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T20 World Cup Trophy को Hanuman Mandir ले जाने पर छिड़ा विवाद Kirti Azad के बयान पर Gambhir भड़के, Harbhajan ने भी लगाई फटकार
जश्न अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि 1983 World Cup winner और TMC सांसद Kirti Azad के एक Tweet ने पूरी cricket community को दो हिस्सों में बांट दिया — एक तरफ Gambhir का गुस्सा, दूसरी तरफ Azad का जवाब।
8 मार्च 2026 — Ahmedabad के Narendra Modi Stadium में जब India ने New Zealand को 96 रनों से रौंदकर T20 World Cup 2026 जीता, तो पूरा देश झूम उठा। यह India का तीसरा T20 World Cup खिताब था — 2007, 2024 और अब 2026। India पहली ऐसी team बनी जिसने T20 World Cup का खिताब successfully defend किया, और वो भी अपनी home soil पर। यह जीत इतिहास की किताबों में दर्ज होने वाली थी।
लेकिन जश्न के बीच एक विवाद ने दरवाजा खटखटाया — और वो विवाद खेल के मैदान से नहीं, बल्कि social media से आया।
Trophy Mandir गई — और शुरू हो गई बहस
जीत के बाद captain Suryakumar Yadav, head coach Gautam Gambhir और ICC chairman Jay Shah ने stadium के पास स्थित एक Hanuman Mandir में जाकर दर्शन किए और Trophy भी साथ ले गए।
यह एक personal आस्था का मामला था — लेकिन 1983 World Cup winning team के सदस्य और Trinamool Congress के सांसद Kirti Azad को यह बात नागवार गुजरी। उन्होंने Twitter पर लिखा — “Why NOT a Mosque? Why NOT a Church? Why NOT a Gurudwara? The Trophy Belongs to 1.4 BILLION Indians of EVERY Faith — NOT ONE RELIGION’S VICTORY LAP!”
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उन्होंने 1983 की यादें ताजा करते हुए लिखा — “जब हमने Kapil Dev की कप्तानी में World Cup जीता था, तब team में Hindu, Muslim, Sikh और Christian — सभी थे। हम Trophy को अपनी मातृभूमि India के लिए लाए थे।”
बस यहीं से शुरू हुआ असली बवाल।
Gambhir का तीखा जवाब
Gambhir ने ANI से बातचीत में कहा — “मुझे लगता है यह सवाल जवाब देने के लायक भी नहीं है। यह पूरे देश के लिए एक बड़ा पल है। World Cup जीत का जश्न मनाना जरूरी है — और इसीलिए मैं कहता हूं कि कुछ बयानों को उठाने का कोई फायदा नहीं, क्योंकि ये बयान आपकी उपलब्धि को कमजोर करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि खिलाड़ियों ने इस tournament में बहुत दबाव झेला — खासकर South Africa के खिलाफ एक match हारने के बाद। ऐसे में इस तरह के बयान देना अपने ही खिलाड़ियों और team की उपलब्धि को कमतर दिखाने जैसा है।
Gambhir का यह बयान सीधा और बिना लाग-लपेट का था — ठीक वैसे जैसे उनका पूरा career रहा है। जैसे कोई coach अपनी team के लिए shield बनकर खड़ा हो जाए।
Harbhajan Singh ने भी साधा निशाना
Gambhir के पुराने साथी और India के spinner Harbhajan Singh ने भी Kirti Azad की आलोचना करते हुए कहा कि एक former cricketer से ऐसे बयान की उम्मीद नहीं थी। “यह बेतुकी बात है कि कोई players के Mandir जाने को political रंग दे रहा है। Kirti खुद एक former cricketer हैं — मुझे उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। शायद वो politics को ज्यादा priority दे रहे हैं और भूल गए हैं कि वो एक sportsman हैं,” Harbhajan ने कहा।

Ishan Kishan का अंदाज — “अच्छे सवाल पूछिए”
जब Ishan Kishan से reporters ने Kirti Azad के बयान पर प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने कहा — “इतना अच्छा World Cup जीतते हैं, इतने अच्छे सवाल पूछिए। Kirti Azad ने क्या कहा, इस पर मैं क्या बोलूं? कुछ अच्छे सवाल कीजिए ना कि मजा आए।”
यह जवाब जितना simple था, उतना ही effective भी। जैसे कोई बच्चा किसी बेकार बहस में पड़ने की बजाय खेल पर ध्यान देने की बात कहे।
Kirti Azad का पलटवार
Gambhir और Harbhajan के बयानों के बाद Kirti Azad ने reporters से बात की। उन्होंने कहा कि players की dignity बनाए रखना जरूरी है और एक democratic society में सभी धर्मों के बीच आपसी सम्मान होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि athletes को dignity के साथ treat किया जाना चाहिए, लेकिन साथ ही उनकी अपनी जिम्मेदारी भी होती है।
असली सवाल क्या है?
यह विवाद दरअसल दो नजरियों की टकराहट है। एक तरफ वो लोग हैं जो मानते हैं कि किसी की personal आस्था उनका निजी मामला है — Mandir जाना या किसी भी धर्मस्थल पर जाना उनकी मर्जी। दूसरी तरफ वो लोग हैं जो कहते हैं कि National team एक collective identity है जो किसी एक धर्म से ऊपर है।
दोनों पक्षों में दम है। लेकिन इस बहस में सबसे जरूरी बात शायद Gambhir ने कही — कि 15 खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धि को इस तरह के बयानों से कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
World Cup जीतने की खुशी सबकी है — और उस खुशी को किसी भी रंग में रंगना, चाहे political हो या धार्मिक — शायद उस जीत का अपमान ही है।
