Economy
LPG की किल्लत पर सरकार ने कहा “चिंता है, लेकिन घबराएं नहीं”, दो जहाज़ Strait of Hormuz पार कर भारत की ओर रवाना
Iran-US युद्ध के बाद देश में बढ़ी Panic Booking, रोज़ 88 लाख सिलेंडर बुकिंग — सरकार बोली, 25,000 डिस्ट्रीब्यूटर में से किसी एक पर भी ‘Dry Out’ नहीं
आपके घर में गैस का सिलेंडर है? अगर है, तो थोड़ी राहत की साँस लीजिए — लेकिन अगर आप भी उन करोड़ों लोगों में से हैं जो पिछले कुछ दिनों से घबराकर बार-बार बुकिंग कर रहे हैं, तो सरकार की यह बात ध्यान से पढ़िए: “कोई संकट नहीं है, घबराएं नहीं।”
Middle East में जारी Iran-US युद्ध ने दुनिया भर की ऊर्जा आपूर्ति को हिला दिया है। Strait of Hormuz — जो दुनिया की सबसे ज़रूरी समुद्री तेल-गैस आपूर्ति रेखा है — उस पर खतरा मंडरा रहा है। और इसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है, जो अपनी LPG ज़रूरत का बड़ा हिस्सा उसी रास्ते से मंगाता है।
दो जहाज़ निकले — उम्मीद की किरण
भारत सरकार ने शनिवार को बताया कि दो भारतीय जहाज़ — Shivalik और Nanda Devi — जो कुल 92,700 मीट्रिक टन LPG लेकर आ रहे हैं, Strait of Hormuz पार कर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं। Shivalik 16 मार्च को Mundra और Nanda Devi 17 मार्च को Kandla बंदरगाह पहुंचेगा।
यह खबर उन लाखों परिवारों के लिए राहत की तरह है जो पिछले कुछ दिनों से गैस सिलेंडर की चिंता में थे। हालांकि सरकार ने यह भी माना कि स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है।
और भी पढ़ें : IPL 2026 से पहले RCB की बड़ी मुसीबत ₹12.5 करोड़ वाले Josh Hazlewood की Fitness पर लटकी तलवार
सरकार की दो टूक बात
Petroleum Ministry की Joint Secretary Sujata Sharma ने कहा कि LPG की आपूर्ति अभी भी “चिंता का विषय” है, लेकिन देश के 25,000 डिस्ट्रीब्यूटर में से किसी पर भी ‘Dry Out’ की स्थिति नहीं आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि भारत में LPG उत्पादन को 5 मार्च की तुलना में 40 प्रतिशत तक बढ़ाया जा चुका है। पेट्रोल-डीज़ल की बात करें तो सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त आपूर्ति है और देश की सभी रिफाइनरियाँ पूरी क्षमता से चल रही हैं।
Panic Booking — असली समस्या यही है
अब बात करते हैं उस चीज़ की जो असली समस्या बन गई है। सरकार ने बताया कि LPG बुकिंग की संख्या अब 88 लाख प्रतिदिन तक पहुंच गई है, जबकि युद्ध से पहले यह आंकड़ा लगभग 55-56 लाख था।
सोचिए — अगर एक दुकान में सामान है, लेकिन हर इंसान एक दिन में तीन-तीन बार जाकर खरीद ले, तो दुकान खाली हो जाएगी। यही हो रहा है गैस सिलेंडर के साथ। जो कमी नहीं थी, वो Panic Buying से पैदा हो रही है।
सरकार ने उन 60 लाख घरों से अपील की है जो PNG (Piped Natural Gas) कनेक्शन ले सकते हैं, वो जल्द से जल्द यह कदम उठाएं — इससे LPG पर दबाव कम होगा।
Hotels-Restaurants पर सबसे ज़्यादा मार
Iran युद्ध से पहले भारत अपनी LPG ज़रूरत का 85-90 प्रतिशत हिस्सा Middle East से मंगाता था। युद्ध के बाद Strait of Hormuz पर असर पड़ने से Commercial LPG की आपूर्ति सबसे ज़्यादा प्रभावित हुई है।
Maharashtra के Mumbai, Pune, Aurangabad और Nagpur जैसे शहरों में Hotels और Restaurants को Commercial LPG नहीं मिल पा रही। Karnataka, Telangana, Andhra Pradesh और Delhi में भी ऐसी ही स्थिति है हज़ारों छोटे ढाबे और रेस्तरां बंद होने की कगार पर हैं।

यह ऐसा है जैसे किसी रसोइये के पास खाना बनाने का पूरा सामान हो — प्याज़, टमाटर, मसाले सब कुछ — लेकिन चूल्हा जलाने के लिए माचिस ही न हो। Commercial LPG की कमी इन्हीं छोटे कारोबारियों की माचिस छीन रही है।
सरकार ने क्या-क्या किया?
सरकार ने राज्यों को 48,000 किलोलीटर केरोसीन तेल जारी किया है ताकि जिन इलाकों में LPG की दिक्कत हो वहाँ विकल्प उपलब्ध हो। Coal India को निर्देश दिया गया है कि Hotels और Restaurants को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करे। अस्पतालों और छात्रावासों को LPG आपूर्ति में प्राथमिकता दी जा रही है।
29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में Commercial LPG की आपूर्ति फिर से शुरू की गई है। कालाबाज़ारी रोकने के लिए देशभर में छापेमारी भी शुरू हो गई है।
Iran का जवाब — उम्मीद की बात
भारत में Iran के राजदूत Mohammad Fathali ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि भारत-बाध्य जहाज़ों को जल्द ही Strait of Hormuz से सुरक्षित रास्ता मिल सकता है। उन्होंने कहा — “अच्छी ख़बर जल्द आने की उम्मीद है।” यह बयान काफी अहम है क्योंकि Iran ने सीधे तौर पर भारत को आश्वस्त करने की कोशिश की।
भारत पर असर — आगे का रास्ता
विशेषज्ञों का कहना है कि India के लिए तेल से ज़्यादा खतरा LNG (Liquefied Natural Gas) की किल्लत से है, क्योंकि gas imports के लिए विकल्प सीमित हैं। India की 55-65 प्रतिशत LNG imports Strait of Hormuz से होकर आती है और Qatar अकेले लगभग 40 प्रतिशत gas supply करता है।
अगर यह जंग लंबी चली, तो असर सिर्फ घरेलू रसोई तक नहीं रहेगा — कारखाने, उद्योग, और पूरी अर्थव्यवस्था पर इसकी छाया पड़ेगी।
फिलहाल सरकार स्थिति पर नज़र रखे हुए है। Dainik Diary की राय में — इस वक़्त न घबराएं, न जमाखोरी करें। जो ज़रूरत हो उतना ही लें। आपकी ज़िम्मेदारी भी है कि यह संकट और न बढ़े।
