकेट और सत्ता का दिलचस्प संगम देखने को मिल रहा है।
पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन अब मैदान से हटकर
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की कैबिनेट में नज़र आने वाले हैं।
अजहरुद्दीन को शुक्रवार को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी,
लेकिन इस ऐलान से पहले ही सियासी हलचल तेज़ हो गई है।

जहां कांग्रेस इसे “प्रतिनिधित्व और अनुभव का सम्मान” बता रही है,
वहीं भाजपा (BJP) और भारत राष्ट्र समिति (BRS) इसे
वोट बैंक को लुभाने की चाल” करार दे रही हैं।


अजहरुद्दीन की एंट्री पर विपक्ष ने साधा निशाना

तेलंगाना की जुबली हिल्स विधानसभा सीट फिलहाल उपचुनाव की दहलीज़ पर है।
यह इलाका राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों में से एक माना जाता है,
जहां करीब 1 लाख से अधिक मुस्लिम वोटर हैं।

ऐसे में अजहरुद्दीन की मंत्री के रूप में एंट्री को विपक्ष
सीधी चुनावी रणनीति” बता रहा है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा —

“कांग्रेस विकास की राजनीति नहीं,
बल्कि धर्म और चेहरे की राजनीति कर रही है।
अजहरुद्दीन का मंत्री बनना जनता को बहकाने की चाल है।”

वहीं, BRS नेता के.टी. रामाराव ने कहा कि

“रेवंत रेड्डी सरकार अपने वादे पूरे करने में विफल रही है।
अब वह क्रिकेट के दिग्गजों का इस्तेमाल करके
जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाना चाहती है।”

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कांग्रेस का जवाब – ‘यह सम्मान है, रणनीति नहीं’

दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं का कहना है कि
अजहरुद्दीन का मंत्री बनना किसी राजनीतिक सौदेबाज़ी का हिस्सा नहीं,
बल्कि योग्यता और जनता के विश्वास का परिणाम है।

तेलंगाना के शिक्षा मंत्री ने कहा —

“अजहरुद्दीन सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं,
बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव रहे हैं।
उनका प्रशासनिक अनुभव और जनता से जुड़ाव
राज्य के लिए नई ऊर्जा लेकर आएगा।”


क्रिकेट से राजनीति तक – अजहरुद्दीन का सफ़र

मोहम्मद अजहरुद्दीन का नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास के
सबसे स्टाइलिश और सफल कप्तानों में गिना जाता है।

  • उन्होंने भारत के लिए 99 टेस्ट और 334 वनडे मैच खेले।
  • 1990 के दशक में उनकी कप्तानी में भारत ने कई यादगार जीत दर्ज कीं।
  • क्रिकेट के बाद उन्होंने राजनीति में कांग्रेस का दामन थामा,
    और 2019 में हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष बने।

अब वह तेलंगाना की सत्ता में सीधे भूमिका निभाने जा रहे हैं,
जिसे कांग्रेस “खेल और युवाओं की आवाज़ को सरकार में लाने का प्रयास” बता रही है।


तेलंगाना कैबिनेट का समीकरण

वर्तमान में तेलंगाना सरकार में 13 मंत्री हैं,
जबकि राज्य की कुल मंत्रिपरिषद की सीमा 18 सदस्यों की है।
अजहरुद्दीन के जुड़ने से न केवल
अल्पसंख्यक समुदाय को प्रतिनिधित्व मिलेगा,
बल्कि कांग्रेस के अंदर खेल और संस्कृति विभाग को
एक नया चेहरा भी मिल सकता है।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक,
रेवंत रेड्डी सरकार जल्द ही
कुछ और नए चेहरों को भी कैबिनेट में शामिल कर सकती है —
जिसमें महिलाओं और पिछड़े वर्ग के नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

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जुबली हिल्स उपचुनाव का ‘सियासी ट्विस्ट’

जुबली हिल्स सीट, जिसे कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था,
अब त्रिकोणीय मुकाबले में बदल चुकी है।
कांग्रेस, भाजपा और बीआरएस — तीनों पार्टियाँ
यहाँ अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं।

अजहरुद्दीन की लोकप्रियता इस सीट पर
कांग्रेस के लिए तुरुप का पत्ता साबित हो सकती है।
कई विश्लेषकों का मानना है कि

“अजहरुद्दीन की छवि, युवाओं और अल्पसंख्यक मतदाताओं को
कांग्रेस के पक्ष में मोड़ सकती है।”

हालाँकि भाजपा और बीआरएस दोनों ने
“वोट बैंक राजनीति” का आरोप लगाते हुए
इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए “अनुचित प्रभाव” बताया है।


राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि
अजहरुद्दीन की छवि अभी भी साफ-सुथरी और सम्मानजनक है।
उनकी एंट्री कांग्रेस के लिए एक
ब्रांड इमेज सुधारने वाला कदम भी मानी जा रही है।

विश्लेषक प्रो. रमेश नायडू कहते हैं —

“अजहरुद्दीन केवल मुस्लिम चेहरा नहीं हैं,
वे राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले नेता हैं।
कांग्रेस उनकी पहचान का लाभ उठाना चाहती है,
जबकि विपक्ष इसे धार्मिक रंग देने की कोशिश कर रहा है।”

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